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ओटीटी पर लटक रही सेंसरशिप की तलवार!

आशिष आर्यन और नेहा अलावधि / नई दिल्ली 06 03, 2019

सरकार लाई है मसौदा दिशानिर्देश

कॉपीराइट कानून में संशोधन

दिशानिर्देश में इंटरनेट एवं ओटीटी सेवाएं अनिवार्य लाइसेंस नियमों की जद में लाने की बात
बंबई उच्च न्यायालय ने कहा था, ओटीटी के लिए लाइसेंस अनिवार्य नहीं

बिजनेस स्टैंडर्ड ओटीटी पर लटक रही सेंसरशिप की तलवार!केंद्र सरकार कॉपीराइट कानून, 2013 में संशोधन के लिए नया मसौदा दिशानिर्देश लेकर आई है। इस मसौदा दिशानिर्देश के जरिये इंटरनेट एवं ओवर-द-टॉप (ओटीटी) सेवाएं अनिवार्य सांविधिक लाइसेंस नियमों के तहत लाई जाएंगी। हालांकि नया दिशानिर्देश बंबई उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ जा सकता है, जिसमें कहा गया है कि ओटीटी एवं इंटरनेट सेवाएं भारत में सांविधिक लाइसेंसिंग की जद में नहीं आती हैं। इस साल अप्रैल में टिप्स इंडस्ट्रीज ने भारती एयरटेल की विंक म्यूजिक के खिलाफ याचिका दायर की थी। टिप्स की याचिका पर सुनवाई के बाद न्यायालय ने कहा कि विंक उपयोकर्ताओं को गाने डाउनलोड करने की अनुमति नहीं दे सकती लेकिन संगीत सुनने की सुविधा देने पर कोई पाबंदी नहीं होगी।

उच्च न्यायालय ने कहा कि कॉपीराइट कानून, 2013 के धारा 31 (डी) के प्रावधान उस स्थिति में लागू नहीं होंगे अगर ओटीटी प्लेटफॉर्म डाउनलोड करने की अनुमति नहीं देकर केवल प्रसारण की सुविधा देते हैं। ओटीटी प्लेटफॉर्म अनिवार्य लाइसेंसिंग नियमों की जद में लाने के लिए कॉपीराइट कानून में संशोधन संबंधी मसौदा दिशानिर्देश पर विशेषज्ञों की राय अलग-अलग है। वे इस बात पर एकमत नहीं है कि क्या इससे भारत में सामग्री नियंत्रण (कन्टेंट सेंसरशिप) की शुरुआत तो नहीं हो रही है। कुछ लोगों का मानना है कि नए मसौदा दिशानिर्देश उच्च न्यायालय का आदेश पलटने के लिए लाए गए हैं, जबकि कुछ अन्य लोगों का कहना है कि इस पहल से ओटीटी प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध सामग्री पर कोई असर नहीं पड़ेगा।

प्रस्तावित मसौदा नियम बंबई उच्च न्यायालय के आदेश के विपरीत दिख रहे हैं क्योंकि इसके तहत धारा 31 डी की जद में सभी तरह के प्रसारण लाए जाने का प्रावधान है जबकि पहले रेडियो और टेलीविजन ही इसके  दायरे में आते थे। इकिगई लॉ में वरिष्ठ सहायक तान्या सदाना कहती हैं, 'वास्तविक कानून की भाषा जब तक नहीं बदलती है तब तक मसौदा संशोधन का कोई खास असर नहीं होगा।' दूसरे विशेषज्ञों का मानना है कि मसौदा दिशानिर्देश का आशय यह हो सकता है कि ओटीटी सेवा प्रदाताओं को सामग्री नियमन से जुड़े कुछ प्रावधान करने होंगे। टेकलेजिस एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसिटर्स में पार्टनर सलमान वारिस कहते हैं, 'यह मसौदा दिशानिर्देश उच्च न्यायालय का आदेश पलट सकता है। सामग्री नियमन कितना प्रभावी होगा यह कानून तैयार करने और इसे लागू करने के तरीकों पर निर्भर करेगा।' 
Keyword: copyright, law, OTT,,
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