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डिजिटल इंडिया: एटीएम घटे, बढ़ रहे पीओएस टर्मिनल

निकहत हेटावकर / मुंबई June 04, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक के विजन 2021 रिपोर्ट में ज्यादा डिजिटल और कम नकदी वाले समाज का लक्ष्य हासिल करने का जोर दिया गया है, जो सरकार के डिजिटल इंडिया की दिशा में उठा कदम है। इसके साथ ही भुगतान संबंधी बुनियादी ढांचे में भी बदलाव हो रहा है। वित्त वर्ष 2019 में प्वाइंट आफ सेल (पीओएस) टर्मिनल लगाने में तेजी आई है, जबकि देश में ऑटोमेटेड टेलर मशीन (एसीएम) की संख्या घट रही है। अगर एटीएम की सघनता देखें तो भारत कुल आबादी के हिसाब से अभी भी बहुत नीचे है। पिछले साल एटीएम 554 यूनिट घटकर 2.22 लाख यूनिट रह गए, वहीं पीओएस टर्मिनल की संख्या 6.4 लाख बढ़ी है और मार्च के अंत तक इनकी कुल संख्या 37.22 लाख यूनिट हो गई है।
 
डिजिटल भुगतान में जहां उल्लेखनीय बढ़ोतरी हो रही है, वहीं नकदी इस्तेमाल में कमी के कोई संकेत नहीं मिल रहे हैं। पिछले साल एटीएम से नकद निकासी 14 प्रतिशत बढ़ी है और नोटबंदी के पहले की तुलना में इस समय ज्यादा नकदी चलन में है। रिजर्व बैंक का मानना है कि पीओएस की उपलब्धता बढऩे के साथ नकदी की मांग घटेगी।  रिजर्व बैंक ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, 'ऐसा पाया गया है कि पूरी आर्थिक व्यवस्था में नकदी का चलन ज्यादा है। भुगतान करने के डिजिटल माध्यम से स्वाभाविक रूप से इस परर असर पड़ा है और ग्राहकों को तनावरहित और बेहतर सुविधा मिल रही है।' बैंक भी चाहते हैं कि डिजिटल भुगतान में तेजी आए और एटीएम या तो बंद किए जाएं या इन्हें स्थापित किया जाना कम हो। पिछले साल निजी क्षेत्र के ऐक्सिस बैंक ने 2000 से ज्यादा एटीएम बंद किए हैं जबकि भारतीय स्टेट बैंक और बैंक आफ इंडिया ने 1,000 से ज्यादा एटीएम बंद किए हैं। रिजर्व बैंंक के आंकड़ों के मुताबिक कुल 49 बैंकों में पिछले साल 30 से ज्यादा बैंकों ने एटीएम बंद किए हैं। बहरहाल बाजार के जानकारों का कहना है एटीएम बंद किया जाना समय के पहले की कार्रवाई है और साफ तौर पर इसकी वजह आर्थिक है। 
 
सर्वत्र टेक्नोलॉजिज के संस्थापक और वाइस चेयरमैन मंदर अगाशे ने कहा, 'एटीएम महंगे हैं। इसमें ज्यादा पूंजी और परिचालन लागत की जरूरत होती है और इसके  हार्डवेयर व सॉफ्टवेयर का रखरखाव शुल्क भी ज्यादा है। इन सभी वजहों से एटीएम लगाना खर्चीला और घाटे का सौदा है। प्रति निकासी लागत भी बढ़ रही है।'  एटीएम चलाने की लागत बढ़ी है, वहीं इंटरचार्ज शुल्क स्थिर है। यह शुल्क एटीएम ऑपरेटर हर निकासी पर लेते हैं। एटीएम उद्योग इंटरचार्ज में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं, क्योंकि नए नियमों से लागत बढ़ी है। बहरहाल इस मसले पर कोई आम राय नहीं बन पाई है कि इसका बोझ बैंकों पर डाला जाना चाहिए। 
 
एटीएम ऑपरेटरों के उद्योग संगठन कॉन्फेडरेशन आफ एटीएम इंडस्ट्री (सीएटीएमआई)ने एटीएम स्थापित किए जाने में स्थिरता की रिपोर्ट को लेकर निराशा जताई है। सीएटीएमआई के प्रवक्ता ने कहा, 'रिजर्व बैंक का विचार है कि नकदी के बजाय डिजिटल भुगतान हो और इसमें यह संज्ञान में नहीं लिया गया है कि अगर एटीएम इन्फ्रास्ट्रक्चर की कमी रहती है तो इससे ग्रामीण इलाकों में पैसे तक पहुंच कम होगी और इससे वित्तीय समावेशन पर बुरा असर पड़ेगा।'  उन्होंने कहा कि जिन लोगों को जनधन खाते के माध्यम से औपचारिक वित्तीय व्यवस्था में शामिल किया गया है, उनकी जरूरतों को हल करने के लिए अतिरिक्त एटीएम की जरूरत है।  बहरहाल रिजर्व बैंक को भरोसा है कि डिजिटल भुगतान से वित्तीय समावेशन संभव है और उसने पीओएस इन्फ्रास्ट्रक्चर बढ़ाकर 2021 के अंत तक 50 लाख करने की योजना बनाई है। 
Keyword: RBI, digital, ATM, POS, banking,,
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