बिजनेस स्टैंडर्ड - चुनाव हुए खत्म अब बढ़ती आय वाले शेयर देंगे दम
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Wednesday, June 19, 2019 01:04 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विश्लेषण खबर

चुनाव हुए खत्म अब बढ़ती आय वाले शेयर देंगे दम

संजय कुमार सिंह /  June 02, 2019

लोकसभा चुनावों का एक्जिट पोल आने से पहले और मतगणना के दिन शेयर बाजारों में अच्छा खासा उतार चढ़ाव देखा गया। एक्जिट पोल के अगले दिन यानी 20 मई को बंबई स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 3.75 फीसदी चढ़ गया। लेकिन उसके अगले ही दिन उसमें 0.97 फीसदी गिरावट आ गई। 23 मई को जब चुनाव के नतीजे सामने आए तो सेंसेक्स दिन में उछलकर 40,100.5 अंक तक पहुंच गया। लेकिन दोपहर बाद उसमें गिरावट आई और कारोबार की समाप्ति पर वह 0.76 फीसदी नीचे बंद हुआ। यह वाकई मुश्किल वक्त होता है और अगर शेयर कारोबारी गिरावट या उछाल को सही तरीके से नहीं भांप पाता है तो उठापटक भरे माहौल में उसे घाटा होने की पूरी आशंका रहती है। अधिकतर खुदरा निवेशक आम तौर पर दिन में कोई न कोई दूसरा काम या नौकरी भी करते हैं। इसलिए उनके लिए एक्जिट पोल और चुनावी नतीजों के दिन जोखिम भरे हो सकते हैं। ऐसे निवेशक अगर शेयरों की बुनियादी बातों का ध्यान रखें, लंबे समय के लिए निवेश करें और शेयरों को खरीदने के बाद रखे रहें तो बेहतर होता है। जिन के पास खुद शेयरों की जांच-पड़ताल करने का वक्त नहीं होता, वे म्युचुअल फंडों का रास्ता पकड़ें तो अच्छा रहेगा।

 
जल्द गिरावट के लिए रहें तैयार
 
बाजार को हमेशा राजनीतिक स्थिरता ही पसंद आती है और नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सत्ता में लौटने से बाजार की यह मुराद पूरी भी हो गई है। जाहिर है कि बाजार में इससे अच्छा माहौल बनेगा। लेकिन अब चुनाव बीत चुके हैं, सरकार का गठन भी हो चुका है, इसलिए बाजार में कुछ गिरावट की संभावना दिख रही है। डब्ल्यूजीसी वेल्थ में मुख्य निवेश अधिकारी (सीआईओ) राजेश चेरुवु कहते हैं, 'हमें अब बिकवाली के दौर देखने को मिल सकते हैं। बड़े मौके अब निकल चुके हैं और निकट अवधि में कुछ बड़ा नहीं होने वाला है , इसलिए बाजार प्रतिभागी मुनाफावसूली कर सकते हैं।' शेयरों की कीमत भी जरूरत से ज्यादा ऊपर पहुंच चुकी है, जिसकी वजह से लुढ़कने का खटका बना हुआ है। चेरुवु को लगता है कि बाजार में तेजी का अगला दौर जून के मध्य में शुरू होगा और आम बजट आने तक बाजार दौड़ता रहेगा। लंबे समय की बात करें तो भारतीय शेयर बाजारों की सकारात्मक संभावना बनी हुई हैं।  मॉर्गन स्टैनली को लगता है कि जून, 2020 तक सेंसेक्स 45,000 अंक लांघ लेगा। ऐसी सूरत में निकट भविष्य में शेयर अपनी बुनियादी मजबूती या कमजोरी के हिसाब से ही चलते दिखेंगे। बजाज आलियांज लाइफ इंश्योरेंस के मुख्य निवेश अधिकारी संपत रेड्डïी कहते हैं, 'तेजी का सिलसिला तभी जारी रहेगा यदि आय में एक बार फिर वृद्घि लौट आती है।'
 
