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सिक्किम में चामलिंग के रिकॉर्ड को पछाडऩे की चुनौती

सियासी हलचल
आदिति फडणीस /  May 31, 2019

दिल्ली में आए भूचाल का असर सुदूर सिक्किम में भी महसूस किया गया। देश में सबसे लंबी अवधि तक और सबसे सफल मुख्यमंत्री रहे पवन कुमार चामलिंग और उनकी पार्टी सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) सत्ता से बाहर कर दिए गए। चामलिंग सन 1994 में पहली बार मुख्यमंत्री बने और उसके बाद पद पर बने रहे। उन्होंने मजबूती से काम किया और कई ऐसी योजनाएं पेश कीं जिनका कोई विरोध तक नहीं हुआ। सन 2013 में सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) के रूप में पहली बार विपक्ष सामने आया जिसके नेता थे प्रेम सिंह तमांग। उन्हें पीएस गोले के नाम से भी जाना जाता है।

 
गोले का अतीत उतार-चढ़ाव वाला रहा है। वह एसडीएफ के संस्थापक सदस्य थे। एक बार के सिवाय वह चामलिंग की हर सरकार में शामिल रहे। बाद में एसडीएफ में भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद का आरोप लगाते हुए उन्होंने अलग पार्टी बना ली। सन 2009 में चामलिंग को सिक्किम में सभी 32 विधानसभा सीटों पर जीत मिली लेकिन 2014 में उन्हें 10 सीट एसकेएम के हाथ गंवानी पड़ी और उनकी पार्टी के पास 22 सीट रह गईं। शायद उन्हें अंदाजा हो गया था कि हालात बिगडऩे वाले हैं। क्योंकि गोले के पार्टी बनाने के तुरंत बाद राज्य सरकार के सतर्कता विभाग ने संभवत: चामलिंग के निर्देश पर सरकारी धन के दुरुपयोग के मामले की जांच शुरू की। यह मामला 9.5 लाख रुपये के फंड का था जो राज्य सरकार की एक योजना के तहत लाभार्थियों को गाय देने के लिए आवंटित थे। यह जांच वर्ष 2010 की है। आरोपपत्र के बाद मामला अदालत में गया और उन्हें जुर्माने और जेल की सजा का सामना करना पड़ा। भ्रष्टाचार के मामले में दोषी सिद्ध होने के बाद भी उनको दोबारा चुनाव लडऩे दिया गया जो अपने आप में रहस्यमय है। इतना ही नहीं 2018 में जब वह जेल से बाहर आए तो उनका किसी नायक की तरह स्वागत किया गया। ऐसा स्वागत आमतौर पर राजनीतिक बंदियों का होता है। सिक्किम विधानसभा में उनकी पार्टी को महज दो सीट का बहुमत है।
 
सिक्किम का इतिहास जटिल है और कई बार यह कहना मुश्किल होता है कि भारत में उसके विलय के नायक या खलनायक कौन थे। जैसा कि सिक्किम के पहले दीवान जॉन लाल (आईसीएस) ने कहा, सिक्किम की संप्रभुता का मान रखने और चीन की भावनाओं को समझने के बजाय भारत ने दार्जिलिंग और कलिमपोंग से नेपाली बोलने वाले लोगों की भीड़ जुटाई। स्थानीय शासक से कहा गया कि जनता ने उसके खिलाफ विद्रोह कर दिया है और इसके बाद सिक्किम को भारत में मिला लिया गया। 
 
