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सरकार के व्यय में भारी कटौती

अरूप रॉयचौधरी और इंदिविजल धस्माना / नई दिल्ली June 04, 2019

सरकार ने 2018-19 के राजकोषीय घाटे का पुनरीक्षित लक्ष्य हासिल करने के लिए व्यय में भारी कटौती की है। आधिकारिक आंकड़ों से पता चलता है कि राजकोषीय घाटा सकल घरेलू उत्पाद का 3.4 प्रतिशत रखने के लिए व्यय में अप्रत्याशित रूप से 1.45 लाख करोड़ रुपये की कटौती की गई है। उल्लेखनीय है कि व्यय में कटौती मार्च के अंत तक अनंतिम व्यय के आंकड़ों और वित्त वर्ष 2019 के पुनरीक्षित अनुमान के बीच का अंतर है। यह बजट अनुमान और पुनरीक्षित अनुमान के बीच का अंतर नहीं है।
 
यह संकुचन, शामिल कटौती  और रोल ओवर पिछले साल की तुलना में करीब दोगुना है और यह वित्त वर्ष 2019 के पुनरीक्षित अनुमान की तुलना में करीब 6 प्रतिशत बढ़ा है। शुक्रवार को लेखा महानियंत्रक की ओर से जारी आंकड़ों के मुताबिक वित्त मंत्रालय ने व्यय मेंं कटौती कर दी थी क्योंकि कर राजस्व में 1.67 लाख करोड़ रुपये की कमी आई थी।   इस क्षेत्र में प्रारंभिक रूप से प्राप्तियों में अनुमान की तुलना में कमी आई है।  गैर कर राजस्व व विनिवेश सहित गैर कर्ज पूंजीगत प्राप्तियों में कमी आई है। 
 
व्यक्तिगत आयकर और वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) के कुछ हिस्से का संग्रह पुनरीक्षित अनुमान के लक्ष्य से कम रहा। व्यक्तिगत आयकर संग्रह 1.58 लाख करोड़ रुपये या 25 प्रतिशत कम रहा, जबकि जीएसटी 46,365 करोड़ रुपये या 9.2 प्रतिशत कम रहा।  सरकार ने व्यय में बड़ी कटौती की है, ऐसे में राजस्व व्यय पर असर कम पड़ा है। राजस्व व्यय में 1.33 लाख करोड़ रुपये की कमी आई है। इसका मतलब यह हुआ कि कुल संकुचन में में 90 प्रतिशत राजस्व की ओर से है। कुछ व्यय जैसे वेतन और पेंशन को नहीं टाला जा सकता है, ऐसे में मुख्य रूप से सब्सिडी, खाकर खाद्य सब्सिडी को आगे बढ़ाया गया है। 
 
सीजीए की वेबसाइट पर सब्सिडी आगे बढ़ाने का आंकड़ा आधिकारिक रूप से उपलब्ध नहीं है, वहीं वित्त मंत्रालय के अधिकारियोंं का कहना है कि उर्वरक सब्सिडी का रोल ओवर अब 35,000 से 40,000 करोड़ रुपये हो गया है, जबकि पेट्रोलियम सब्सिडी का रोल ओवर 20,000 करोड़ रुपये के आसपास है।  केयर रेटिंग में मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा, 'जब भी राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करना होता है और प्राप्तियां अनुमान के मुताबिक नहीं होती हैं तो सब्सिडी को आगे बढ़ाया जाता है।'  आगे बढ़ी सब्सिडी का समायोजन अप्रैल और मई के खाते में जाएगा, लेकिन सरकार ने वित्त वर्ष 2018-19 के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य हासिल कर लिया है। 
 
सबनवीस ने कहा कि सरकार के खाते नकदी आधारित होते हैं, इसका मतलब यह हुआ कि वित्त वर्ष के अंत तक जो भी खर्च किया या कमाया गया उसी का लेखा-जोखा होता है। पूंजीगत व्यय में करीब 13,000 करोड़ रुपये की कटौती की गई है, जो कुल कटौती के 10 प्रतिशत से भी कम है। वित्त वर्ष 19 के 3.02 लाख करोड़ रुपये कुल पूंजीगत व्यय में 91,137 करोड़ रुपये पहली तिमाही में खर्च किए गए, जो पिछले साल की समान तिमाही में हुए 27,108 करोड़ रुपये खर्च की तुलना में तीन गुना है। 
 
इसके बावजूद सकल नियत पूंजी सृजन, जो इस समय मुख्य रूप से सरकार के पूंजीगत व्यय से संचालित होता है, वित्त वर्ष 19 की चौथी तिमाही में सिर्फ 3.4 प्रतिशत बढ़ा है, जबकि पहले की तीन तिमाहियों में दो अंकों की वृद्धि दर्ज की गई थी। इसका मतलब यह है कि निजी क्षेत्र द्वारा निवेश में सुस्ती जारी है और यह नई सरकार के लिए अर्थव्यवस्था की राह में तेजी लाने की दिशा में चुनौती है। 
Keyword: fiscal deficit, revenue, economy,,
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