बिजनेस स्टैंडर्ड - 50,000 टन प्याज का बफर स्टॉक
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50,000 टन प्याज का बफर स्टॉक

भाषा / नई दिल्ली June 04, 2019

केंद्र ने प्याज उत्पादक राज्यों में सूखे जैसी स्थिति के मद्देनजर आने वाले महीनों में इसकी कीमतों पर अंकुश रखने के लिए 50,000 टन प्याज का बफर स्टॉक बनाना शुरू कर दिया है। खाद्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने आज यह जानकारी दी। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, एशिया में प्याज की सबसे बड़ी थोक मंडी महाराष्ट्र के लासलगांव में इसका थोक भाव 29 प्रतिशत बढ़कर 11 रुपये प्रति किलोग्राम चल रहा है। पिछले साल इसी दौरान भाव 8.50 रुपये का था। दिल्ली में खुदरा प्याज 20 से 25 रुपए प्रति किलोग्राम पर चल रहा है। अधिकारी ने कहा, 'उत्पादक क्षेत्र में सूखे की स्थिति के कारण, रबी की प्याज का उत्पादन कम होने की संभावना है। इससे इसकी आपूर्ति व भाव , दोनों पर दबाव बढ़ सकता है।' सहकारी संस्था, नेफेड को मूल्य स्थिरीकरण कोष के तहत प्याज की खरीद करने के लिए कहा गया है, उसने अब तक रबी की लगभग 32,000 टन रबी की एसी किस्मों की प्याज खरीदी है जिनको जमा कर के कुछ समय के लिए रखा जा सकता है। इस भंडार को जुलाई के बाद नई आपूर्ति न होने के समय इस्तेमाल में लाया जा सकता है। अधिकारी ने कहा कि प्याज के अलावा सरकार इस वर्ष दलहन के लिए भी 16.15 लाख टन का बफर स्टॉक बना रही है।
 
इस वर्ष महाराष्ट्र, कर्नाटक और आंध्र प्रदेश जैसे प्रमुख प्याज उत्पादक राज्य सूखे की स्थिति से गुजर रहे हैं। पहले अग्रिम अनुमान के अनुसार जून में समाप्त होने वाले चालू फसल वर्ष 2018-19 में प्याज उत्पादन थोड़ा अधिक यानी दो करोड़ 36.2 लाख टन होने का अनुमान है जो उत्पादन वर्ष 2017-18 में दो करोड़ 32.6 लाख टन था। सरकार के द्वारा सूखे के प्रभाव के कारण अनुमान को संशोधित किए जाने की उम्मीद है। भारत के प्याज उत्पादन का 60 प्रतिशत भाग रबी का होता है जिसकी खुदाई लगभग पूरी हो चुकी है। भारत में प्याज तीन बार, खरीफ (गरमी), देर खरीफ और रबी (जाड़े) के सीजन में लगाई जाती है। 
 
मूंग की नई उत्तम किस्म विकसित
 
चौधरी चरण सिंह हरियाणा कृषि विश्वविद्यालय, हिसार के वैज्ञानिकों ने मूंग की एक नई किस्म एमएच-1142 विकसित की है। उत्पादन तथा रोग प्रतिरोधात्मकता की दृष्टि से यह एक उत्तम किस्म बताई गई है। कुलपति प्रो. के.पी. सिंह ने कहा कि आचार्य एन.जी. रंगा कृषि विश्वविद्यालय, गुंटूर (आंध्र प्रदेश) में खरीफ दलहनों पर हाल ही में संपन्न वार्षिक समूह बैठक में इस किस्म को देश के उत्तर-पश्चिमी और उत्तर-पूर्वी मैदानी क्षेत्र के राज्य पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तराखंड, दिल्ली, उप्र, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और असम में खरीफ मौसम में खेती के लिए चिह्निïत किया गया है। उत्पादन की दृष्टि से यह किस्म मूंग की लोकप्रिय किस्म एमएच-421 से बेहतर है। विभिन्न राज्यों में एमएच-1142 की औसत पैदावार 12 क्विंटल प्रति हेक्टेयर है जबकि इसकी 20 क्विंटल उत्पादन क्षमता है। यह किस्म पीला मोजैक, पत्ता झूरिया और पत्ता मरोड़ रोगों के मामले में प्रतिरोधी है जबकि एंथ्राकनोज व सफेद चूर्णिया रोगों के प्रति इसकी प्रतिरोधक क्षमता मध्यम है। विभिन्न राज्यों में यह किस्म पकने में 63-70 दिन का समय लेती है और अन्य किस्मों की अपेक्षा इस पर सफेद मक्खी कीट का बहुत कम प्रकोप होता है।   
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