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रिजर्व बैंक से नीतिगत दरों में निश्चित रूप से क टौती की उम्मीद जता रहे हैं अर्थशास्त्री

अनूप रॉय और समी मोडक / मुंबई June 02, 2019

चौथी तिमाही की वृद्धि दर के आंकड़े देखकर तमाम विश्लेषक मानने लगे हैं कि गुरुवार की मौद्रिक नीति समीक्षा में दरों में कटौती निश्चित है।  हालांकि भारतीय रिजर्व बैंक की नीतियों पर नजर रखने वाले ज्यादातर लोग 6 जून को दरों में कटौती होने की उम्मीद कर रहे हैं, लेकिन अब ऐसा लगता है कि चौथी तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में 5.8 प्रतिशत की वृद्धि के आंकड़े आने पर उन लोगों को भी दरों में कटौती का अनुमान लगाने को विवश होना पड़ा है, जो अब तक सावधानी बरत रहे थे। 
 
अब करीब आम सहमति है कि जून की समीक्षा में अगर 50 आधार अंक की कटौती नहीं होती है तो कम से कम 25 आधार अंक की कटौती होगी। एक आधार अंक प्रतिशत का सौवां हिस्सा होता है। अर्थशास्त्रियों का कहना है कि अगर 6 सदस्यों वाली मौद्रिक नीति समिति में मतभेद नहीं होता है तो स्थिति को देखते हुए रिजर्व बैंंक के गवर्नर गैर परंपरागत नीतिगत फैसला लेते हुए 35 आधार अंक की कटौती कर सकते हैं।  इस समय नीतिगत रीपो दर 6 प्रतिशत है। खुदरा महंगाई अप्रैल में 2.92 प्रतिशत थी। विशेषज्ञों में इस बात पर सहमति है कि 2018-19 में पांच साल की सबसे निचले स्तर की वृद्धि दर 6.8 प्रतिशत बहुत कम है और इससे दरों में बदलाव न करने की संभावना कम होती है। अब यह इंतजार नहीं किया जा सकता है कि जुलाई में आने वाले बजट में क्या राजकोषीय खाका बनता है या देश में मॉनसून का प्रसार कैसा रहता है। 
 
पिछले सप्ताह बिजनेस स्टैंडर्ड पोल में 12 में से 9 अर्थशास्त्रियों और बाजार हिस्सेदारों ने रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास की अध्यक्षता वाली 6 सदस्यीय समिति से दरों में कटौती की उम्मीद जताई थी।  केयर रेटिंग के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कुछ दिन पहले यथास्थिति बरकरार रखे जाने की उम्मीद जताई थी और अब उनका कहना है कि कटौती की संभावना 50:50 की है। सबनविस ने कहा, 'निश्चित रूप से मंदी है। अब हम दरों में कटौती की 50 प्रतिशत उम्मीद कर रहे हैं, भले ही महंगाई दर के अनुमान में कोई बदलाव नहीं आया है।' केयर ने अनुमान लगाया था कि चौथी तिमाही में जीडीपी वृद्धि 6.1 प्रतिशत रहेगी। 
 
ऐक्सिस बैंक के मुख्य अर्थशास्त्री सौगत भट्टाचार्य ने कहा, 'अब दर में कटौती निश्चित है। मुझे नहीं लगता कि 50 आधार अंक की कटौती होगी, लेकिन नकदी को बल देने के कदमों के साथ 35 आधार अंक कटौती की संभावना है।' भट्टाचार्य ने इसके पहले कहा था कि कटौती की संभावना है, लेकिन अब वह अपनी गणना में कह रहे हैं कि कटौती निश्चित है। भट्टाचार्य के मुताबिक अभी एक उम्मीद यह है कि उपभोक्ता वस्तुओं की मांग बढ़ी है, भले ही वाहन बिक्री कम है। उन्होंने कहा, 'इस तरह से मंदी दरअसल ढांचागत नहीं है।' 
 