लगातार चलती रहें नीतियां
 
चूंकि सत्ता इस बार भी भाजपा के हाथ में ही है, इसलिए माना जा रहा है कि सरकार आर्थिक मंदी और गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के संकट जैसी विभिन्न समस्याओं को जल्द दूर करने में जुट जाएगी। आय में एक बार फिर वृद्घि हो रही है, लेकिन वह चुनिंदा शेयरों में ही है और बाकी शेयर अब तक सुस्त ही पड़े हैं। अवेंडस कैपिटल ऑल्टरनेट स्ट्रैटेजीस के सह मुख्य कार्य अधिकारी वैभव सांघवी कहते हैं, 'पिछले डेढ़ साल में बैंकों ने अपनी गैर निष्पादित संपत्तियों (एनपीए) की पहचान की है और अपने बहीखातों की काफी हद तक सफाई भी कर ली है। हमें उम्मीद है कि ऋण में वृद्घि की रफ्तार बढऩे के साथ ही बैंकिंग एवं वित्तीय सेवा क्षेत्र की आय में जबरदस्त इजाफा होगा क्योंकि अभी तक वृद्घि की गति बहुत कम है। निफ्टी में इस क्षेत्र की कंपनियों का 35 फीसदी से अधिक भार है।' रेड्डïी को लगता है कि खपत में मंदी कुछ समय ही रहेगी। लगता यही है कि आर्थिक वृद्घि कमजोर रहने के कारण दुनिया भर में केंद्रीय बैंक ब्याज दरें कम ही रखेंगे और तरलता में कोई कमी नहीं आने देंगे। शेयर जैसी जोखिम भरी संपत्तियों के लिए यह सकारात्मक स्थिति है। भारतीय रिजर्व बैंक भी हरकत में आ सकता है। इलारा कैपिटल में अर्थशास्त्री गरिमा कपूर कहती हैं, 'हमें इस वित्त वर्ष में दरों में 50 से 75 आधार अंकों की कटौती होने की उम्मीद है।' उनकी राय में रिजर्व बैंक अगर विदेशी मुद्रा की अदलाबदली (फॉरेक्स स्वैप) या नकद आरक्षी अनुपात (सीआरआर) में कटौती जैसे कदम उठाकर बाजारों में तरलता बढ़ाता है तो निवेशकों को भी राहत मिल सकती है। गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) को तरलता की सुविधा प्रदान करने और बैंक पुनर्पूंजीकरण करने जैसे उपाय भी वित्तीय क्षेत्र का संकट कम करने में मदद करेंगे। सरकार लोगों को नकद लाभ जल्द प्रदान करती है तो ग्रामीण इलाकों में संकट से जूझ रहे लोगों को कुछ समय के लिए राहत मिलेगी और इससे खपत में भी तेजी आ सकती है।
 
स्थानीय और वैश्विक घटनाक्रम
 
विशेषज्ञों ने आगाह किया है कि बाजार को उछाल का नया और लंबा दौर शुरू करने से पहले कई तरह की रुकावटें लांघनी पड़ेंगी। आय में वृद्घि का टिकाऊ सिलसिला दोबारा शुरू होने का इंतजार सभी को है, लेकिन अभी तक ऐसा होता नहीं दिखा है। करीब नौ महीने पहले खपत में भी सुस्ती आनी शुरू हो गई टाी और तीन महीने पहले समूची अर्थव्यवस्था का ही दम फूलने लगा। किसानों को उनकी उपज का बहुत कम दाम मिल रहा है, जिसके कारण ग्रामीण क्षेत्रों में दो साल से संकट बरकरार है। मॉनसून पर भी करीबी नजर रखनी पड़ेगी क्योंकि ग्रामीण आय और खपत का पटरी पर आना बहुत कुछ इस पर ही निर्भर करता है। वैश्विक स्तर पर अमेरिका और चीन का व्यापार युद्घ अब भी जारी है। ब्रेक्सिट का मसला भी यूरोपीय संघ के भीतर समस्या खड़ी कर सकता है। वैश्विक वृद्घि धीमी होने के बाद भी कच्चे तेल की कीमतें मजबूत बनी हुई हैं क्योंकि ईरान पर प्रतिबंध लगा दिए गए हैं और परमाणु मसले पर अमेरिका और ईरान की जबानी जंग जारी है। कपूर कहते हैं, 'यदि इनमें से कोई भी मुद्दा भड़क उठा तो जोखिम भरा वातावरण तैयार हो जाएगा, जिसका असर भारत समेत उभरते बाजारों में विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) द्वारा किए जा रहे निवेश पर पड़ेगा।'
 
