बिजनेस स्टैंडर्ड - एल्युमीनियम उत्पादक चिंतित
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एल्युमीनियम उत्पादक चिंतित

जयजित दास / भुवनेश्वर May 30, 2019

चीन इस साल जुलाई से एल्युमीनियम कबाड़ आयात पर रोक लगाने का अहम कदम उठाने जा रहा है। एल्युमीनियम के सबसे बड़े उत्पादक एवं निर्यातक चीन ने संरक्षणवादी कदम के रूप में एल्युमीनियम को 'प्रतिबंधित आयात सूची' में शामिल करने की योजना बनाई है। यह एक तरह से 2020 तक कबाड़ आयात प्रतिबंध करने की तैयारी है। चीन की इस संशोधित आयात प्राथमिकताओं से भारतीय एल्युमीनियम उत्पादक चिंतित हैं। उनका मानना है कि चीन कबाड़ आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाने जा रहा है और व्यापार को लेकर उसका अमेरिका के साथ झगड़ा जारी है, इसलिए भारत में एल्युमीनियम कबाड़ की डंपिंग बढ़ेगी। भारत के आसियान देशों के साथ मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) होने और कबाड़ आयात पर 2.5 फीसदी का कम आयात शुल्क होने से भारत में डंपिंग बढऩे की आशंका है।

 
आयात के कारण वेदांत लिमिटेड, हिंडाल्को इंडस्ट्रीज और सरकार द्वारा संचालित नैशनल एल्युमीनियम कंपनी (नालको) जैसी घरेलू उत्पादकों की बाजार हिस्सेदारी घट रही है। वित्त वर्ष 2019 में एल्युमीनियम की 60 फीसदी घरेलू मांग आयात से पूरी हुई। एल्युमीनियम और इस धातु से बने उत्पादों का आयात वित्त वर्ष 2019 में अब तक के सर्वोच्च स्तर 23 लाख टन पर पहुंच गया। इससे 40,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा बाहर गई। यह देश के कुल आयात का 1.1 प्रतिशत हिस्सा था। जहां एक ओर कुल एल्युमीनियम में 19 प्रतिशत का इजाफा हुआ, वहीं दूसरी ओर कबाड़ आयात 21 प्रतिशत बढ़ा। आयात के इस निर्बाध प्रवाह से वित्त वर्ष 2019 में घरेलू एल्युमीनियम कंपनियों की बाजार हिस्सेदारी 40 प्रतिशत रह गई जबकि वित्त वर्ष 11 में यह 60 प्रतिशत थी।
 
उद्योग के एक सूत्र ने कहा कि भारत में एल्युमीनियम आयात का अधिकांश भाग एफटीए मार्ग के जरिये आ रहा है। आसियान से होने वाले आयात में मूल्य संवर्धित आयात का एक बड़ा हिस्सा मलेशिया का रहता है जिसे भारत-मलेशिया एफटीए का लाभ मिलता है। इससे मलेशिया को भारत में शून्य शुल्क पर आयात की छूट मिलती है जबकि भारत के एल्युमीनियम उत्पादों को मलेशिया में निर्यात करने पर 25-30 प्रतिशत शुल्क लगता है। अमेरिका, यूरोपीय संघ (ईयू), कनाडा, मैक्सिको, जापान और ब्राजील में स्वीकृत शुल्क के मद्देनजर भारतीय एल्युमीनियम विनिर्माता आसियान देशों के अतिरिक्त चीन को एक बड़ी अड़चन के रूप में देखते हैं। इस संबंध में एक निराशाजनक बात यह भी है कि चीन के स्थानीय एल्युमीनियम उद्योग को सरकारी सब्सिडी और प्रोत्साहन से भारी समर्थन मिलता है जिससे उनके स्मेल्टर वैश्विक लागत के साथ प्रतिस्पर्धा करने में सक्षम हो जाते हैं।
 
नीति आयोग ने भी अपनी रिपोर्ट 'भारत में एल्युमीनियम नीति की आवश्यकता' में चीनी सरकार के समर्थन और वैश्विक एल्युमीनियम उद्योग के संबंध में उसकी अधिक क्षमता के खतरे को उजागर किया है। इसमें बताया गया है कि चीन से भारत में होने वाला एल्युमीनियम आयात भारत से चीन को किए जाने वाले एल्युमीनियम निर्यात से लगभग 30 गुना है। एल्युमीनियम का व्यापार घाटा लगभग 69 करोड़ डॉलर है। उद्योग के सूत्र का कहना है कि क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (आरसीईपी) के लिए चल रही वार्ता में चीन और आसियान भागीदार देश के रूप में शामिल हैं। चीन की उपस्थिति एक गंभीर खतरा है जो भारत के व्यापार घाटे की स्थिति बदतर कर देगा। इससे भारतीय एल्युमीनियम उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
Keyword: india, china, aluminium,,
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