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अनुमान के विपरीत बैंकों की शाखाओं में बढ़ोतरी जारी, तकनीक के इस्तेमाल पर जोर

निकहत हेटावकर / मुंबई May 29, 2019

बैंकों की नई शाखाएं खोलना भले ही बीते दिनों की बात लगती है, लेकिन निजी बैंकों ने पिछले साल अपनी शाखाओं के नेटवर्क का विस्तार किया है। इसके साथ ही उन्होंने अपनी दक्षता और लाभप्रदता बढ़ाने की कवायद की है। यह पिछले साल की धारणा से विपरीत है, जब ऐसा माना जा रहा था कि डिजिटलीकरण की वजह से बहुत कम नई शाखाएं खुलेंगी। शाखाओं को अप्रचलित बनाने के बजाय डिजिटलीकरण ने बैंकों को ज्यादा व्यावहारिक शाखा के मॉडल की ओर जाने का मौका दिया है।  निजी बैंक के अधिकारियों का कहना है कि ग्राहक हासिल करने, कर्ज देने और जमा आकर्षित करने में शाखाओं की अहम भूमिका होती है। ऐक्सिस बैंक के प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी अमिताभ चौधरी ने कहा, 'हमारी वृद्धि नीति में ब्रांच बैंकिंग एक अहम हिस्सा है। हमारा मानना है कि हमारी शाखाएं न सिर्फ नए ग्राहकों से जमा आकर्षित क रने में मददगार होती हैं, बल्कि उत्पादों के हमारे अधिग्रहण रणनीति में प्रमुख हैं।'
 
एचडीएफसी बैंक देश का सबसे बड़ा निजी बैंक है, जिसने वित्त वर्ष 2018-19 में इसके पहले साल की तुलना में चार गुना शाखाएं जोड़ी हैं। आरबीएल बैंक ने अपने भौतिक नेटवर्क में निवेश बढ़ाने में पूंजी के इस्तेमाल और विस्तार की योजना बनाई है। बैंक ने वित्त वर्ष 18 की तुलना में वित्त वर्ष 19 में दो गुना से ज्यादा शाखाएं जोड़ी हैं। इंडसइंड बैंक ने भी इस साल के दौरान पहले के साल की तुलना में ज्यादा शाखाएं जोड़ी हैं। ऐक्सिस बैंक ने भी पिछले साल से ज्यादा शाखाएं खोली हैं।  बहरहाल आईसीआईसीआई बैंक और येस बैंक ने वित्त वर्ष 2019 में बहुत कम शाखाएं जोड़ीं और इसकी वजह यह है कि उनका ध्यान मौजूदा शाखाओं को ज्यादा कार्यकुशल बनाने पर था। 
 
येस बैंक के एमडी और सीईओ रवनीत गिल ने अप्रैल में विश्लेषकों के साथ अपनी पहली तिमाही बात में कहा, 'हमारी सिर्फ 30 प्रतिशत शाखाएं मुनाफे में हैं। हम 2023 तक क रीब 80 प्रतिशत शाखाओं को मुनाफे के स्तर पर लाना चाहते हैं। 2025 तक ये शाखाएं पूरी तरह से मुनाफे में आ जाएंगी।' आरबीएल बैंक ने कारोबार का दायित्व बनाने में शाखाओं की भूमिका पर जोर दिया है क्योंकि ग्राहक चाहते हैं कि जब वे अपने धन का लेनदेन करें तो नजदीक में शाखा हो। बैंक का मानना है कि दायित्व के पक्ष के हिसाब से ग्राहकों के प्रबंधन की ज्यादा जरूरत है, उन्हें सिर्फ विभिन्न उत्पादों और सेवाओं से नहीं लुभाया जा सकता है। 
 
ऑनलाइन कर्ज बहुत तेजी से जगह बना रहा है, वहीं शाखाओं के माध्यम से कर्ज दिया जाना भी कुछ बैंकों में बढ़ा है। ऐक्सिस बैंक की शाखाओं से खुदरा कर्ज लिए जाने की स्थिति में पिछले कुछ साल में उल्लेखनीय सुधार हुआ है और कुल सोर्सिंग में इसकी हिस्सेदारी वित्तवर्ष 2018 में 50 प्रतिशत रही, जो वित्त वर्ष 13 में 36 प्रतिशत थी।  चौधरी ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि शाखाओं की अहम भूमिका बनी रहेगी। ऐक्सिस बैंक को भीलगता है कि उसके  शाखा नेटवर्क में बढ़ोतरी होगी। 
 
आरबीएल बैंक के ब्रांच ऐंड बिजनेस बैंकिंग के जियोग्राफी प्रमुख सुरिंदर चावला ने कहा, 'डिजिटल चैनलों ने बैंकों की पहुंच का क्षेत्र बढ़ाया है। ऐसे मे कुछ इलाकों में हमें शाखाओं की संख्या कम करने की जरूरत है। शाखाओं का आकार घटाकर आधा कर दिया गया है, ऐसे में ग्राहकों की सेवा करने की लागत कम हुई है और बुनियादी ढांचे की लागत घटी है।'  जगह अहम है और तकनीक इसके चयन में मदद करेगी। ऐक्सिस बैंक ने एडवांस एनालिटिक्स का इस्तेमाल करने की योजना बनाई है, जिससे उच्च क्षमता वाले स्थानो को चिह्नित किया जा सके। बैंक अपने कर्मचारियों की उत्पादकता बढ़ाने, नई शाखाओं को छोटी रखने के लिए भी तनकीक का इस्तेमाल करेगा। 
 
येस बैंक में ब्रांच ऐंड रिटेल बैंकिंग के सीनियर ग्रुप प्रेसीडेंट और ग्रुप हेड राजन पटेल ने कहा, 'चालू वित्त वर्ष में निश्चित रूप से नई शाखाएं खुलेंगी। इसमें चिह्नित क्षेत्रों पर विशेष जोर होगा। हमारा अभी भी मानना है कि डिजिटलीकरण से मौजूदा शाखाओं से मुनाïफे व उत्पादकता को बढ़ाने की पर्याप्त क्षमता है।' आरबीएल बैंंक के चावला के मुताबिक ज्यादातर लेन देन डिजिटल हो रहे हैं, इस हिसाब से शाखाएं गैर जरूरी लगती हैं। उन्होंने कहा, 'डिजिटल रूप से खोले गए खाते का मूल्य ऑफलाइन खोले गए खाते का दसवां हिस्सा होता है। ग्राहकों की धारणा होती है कि डिजिटल खाता वॉलेट की तरह है और वे अपने मुख्य खाते की तरह उसका इस्तेमाल नहीं करते हैं और उन खातों में ज्यादा पैसे नहीं रखते।' 
Keyword: bank, loan, debt, RBI, NPA,,
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