भूलकर भी न करें ये गलतियां
 
भारतीय बाजार मोटे तौर पर आय वृद्घि के पटरी पर लौटने का इंतजार कर रहा है और उसकी रफ्तार भी इसी पर निर्भर करती है, इसलिए निवेशकों को वृहद आर्थिक स्थिति देखकर ही निवेश कर देने की आदत से बाज आना चाहिए। बीएनपी पारिबा म्युचुअल फंड में वरिष्ठï फंड प्रबंधक - इक्विटी कार्तिकराज लक्ष्मणन का मशविरा है, 'पिछले कुछ साल में जब सकल स्तर पर आय में वृद्घि सुस्त थी तो कई क्षेत्रों और बाजार पूंजीकरण वाली चुनिंदा कंपनियों ने 15 से 20 फीसदी सालाना की वृद्घि हासिल की थी। हमें लगता है कि बाजार में ऐसा ही माहौल रहेगा और कंपनियां चुनते समय सतर्कता बरतनी पड़ेगी।' समझदार और दूरदर्शी निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो में एक ही प्रकार के शेयरों की भरमार के जोखिम से भी बचना चाहिए। सबसे पहले जोखिम लेने की अपनी क्षमता के आधार पर तय कीजिए कि आपको कितना निवेश शेयरों में करना है। उसके बाद ही विविधता भरा पोर्टफोलियो तैयार कीजिए। चेरुवु समझाते हैं, 'किसी एक ही क्षेत्र या एक ही शेयर की जरूरत से ज्यादा लिवाली से बचिए चाहे आपको वह क्षेत्र या शेयर कितना भी अधिक पसंद क्यों न हो।' उछाल की संभावना से ठीक पहले बाजार में कदम रखने और गिरावट के खटके से ठीक पहले निकल लेने की कोशिश न करें क्योंकि लंबे समय तक लगातार ठीक समय पर ऐसा करना लगभग नामुमकिन ही होता है। ज्यादा समझदारी तब होगी, जब आप व्यवस्थित तरीके से (हर महीने एक छोटी राशि) निवेश करेंगे ताकि जो शेयर आपको पसंद हों, उनमें आपको आखिर में फायदा ही हो। बेहद छोटे समय के लिए लक्ष्य तय करना और शेयर में निवेश करना भी महंगा साबित हो सकता है। विशेषज्ञों का तजुर्बा बताता है कि शेयर बाजार में सीधे निवेश करने वाले ज्यादातर लोगों की रकम इसलिए डूबती है क्योंकि वे शेयरों में बेहद कम वक्त के लिए निवेश करते हैं और निकल जाते हैं। उनकी राय है कि कम से कम तीन से पांच साल का वक्त लेकर निवेश किया जाए तो भारत जैसे बढ़ती हुई अर्थव्यवस्था में रकम गंवाना मुश्किल है। लेकिन इसके लिए जरूरी है कि आपने अपने शेयर बेहद एहतियात के साथ चुने हों। पिछले एक साल में कुछ लार्ज-कैप शेयर तेजी से दौड़े हैं और मिड-कैप तथा स्मॉल-कैप शेयरों में गिरावट आई है। लेकिन 2018 में मिड और स्मॉल-कैप शेयरों में आपने कितनी भी चोट खाई हो, इन्हें पूरी तरह नजरअंदाज करने में भी समझदारी नहीं होगी।
Keyword: election, share, market, sensex, बीएसई, कंपनी, शेयर,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या जेट एयरवेज को एनसीएलटी में मिल जाएंगे खरीदार?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.