बिजनेस स्टैंडर्ड - पेय में परंपरागत फ्लेवर का आया दौर
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पेय में परंपरागत फ्लेवर का आया दौर

टी ई नरसिम्हन /  June 05, 2019

एक वक्त ऐसा भी था जब गर्मी के सीजन के दौरान कोला ब्रांड अपना विज्ञापन बजट बढ़ाते थे। नए जिंगल, जबान पर चढ़ जाने वाली पंच लाइनों और विज्ञापन करने वाले सितारों के प्रभाव में ग्राहक ऐसे बोतल वाले पेय की तरफ आकर्षित होते थे जो युवाओं में जोश भरने के वादे के साथ पेश किया गया था। लेकिन पिछले कुछ सालों से इसमें बदलाव आया है। इस साल ग्राहकों के स्वाद और पसंद में तेजी से बदलाव आया है। बेवरिज बनाने वाली कंपनियां स्वास्थ्य, परंपरागत फ्लेवर और कम चीनी वाले पेय की पेशकश कर रही हैं। साथ ही वे अपने पोर्टफोलियो में फ्रूट जूस को आक्रामकता के साथ पेश कर रही हैं। 

 
कंपनियों और मार्केटिंग करने वालों का कहना है कि वर्ष 2019 में गर्मी के सीजन में जूस श्रेणी काफी परिपक्व हो रही है। बेवरिज ब्रांड ने शुरुआत में जूस बाजार में अपनी जगह बनानी शुरू कर दी क्योंकि कोला के लिए आकर्षण कम होने लगा। लेकिन पिछले साल से ग्राहक काफी एहतियात बरतने लगे हैं, ऐसे में ब्रांड काफी नए प्रयोग कर रहे हैं और वैश्विक ब्रांड में स्थानीय फ्लेवर मिलाने की कोशिश हो रही है। कुछ समय पहले देश की सबसे बड़ी बेवरिज कंपनी कोका कोला ने मिनट्स मेड पोर्टफोलियो के तहत तीन फल आधारित पेय की पेशकश की है जिसका मकसद परंपरागत पेय का विस्तार करना है। इस साल की शुरुआत में तमिलनाडु में अंगूर फ्लेवर वाले पेय, मिनट मेड कलर की पेशकश के बाद यह कदम उठाया गया है। 
 
प्रतिद्वंद्वी कंपनी पेप्सिको स्थानीय पेय पदार्थ के साथ अपने ट्रॉपिकाना स्लाइस पोर्टफोलियो में विस्तार कर रही है। डाबर और आईटीसी अपने जूस ब्रांड रियल, बी नैचुरल और पेपरबोट (हेक्टर बेवरिज) में भी स्थानीय किस्में बढ़ा रहे हैं। उद्योग के अनुमान के मुताबिक पैकेज्ड परंपरागत पेय की मांग में पिछले तीन सालों में 30-35 फीसदी तक की बढ़ोतरी हुई है। यूरोमॉनीटर के मुताबिक जूस की मांग साल दर साल करीब 17 फीसदी की दर से बढ़ रही है जिसमें मूल्यवर्धित जूस का योगदान है। इन बेवरिज में जूस की मात्रा 24 फीसदी तक होती है। शोध एजेंसी का कहना है कि यह श्रेणी सालाना करीब 16 फीसदी की दर से बढ़ रही है। 
 
देश में जूस बाजार अनुमानत: करीब 3.6 अरब डॉलर तक है और उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक इसका 72 फीसदी हिस्सा स्टॉल और छोटे रेस्तरां में छा सकता है। सबसे ज्यादा लोकप्रिय फ्लेवर आम और इसके बाद नारंगी, तरबूज, अंगूर, अनानास और अन्य फलों के फ्लेवर आते हैं। उनका कहना है कि बाजार में कोका कोला, पारले एग्रो, पेप्सिको और डाबर का दबदबा है जिनका 2018 में जूस की कुल खुदरा बिक्री मूल्य में करीब तीन-चौथाई योगदान है और उनके आम आधारित पेय की वृद्धि में प्रमुख भूमिका है।
 
यूरोमॉनीटर का कहना है कि जूस की मांग भविष्य में बढ़ सकती है। वर्ष 2019-23 तक देश में कुल जूस श्रेणी में सालाना 16.5 फीसदी वृद्धि का अनुमान है। एक साल में 100 फीसदी जूस श्रेणी में 9.4 फीसदी तक की वृद्धि होगी और जूस ड्रिंक्स में सालाना 14.8 फीसदी तक की वृद्धि का अनुमान है। कोका कोला इंडिया के प्रवक्ता का कहना है, 'हम गर्मी के मौसम में विभिन्न पोर्टफोलियो के लिए विज्ञापन अभियान को तेजी से बढ़ा रहे हैं।' प्रवक्ता का कहना है, 'वर्ष 2019 में हमने मिनट मेड के तहत चार बेवरिज ब्रांड की पेशकश की है। हमारा विचार मिनट मेड के तहत न केवल अपनी पेशकश का विस्तार करना है बल्कि इसे प्रमुख ब्रांड बनाना है जिसमें फलों की पौष्टिकता शामिल हो।' कोका कोला अपने पोर्टफोलियो का स्थानीयकरण आक्रामक तरीके से कर रही है और यह स्थानीय मसालों और फलों का का इस्तेमाल कर परंपरागत तरीके से तैयार किए गए पेय मांग में संभावनाएं तलाशने में है। 
 
आईटीसी में विभागीय मुख्य कार्यकारी (फूड्स) हेमंत मलिक का कहना है कि कंपनी ने गर्मी के लिए कुछ पहल करने की योजना बनाई है। उन्होंने कहा, 'बी नैचुरल ने प्रीमियम जूस और बेवरिज की पेशकश की है जो देश में अपनी तरह का अलग पेय होगा जिसमें कोई प्रिजर्वेटिव नहीं होगा।'  केविनकेयर ने दो साल पहले ही कम चीनी वाले और बिना प्रिजर्वेटिव वाले जूस की पेशकश की थी। कंपनी का कहना है कि इसने इस श्रेणी में अपने खर्च में तिगुनी बढ़ोतरी की है। केविनकेयर बेवरिजेज और डेयरी के कारोबारी प्रमुख, बी पी रवींद्रन का कहना है, 'कई ब्रांड अपने उत्पाद में नए प्रयोग कर रहे हैं जिससे उद्योग की वृद्धि में मदद मिल रही है।' 
 
कंपनी ने नारियल पानी और एक मिल्कशेक लाइट किस्म की पेशकश की है जिसमें कोई चीनी या प्रिजर्वेटिव नहीं मिला है। कंपनी को उम्मीद है कि इसका 55 फीसदी बेवरिज कारोबार इन्हीं उत्पादों से होगा। विशेषज्ञों का कहना है कि बेवरिज कंपनियों पर यह दबाव बढ़ रहा है कि जूस में नए प्रयोग की रफ्तार बढ़े। कोका कोला के प्रवक्ता का कहना है कि ग्राहकों की पसंद के मुताबिक एक विविध बेवरिज पोर्टफोलियो बनाने का विचार है। उनका कहना है कि पूरा जोर ऐसे उत्पाद तैयार करने पर है जो स्थानीय स्वाद के अनुरूप हो। निश्चित तौर पर जूस ब्रांडों के लिए अभी और भविष्य के लिए निश्चित कार्य मिल चुका है।
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