चामलिंग कहते हैं (शायद इसलिए क्योंकि वह नेपाली बोलने वाले हैं) कि सिक्किम के मूल लेप्चा लोगों पर तिब्बत की भूटिया जनजाति तीन सदियों तक कायम रही। उसने सामंती व्यवस्था थोपी और लिंबू और तमांग जैसी अन्य जनजातियों को समान अधिकार नहीं दिए। चामलिंग के मुताबिक स्थानीय शासक के विरुद्ध विद्रोह दरअसल एक क्रांति थी जिसने दमनकारी काजी शासन को उखाड़ फेंका। एक बार मुख्यमंत्री बनने के बाद चामलिंग को लगा कि उनको अपना जनाधार बनाना होगा। उन्होंने राज्य की नेपाली बोलने वाली आबादी में लिंबू और तमांग जैसी जातियों के लिए आरक्षण बढ़ाने की लड़ाई लड़ी। सिक्किम में 20 फीसदी आबादी भूटिया-लेप्चा है जबकि 40 फीसदी में अन्य पिछड़ा वर्ग। लिंबू, राय और तमांग कुल आबादी का करीब 20 फीसदी हैं। जब उनको आरक्षण के दायरे में शामिल किया गया तो वे स्वाभाविक तौर पर चामलिंग के मतदाता बन गए। पीएस गोले तमांग हैं। उन्होंने भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद तथा प्रशासनिक नाकामी के मुद्दे पर चामलिंग को चुनौती दी। ऐसे में वही जाति चामलिंग के खिलाफ हो गई जिसे वह सशक्त बना रहे थे।
 
गोले के प्रचार अभियान को समर्थन मिला। सिक्किम के आइकन और प्रसिद्ध फुटबॉल खिलाड़ी बाईचुंग भूटिया ने भी ऐन चुनाव पूर्व हमरो सिक्किम नामक राजनीतिक दल बना लिया। भ्रष्टाचार, नशे की लत, मानसिक बीमारियों जैसा सिक्किम का काला पक्ष दुनिया के सामने आने लगा। राज्य में छह लाख से कुछ ज्यादा लोग हैें लेकिन बेरोजगारी बहुत है। प्रति एक लाख पर 37.5 लोगों के साथ यहां आत्महत्या दर सबसे अधिक है। यह देश के औसत के तकरीबन तीन गुना है। सिक्किम के 10 में से 7 किशोर दवाओं के नशे का सेवन करते हैं। हमरो सिक्किम ने चुनाव में एक भी सीट नहीं जीती लेकिन उसके द्वारा उठाई गई समस्याएं चर्चा में आ गईं। अब यह पीएस गोले का सिरदर्द है।
 
गोले (जिनका चुनावी घोषणापत्र बताता है कि उन्होंने तीन बार शादी की लेकिन किसी तलाक का जिक्र नहीं) को विकास और वृद्धि के चामलिंग के रिकॉर्ड को पछाडऩा होगा। योजना आयोग के आंकड़े बताते हैं कि सिक्किम में गरीबी अनुपात देश में सबसे तेजी से घटा। यह 2004-05 के 30.9 फीसदी से गिरकर 2011-12 में 8.2 फीसदी हो गया। इस चमत्कार को समझने के लिए आपको 2014 की सिक्किम मानव विकास रिपोर्ट पढऩी होगी जिसे यूएनडीपी ने तैयार किया। यह रिपोर्ट कहती है कि 2001 से 2012 के बीच सिक्किम का एनएसडीपी औसत 17 फीसदी सालाना की दर से बढ़ा। यह देश के सभी राज्यों में उच्चतम है। इस बीच देश का औसत 10 फीसदी रहा। सिक्किम ने 13 जलविद्युत परियोजनाओं को नकार दिया क्योंकि उनसे प्रदेश के पर्यावास को नुकसान पहुंच सकता था। उसका वैकल्पिक विकास मॉडल प्रकृति के करीब जाने का है। राज्य में रासायनिक उर्वरक का इस्तेमाल नहीं किया जाता। वहां के ऑर्किड विश्व प्रसिद्ध हैं। परिणाम? दिसंबर 2018 में सिक्किम में पहली बार एक रॉयल बंगाल टाइगर देखा गया। 10,000 फीट से अधिक की ऊंचाई पर इसका मिलना नितांत अस्वाभाविक था। प्रेम सिंह तमांग गोले को भी बिना प्रकृति से समझौता किए वृद्धि हासिल करनी होगी।
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