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ममता के लिए भस्मासुर बनता 'परिवर्तन'

ईशिता आयान दत्त /  05 28, 2019

ममता सरकार की मुश्किलें बढ़ी

बिजनेस स्टैंडर्ड ममता के लिए भस्मासुर बनता लोक सभा चुनावों में तृणमूल कांग्रेस के प्रदर्शन ने पश्चिम बंगाल की ममता सरकार की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। राज्य में 2021 में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं। ममता बनर्जी 2011 में परिवर्तन के नारे के साथ सत्ता में आई थी और तब से उनकी लोकप्रियता और समर्थन हर चुनाव में बढ़ रहा था। चाहे विधानसभा चुनाव हों, स्थानीय निकाय चुनाव हों या पंचायत चुनाव, तृणमूल कांग्रेस की प्रमुख का कद लगातार बढ़ता जा रहा था और थोड़े समय में ही उन्होंने राज्य की राजनीति में वह हैसियत पा ली जो कभी वाममोर्चे की हुआ करती थी। लेकिन लोक सभा चुनावों में पार्टी के प्रदर्शन ने उनकी पार्टी के लिए खतरे की घंटी बजा दी है। 

तृणमूल ने 2014 में 34 सीटें जीती थीं लेकिन इस बार उसके खाते में 22 सीटें ही आईं। पार्टी के लिए ज्यादा चिंता की बात यह है कि भाजपा ने 18 सीटें जीतीं और दोनों पार्टियों के वोट का अंतर महज तीन फीसदी रह गया है। गुरुवार को लोक सभा चुनावों का परिणाम आने के बाद से पूरे बंगाल में यही चर्चा है कि राज्य में परिवर्तन की हवा बहने लगी है। इस बार परिवर्तन की लहर ने बंगाल को अपनी चपेट में ले लिया है और यह तृणमूल के लिए शुभ संकेत नहीं है।  एक अधिकारी ने बताया कि कैसे 2009 के चुनाव परिणामों ने परिवर्तन के बीज बोए थे और यह लहर पूरे बंगाल में फैल गई थी। बुद्घिजीवियों का एक बड़ा वर्ग वाममोर्चे के खिलाफ खड़ा हो गया था और उसने 'परिवर्तन चाहिए' का नारा बुलंद किया। यह नारा बंगाल के दिलोदिमाग पर छा गया। कई मायनों में 2019 के परिणामों में 2009 की छाया दिखती है। 

राजनीतिक विश्लेषक सव्यसाची बसु रायचौधरी ने कहा कि 2019 और 2009 के चुनाव परिणामों में एक समानता है। उन्होंने कहा, '2009 में तृणमूल ने वाममोर्चे के गढ़ में सेंध लगाते हुए 19 सीटें जीती थी। इस बार भाजपा ने 18 सीटें जीती हैं।' हालांकि वोट प्रतिशत के मामले में भाजपा का प्रदर्शन तृणमूल के 2009 के प्रदर्शन से बेहतर है। तब तृणमूल को 31.18 फीसदी वोट मिले थे जबकि भाजपा को इस बार 40.3 फीसदी वोट मिले हैं। भाजपा को इस बार 2014 के मुकाबले 17 फीसदी अधिक वोट मिले हैं।  2009 के चुनावों ने बंगाल में वाममोर्चे के शासन के अंत की नींव रखी थी और अगर विश्लेषकों की मानें तो इस बार तृणमूल भी उसी राह पर जा सकती है। बसु रायचौधरी ने कहा, 'अगर तृणमूल ने पार्टी से भारी पलायन नहीं रोका तो उसका भी वही हश्र हो सकता है जो वाममोर्चे का हुआ था।'

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी एक जनसभा में कहा था कि तृणमूल के 40 विधायक उनके संपर्क में हैं। तब पार्टी ने उनके इस दावे को खारिज कर दिया था और आज भी पार्टी उस रुख पर कायम है। तृणमूल के नेता पार्थ चटर्जी ने चुनाव नतीजों के बाद एक संवाददाता सम्मेलन में इन आशंकाओं को खारिज किया और कहा कि कोई भी पार्टी छोड़कर नहीं जा रहा है। बसु रायचौधरी ने कहा, 'काफी कुछ इस पर निर्भर करेगा कि क्या पार्टी अपना दबदबा कायम रख सकती है अगर पार्टी अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने में सफल रहती है तो वह वापसी कर सकती है।'

लेकिन दूसरे मोर्चों पर भी ममता के सामने कई चुनौतियां हैं। कर्मचारियों का एक वर्ग ममता सरकार से उसी तरह दूर हो गया है जैसे वह वाममोर्चे के अंतिम दिनों में हो गया था। कर्मचारियों को ममता सरकार से कई शिकायतें हैं।  केंद्र सरकार और राज्य सरकार के कर्मचारियों के महंगाई भत्ते में करीब 23 फीसदी का अंतर है। यह स्थिति तब है जब राज्य सरकार ने जनवरी से 125 फीसदी महंगाई भत्ता देने का फैसला किया था। साथ ही राज्य के छठे वेतन आयोग का कार्यकाल छह महीने बढ़ाकर नवंबर तक कर दिया गया है।

तृणमूल और भाजपा के नेताओं और कार्यकर्ताओं के बीच झड़पें भी प्रशासन के लिए सिरदर्द बनी हुई है। इससे राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने की आशंका है। अधिकारियों का कहना है कि कानून व्यवस्था की समस्याओं की वजह से बंगाल में विधानसभा चुनाव जल्दी हो सकते हैं। यह बंगाल में पहला चुनाव था जिसमें साम्प्रदायिकता की अहम भूमिका थी। पिछले कुछ वर्षों से जबसे भाजपा ने राज्य में अपने पैर जमाने शुरू किए, तबसे सांप्रदायिक झड़पें हुई हैं। बसु रॉयचौधरी ने कहा, 'अभी यह कहना मुश्किल है कि विधानसभा चुनावों में क्या होगा लेकिन यह साफ है कि इसमें भाजपा लाभ की स्थिति में है।'

स्थानीय भाजपा नेताओं का कहना है कि तृणमूल सरकार के पास तीन से छह महीने का समय रह गया है। अगर लोक सभा चुनाव के आंकड़ों को देखा जाए तो 294 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा 130 सीटों पर आगे है। राज्य में मतदाताओं के धु्रवीकरण से भाजपा इस स्थिति में पहुंची है और इसमें कोई शक नहीं है कि यह आगे भी जारी रहेगा।
Keyword: west bengal, mamta, election, TMC, BJP,,
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