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ग्रामीण क्षेत्र में सुस्त कारोबार से मंद हुई एफएमसीजी शेयरों की धार

श्रीपाद ऑटे /  June 02, 2019

कमजोर बिक्री और नकदी से जुड़ी दिक्कतों के कारण हाल में पेज इंडस्ट्रीज का शेयर 10 प्रतिशत नीचे लुढ़क गया। पिछले एक दशक में यह शेयर में आई सबसे तेज गिरावट थी। कंपनी प्रबंधन ने इन्वेस्टर कॉल में कारोबार के दबाव में होने की बात स्वीकार की थी। कंपनी की मार्च तिमाही की बिक्री में महज 1 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अन्य एफएमसीजी कंपनियों हिंदुस्तान यूनिलीवर और डाबर के साथ पेज भी उन कंपनियों में शामिल हो गई है, जिनकी कुल बिक्री पर कमजोर नकदी प्रवाह ने असर डाला है। वितरकों की फंडिंग और ग्रामीण क्षेत्रों में कमजोर मांग की हालत नहीं सुधरी तो एफएमसीजी खंड के लिए चुनौतियां और बढ़ सकती हैं। इस बात का असर निफ्टी एफएमसीजी सूचकांक में भी दिखा है। चुनाव नतीजे घोषित होने के बाद एफएमसीजी सूचकांक सपाट रहा था, जबकि निफ्टी 50 में करीब 4 प्रतिशत की तेजी आई। 

 
एचडीएफसी सिक्योरिटीज में खुदरा प्रमुख दीपक जसानी का कहना है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी)  के पास नकदी का अभाव है। इससे खपत प्रभावित हो रही है। ग्रामीण आय की कमजोर वृद्धि दर और पिछले कुछ वर्षों का उच्च आधार इस दुर्बलता के अन्य कारण हैं। डाबर जैसी कंपनियों, जिनकी ग्रामीण क्षेत्रों में खासी उपस्थिति है, पर दोहरी मार पड़ी है। इसकी वजह यह है कि शहरी इलाकों के मुकाबले ग्रामीण बाजार पर अधिक असर पड़ा है। ग्रामीण आय और बुनियादी ढांचे पर सरकार के जोर देेने पर ज्यादा खुश होने की जरूरत नहीं है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) ने देश के ज्यादातर हिस्सों में मॉनसून सामान्य रहने का अनुमान लगाया है, जो एक अच्छी खबर है, लेकिन निजी संस्था स्काईमैट के अनुमान को भी पूरी तरह खारिज नहीं किया जा सकता है। हालांकि विश्लेषकों का कहना है कि अगर सरकार की नीतियों से कुछ लाभ मिलता है तो लंबी अवधि में खपत बढ़ाने में काफी मदद मिल सकती है। 
 
समग्र आर्थिक विकास की बात भी उतनी ही अधिक महत्त्वपूर्ण है। एसबीआईकैप सिक्योरिटीज का कहना है कि उपभोक्ता वस्तुओं की मांग सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के मुकाबले कम से कम चार-छह महीने पीछे है। इसका मतलब है कि पिछली दो तिमाहियों में रफ्तार सुस्त होने के बाद आने वाली तिमाहियों में जीडीपी में सुधार का असर एफएमसीजी कंपनियों के राजस्व में दिख सकता है।  हालांकि ग्रामीण क्षेत्रों में मौजूदा हालत और 2018-19 में ऊंची आधार दर का असर दिख सकता है। वित्त पोषण से जुड़े मुद्दे भी कहीं असर डाल सकते हैं। इसलिए मध्य अवधि के दौरान एपएमसीजी मेंं वृद्घि दर कमजोर रह सकती है। चुनाव से जुड़ा सकारात्मक  समर्थन अब नहीं है। विश्लेषकों की नजर में निकट अवधि में मांग बढ़ाने वाले कारक नजर नहीं आ रहे हैं।
 
मूल्यांकन का मसला निकट अवधि में चिंता का एक और कारण हो सकता है। हालांकि फिलहाल पिछले दो महीने में निफ्टी एफएमसीजी इंडेक्स का एक साल का फॉरवर्ड मूल्यांकन 12 प्रतिशत कम है, लेकिन पिछले पांच वर्ष के औसत से यह अब भी 7 से 8 प्रतिशत अधिक है। नई सरकार में अब ढांचागत क्षेत्र को अधिक तवज्जो मिलने से निवेशक एफएमसीजी क्षेत्र में निवेश घटा सकते हैं। हालांकि एफएमसीजी शेयरों में तेज गिरावट दीर्घ अवधि के लिए खरीदारी का मौका हो सकती है।  
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