बैंक आफ अमेरिका मेरिल लिंच के मुख्य अर्थशास्त्री इंद्रनील सेनगुप्ता और भारतीय स्टेट बैंक के समूह मुख्य आर्थिक सलाहकार सौम्यकांति घोष ने पहले ही दरों में 25 आधार अंक कटौती की संभावना जताई थी। सेनगुप्ता को उम्मीद है कि 35 आधार अंक की कटौती होगी और घोष का कहना है कि कटौती 50 आधार अंक की हो सकती है।  कोटक मङ्क्षहद्रा बैंक की उपासना भारद्वाज की भी कुछ ऐसी ही राय है। उन्हें 25 आधार अंक कटौती की उम्मीद है, लेकिन उनका कहना है, 'यह संभावना है कि 25 आधार अंक से ज्यादा कटौती हो, जिसकी संभावना जीडीपी के आंकड़े आने के बाद बढ़ गई है।'
 
एलऐंडटी फाइनैंस की मुख्य अर्थशास्त्री  रूपा रेगे नित्सुरे ने अपने पहले के अनुमान को बरकरार रखते हुए कहा है कि 25 आधार अंक की कटौती पर्याप्त नहींं होगी। उन्होंने कहा कि अभी इससे ज्यादा किए जाने की जरूरत है और अगर सिर्फ 25 आधार अंक की कटौती होती है तो इससे स्थिति बदलेगी नहीं बल्कि स्थिति 'तटस्थ' से 'समावेशी' बन जाएगी।  नित्सुरे ने कहा, 'रुख में बदलाव के साथ दरों में कटौती नियत आय के बाजारों के लिए एक बेहतर संकेत होगा, जिसमें 25 आधार अंक कटौती की वजहें पहले ही मौजूद हैं।'
 
दिलचस्प है कि 10 साल का बॉन्ड यील्ड मई में 30 आधार अंक गिरा है और कॉर्पोरेट बॉन्ड यील्ड भी आखिरकार कमजोर पड़ा है। इससे इस चक्र में बाजार 25 आधार अंक से ज्यादा की कटौती के संकेत मिलते हैं। यह पूरी तरह से जून में हो भी सकता है या नहीं भी हो सकता है। बॉन्ड बाजार को भरोसा था कि चौथी तिमाही में जीडीपी के आंकड़े 6 प्रतिशत से नीचे आएंगे।  इक्विटी बाजार के हिस्सेदार भी चौथी तिमाही की वृद्धि के आंकड़े कमजोर रहने के अनुमान लगा रहे थे। इस हिसाब से देखें तो अब सामने आए आंकड़े का शायद बाजार पर बहुत असर नहीं होगा, लेकिन इसकी वजह से निवेशकों की सरकार व रिजर्व बैंक से उम्मीदें बढ़ी हैं। 
 
डाल्टन कैपिटल एडवाइजर्स के निदेशक यूआर भट ने कहा, 'बाजार को पहले से ही संभावना थी कि जीडीपी के आंकड़े कमजोर रहेंगे। यह पूरी तरह से उम्मीदों के विपरीत नहीं है, जिससे निवेशक बहुत ज्यादा चिंतित हों। कमजोर आंकड़े से बजट बनाने के लिए अच्छे इनपुट मिलेंगे। ज्यादातर निवेशकों का ध्यान अब इस पर है कि जुलाई के पहले सप्ताह में क्या होने वाला है।' उन्होंने कहा, 'सकल मांग को समर्थन करने के लिए रिजर्व बैंक भी कदम उठाएगा। दरों में ज्यादा कटौती संभव है। केंद्रीय बैंक यह भी सुनिश्चित करने का प्रयास करेगा कि यह ज्यादा प्रभावी तरीके से पहुंचे।'
 
चुनाव के नतीजों के बाद निवेशकों का भरोसा बढ़ा है। बेंचमार्क सूचकांक  रिकॉर्ड पर हैं। शुक्रवार को सेंसेक्त 40,000 और निफ्टी 12,000 अंक पार कर गया था। पिछले एक पखवाड़े में बाजार 7 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ा है, जबकि वैश्विक धारणाएं कमजोर हैं, लेकिन चुनाव नतीजे सिर चढ़कर बोल रहे हैं।  कुछ का कहना है कि निवेशक नई सरकार से ठोस कार्रवाई का इंतजार कर सकते हैं, भले ही शेयर बाजार मौजूदा स्तर से और ऊपर चला जाए। 
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