बिजनेस स्टैंडर्ड - 45 साल के रिकॉर्ड पर पहुंची बेरोजगारी
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45 साल के रिकॉर्ड पर पहुंची बेरोजगारी

सोमेश झा / नई दिल्ली May 31, 2019

शपथ ग्रहण करने के एक दिन बाद राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार ने आज पहली सावधिक श्रम बल सर्वेक्षण की रिपोर्ट जारी कर दी। इसके मुताबिक वर्ष 2017-18 में देश में बेरोजगारी की दर 6.1 फीसदी रही जो 45 साल में सर्वाधिक है। रिपोर्ट जारी करते हुए मुख्य सांख्यिकीविद् प्रवीण श्रीवास्तव ने कहा कि नमूनों के डिजाइन और ढांचे में बदलाव के कारण पहले के आंकड़ों की इससे तुलना नहीं की जा सकती है। लेकिन रिपोर्ट में पहले कि आंकड़ों के साथ तुलना की गई है। रिपोर्ट में नमूना डिजाइन में बदलाव, डेटा संग्रह के तरीकों, नमूना संग्रह आदि के बारे में स्पष्टीकरण दिया गया है। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने जनवरी में सबसे पहले खबर दी थी कि एनएसएसओ के पीएलएफएस की 2017-18 रिपोर्ट के मुताबिक देश में बेरोजगारी 45 साल के सर्वाधिक स्तर पर पहुंच गई है। 
 
देश की सांख्यिकी और इसके ढांचे पर नजर रखने वाली स्वतंत्र संस्था राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (एनएससी) ने पिछले साल दिसंबर में इस रिपोर्ट को मंजूरी दी थी लेकिन सरकार ने इसे जारी नहीं किया। इसकी वजह से आयोग के कार्यकारी अध्यक्ष पीसी मोहनन और एक अन्य सदस्य जेवी मीनाक्षी ने जनवरी में इस्तीफा देना पड़ा था। श्रीवास्तव ने रिपोर्ट जारी करने में देरी को सही ठहराते हुए कहा, 'जब भी आप नया उत्पाद लाते हैं तो उसका परीक्षण किया जाता है और यही वजह है कि इसमें समय लगता है।' उन्होंने कहा कि एनएससी ने रिपोर्ट को मंजूरी दे दी थी लेकिन इसमें एनएसएसओ की पिछली रिपोर्टों के आंकड़ों की तुलना की गई थी, इसलिए इसकी समीक्षा की जरूरत महसूस हुई। 
 
उन्होंने कहा, 'रिपोर्ट को एक स्थायी समिति के हवाले कर दिया गया था जिसने पिछले सप्ताह अपनी रिपोर्ट सौंपी।' पीएलएफएस की रिपोर्ट के मुताबिक श्रम बल भागीदारी दर (आबादी के अनुपात में नौकरी तलाश रहे या नौकरी कर रहे लोगों की संख्या) 50 फीसदी से कम हो गई है। 2017-18 में यह दर 49.8 फीसदी रही जबकि 2011-12 में यह 55.9 फीसदी थी।  2017-18 में 15 से 29 साल के आयुवर्ग में बेरोजगारी दर सबसे तेजी से बढ़ी। शहरी महिलाओं में यह 27.2 फीसदी थी जबकि 2011-12 में यह 13.1 फीसदी थी। इसी तरह शहरी पुरुषों में बढ़कर 18.7 फीसदी हो गई जबकि पांच साल पहले यह 8.1 फीसदी थी। ग्रामीण महिलाओं में बेरोजगारी दर 2017-18 में 13.6 फीसदी रही जबकि 2011-12 में यह 4.8 फीसदी थी। ग्रामीण पुरुषों में यह 17.4 फीसदी पहुंच गई जबकि पांच साल पहले 5 फीसदी थी।
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