बिजनेस स्टैंडर्ड - कंपनी आय पर ब्याज भुगतान का असर
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कंपनी आय पर ब्याज भुगतान का असर

कृष्ण कांत / मुंबई May 29, 2019

कर्ज की लागत तीन साल तक नरम रहने के बाद अब कंपनियों की आमदनी में सेंध लगाने लगी है। देश की शीर्ष सूचीबद्ध कंपनियों का संयुक्त रूप से ब्याज भुगतान मार्च, 2019 में समाप्त छह महीनों की अवधि के दौरान सालाना आधार पर 15.2 फीसदी अधिक रहा है। यह बढ़ोतरी इस अवधि में शुद्ध बिक्री और परिचालन लाभ की वृद्धि से भी अधिक रही है। इन कंपनियों में वित्तीय और तेल एवं गैस कंपनियों को शामिल नहीं किया गया है। कंपनियों के ब्याज भुगतान में यह बढ़ोतरी पिछले कम से कम साढ़े तीन साल में सबसे अधिक है। 
 
इसकी तुलना में कंपनियों का संयुक्त रूप से परिचालन लाभ या एबिटा वित्त वर्ष 2019 की दूसरी छमाही में सालाना आधार पर 5.9 फीसदी कम रहा, जो उसका पिछले साढ़े तीन साल का सबसे खराब प्रदर्शन है। समीक्षाधीन अवधि के दौरान कंपनियों की शुद्ध बिक्री सालाना आधार पर 11 फीसदी बढ़ी, जो क्रमिक आधार पर वृद्धि में नरमी को दिखाती है। ब्याज भुगतान में बढ़ोतरी और परिचालन लाभ में इस अनुपात में सुधार न होने से शुद्ध लाभ पर दबाव बढ़ा है। नमूने का संयुक्त शुद्ध लाभ (अनपेक्षित लाभ या घाटे को समायोजित करने के बाद) वित्त वर्ष 2019 की दूसरी छमाही में सालाना आधार पर 3.5 फीसदी कम रहा, जो उसका पिछले साढ़े तीन साल का सबसे कमजोर प्रदर्शन है। इस अवधि के दौरान अपवादस्वरूप कुछ बढ़त को छोड़कर शुद्ध लाभ 24 फीसदी कम रहा। 
 
यह विश्लेषण 1,202 सूचीबद्ध कंपनियों के छमाही आंकड़ों पर आधारित है। इसमें बैंकों, गैर-बैंक ऋणदाताओं और रिलायंस इंडस्ट्रीज समेत तेल एवं गैस कंपनियों को शामिल नहीं किया गया है। विश्लेषकों का कहना है कि कंपनियों के ब्याज भुगतान में बढ़ोतरी यह है कि कंपनियों ने उधारी बढ़ाई है और घरेलू बाजार में नकदी की किल्लत के कारण पिछले एक साल के दौरान ब्याज दरों में मजबूती आई है।  इक्विनोमिक्स रिसर्च ऐंड एडवाइजरी सर्विसेज के संस्थापक एवं एमडी जी चोक्कालिंगम ने कहा, 'बहुत से क्षेत्रों में कार्यशील पूंजी की जरूरत में बढ़ोतरी हुई है क्योंकि मांग में मंदी से कंपनियों में स्टॉक जमा हो गया है और ग्राहकों पर बकाया राशि में बढ़ोतरी हुई है। इससे कंपनियां बढ़ते स्टॉक की फंडिंग या अपनी नकदी आवक की खाई को भरने के लिए कार्यशील पूंजी ऋण लेने के लिए बाध्य हुई हैं।'
 
ये आंकड़े बताते हैं कि ब्याज भुगतान में बढ़ोतरी ऊंची ब्याज दरों और उधारी में बढ़ोतरी, दोनों वजहों से हुई है। नमूने में शामिल कंपनियों की संयुक्त उधारी (ऑडिट न किए हुए आंकड़ों के आधार पर) वित्त वर्ष 2019 की दूसरी छमाही में सालाना आधार पर 13.3 फीसदी बढ़ी, जबकि 2017-18 की दूसरी छमाही के दौरान 3.3 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई थी। इन कंपनियों पर कुल कर्ज बढ़कर 12.7 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जो एक साल पहले 11.2 लाख करोड़ रुपये था।  इन कंपनियों ने वित्त वर्ष 2019 की दूसरी छमाही में औसतन 9.04 फीसदी की ब्याज दर पर कर्ज लिए, जबकि बीते वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में ऋण की औसत ब्याज दर 8.85 फीसदी थी। सकारात्मक पहलू यह था कि ब्याज दर वित्त वर्ष 2019 की पहली छमाही के मुकाबले दूसरी छमाही में करीब 24 आधार अंक कम हुई। एक आधार अंक एक फीसदी का सौवां हिस्सा है। 
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