बिजनेस स्टैंडर्ड - आंकड़ों की विश्वसनीयता
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आंकड़ों की विश्वसनीयता

संपादकीय /  May 28, 2019

बताया जाता है कि सरकार ने पिछले साल राष्ट्रीय आधिकारिक सांख्यिकी नीति में रखे गए प्रस्ताव के मुताबिक राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण कार्यालय (एनएसएसओ) तथा केंद्रीय सांख्यिकी कार्यालय (सीएसओ) के विलय का निर्णय ले लिया है। दोनों ही विभाग केंद्रीय सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के अधीन आते हैं। एक नया राष्ट्रीय सांख्यिकी संगठन गठित किया जाएगा और राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग के सचिव के रूप में मुख्य सांख्यिकीविद की भूमिका समाप्त की जाएगी। नए सांख्यिकी संगठन (एनएसओ) की अध्यक्षता सांख्यिकी मंत्रालय के सचिव के पास होगी।

 
इस मौके पर सांख्यिकी से जुड़े विभागों का पुनर्गठन खास महत्त्व रखता है। अतीत में इस पर करीबी नजर नहीं थी और इसे केवल अफसरशाही के फेरबदल या प्रशासनिक परिवर्तन के रूप में देखा गया। परंतु हालिया घटनाएं बताती हैं कि इस प्रक्रिया पर बारीक नजर रखनी होगी क्योंकि आधिकारिक तौर पर आंकड़े जुटाने और उन्हें मंजूरी दिलाने का यही एक तरीका है। वहीं दूसरी ओर यह केंद्र सरकार की सांख्यिकी मशीनरी में बेहतर तालमेल लाने वाला भी बन सकता है। आधिकारिक  सांख्यिकी आंकड़े अब कहीं अधिक तेज गति से आ सकते हैं और पूरी व्यवस्था कितने किफायती ढंग से काम कर रही है इसका आकलन किया जा सकता है। सरकारी अधिकारियों की दलील है कि मौजूदा व्यवस्था ऐसी है जिसकी बदौलत दोहराव और प्रचुरता हो रही है। उनका कहना है कि अफसरशाही को सुसंगत बनाकर, उनका विलय करके और उन्हें एक नेतृत्व के अधीन लाकर काम को बेहतर ढंग से अंजाम दिया जा सकता है। एक सामान्य सिद्धांत के रूप में देखें तो केंद्र सरकार की समूची अफसरशाही में ऐसे बदलाव की आवश्यकता है। इसमें दो राय नहीं है कि प्रशासनिक सुधार हमेशा क्षमता को बेहतर बनाने की दिशा में होना चाहिए।
 
परंतु भारत सरकार की सांख्यिकी मशीनरी का मामला अपने आप में विशिष्ट है। मौजूदा हालात में इसकी संवेदनशीलता और अधिक बढ़ जाती है। डेटा तैयार करने की प्रक्रिया की स्वायत्तता को लेकर तमाम सवाल पूछे जाते रहे हैं। इनकी शुरुआत सकल घरेलू उत्पाद और आर्थिक वृद्धि के आंकड़ों से हुई लेकिन ये वहीं तक सीमित नहीं हैं। सकल घरेलू उत्पाद के आंकड़ों की नई शृंखला से जुड़े सवालों का जवाब देने के क्रम में गत वर्ष एक बैक सीरीज की घोषणा की गई थी लेकिन इससे उन आंकड़ों की गुणवत्ता को लेकर संदेह और अधिक गहरा हो गया। इन आंकड़ों में संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन सरकार के कार्यकाल के आंकड़ों को घटा दिया गया और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन के आंकड़ों को बढ़ा दिया गया। 
 
ये चर्चाएं उस समय सार्वजनिक होकर जोर पकडऩे लगीं जब वरिष्ठ सांख्यिकीविदों ने इस बात को लेकर त्यागपत्र दे दिया कि सरकार एनएसएसओ के रोजगार संबंधी आंकड़े जारी करने में विफल रही है। ये आंकड़े बता रहे थे कि बेरोजगारी 45 वर्ष के उच्चतम स्तर पर पहुंच चुकी है। इन बातों के बीच कुछ लोगों की चिंता थी कि सरकार आधिकारिक आंकड़ों में हस्तक्षेप तो नहीं कर रही है। भारत में इससे पहले इसे लेकर ऐसी कोई समस्या पैदा नहीं हुई थी। कुछ सप्ताह पहले एनएसएसओ की एक अन्य रिपोर्ट ने दिखाया कि एमसीए 21 के डेटाबेस में काफी कंपनियां तलाशी नहीं जा रही हैं। वे बंद हो गई हैं अथवा अन्य क्षेत्रों में कारोबार कर रही हैं। ऐसे में यह स्पष्ट है कि सांख्यिकी को सुसंगत बनाने के बजाय विश्वसनीयता बहाल करने, पारदर्शिता लाने और स्वायत्तता सुनिश्चित करने पर जोर होना चाहिए। खेद की बात है कि मंत्रालय के सचिव के अधीन एक नया और एकीकृत संगठन इस उद्देश्य की पूर्ति नहीं करेगा। पर्यवेक्षक इसे डेटा की विश्वसनीयता में सुधार का संकेत नहीं मानेंगे। उनकी विश्वसनीयता को लेकर सवाल बढ़ते जाएंगे।
Keyword: CSO, NSSO, GDP, NSO,,
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