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फनी संकट: ओडिशा से सीख ले उद्योग

शुभमय सिकदर /  May 26, 2019

प्राकृतिक आपदा के संकटों का प्रबंधन और उसके बाद पुनर्वास की प्रक्रिया एक जटिल कार्य है। यह उन लोगों के लिए एक चुनौती की तरह है जो मानते हैं कि उनके प्रयासों से न केवल मौजूदा त्रासदी की सीमा को सीमित किया जा सकता है बल्कि उसमें अंतनिर्हित जोखिमों का निदान कर भविष्य में आने वाली आपदाओं की संभावना को भी घटाया जा सकता है। यह नियम समान रूप से कॉर्पोरेट आपदाओं पर भी लागू होता है जहां पूर्व की स्थिति बहाल करने की प्रक्रिया अक्सर लंबा और दुष्कर होती है।  

 
फनी तूफान और उसके बाद की स्थितियों का सफलतापूर्वक सामना करने की ओडिशा सरकार के तरीके से आपदा के लिए तैयारी और त्वरित प्रतिक्रिया देने को लेकर सबक सीखे जा सकते हैं। ओडिशा सरकार ने जान माल की क्षति और प्रभावित लोगों की संख्या न्यूनतम रखने के मद्देनजर अपनी तैयारी की थी। बिज़नेस स्टैंडर्ड ने कॉर्पोरेट जगत के शीर्ष अधिकारियों से बातचीत कर यह समझने का प्रयास किया कि इस घटना से उनके लिए क्या सबक हैं और इससे तीन बातें निकलकर आई हैं: पहला, किसी आपदा की तबाही को कम करने के लिए तैयारी से जुड़ी सूचना का प्रसार किया जाना महत्त्वपूर्ण है। इसमें आपदा कैसे आने वाली है, उसके क्या परिणाम होंगे और उसके निवारण उपायों को लागू करने की योजना शामिल होती है। दूसरा सबक है मौजूद आंकड़ों का परीक्षण करना। पिछली आपदाओं के निरीक्षण से कौन सर्वाधिक असुरक्षित है और उन तक पहुंचने का सबसे अच्छा तरीका क्या हो सकता है को जानने के लिए एक निष्पक्ष नजरिया मिलता है। तीसरा और सबसे महत्त्वपूर्ण सबक एकता का महत्त्व है। आपदा के समय लोगों को एक साथ मिलकर काम करने और साझा लक्ष्य निर्धारित करने की जरूरत होती है।
 
भारतीय प्रबंध संस्थान (अहमदाबाद) के संकाय सदस्य और विश्व बैंक के पूर्व वरिष्ठ अर्थशास्त्री प्रोफेसर संकेत महापात्र कहते हैं, 'आपदा प्रबंधन, पिछले अनुभवों से सफलतापूर्वक सीखना, तैयारी के महत्त्व तथा संकट से पहले प्रशिक्षण और चौकन्ना तथा नई चीजों को तुरंत अपनाने की प्रवृति के संदर्भ में यह अनुभव प्रबंधन पेशेवरों को महत्त्वपूर्ण सबक सिखाता है।' उन्होंने कहा कि संकल्प के अलावा फनी के बाद लोगों को निकालने के प्रयास से परिणाम हासिल करने की मानसिकता का पता चलता है और इसने सरकारी नौकरशाही में पहले से व्याप्त यह विचार कि वे निजी क्षेत्र की तुलना में कम सक्रिय होते हैं को हिलाकर रख दिया है। ओयो होटल्स ऐंड होम्स के भारत और दक्षिण एशिया के लिए मुख्य कार्याधिकारी आदित्य घोष कहते हैं, 'सही निर्णय लेने और रणनीति और योजना बनाने के लिए तैयारी सबसे अहम चीज है जिससे समस्याओं का अनुमान लगाने और उसके निदान को समझने से घटना वाले दिन बेहतर परिणाम हासिल होते हैं।' उन्होंने कहा, 'लोगों को सुरक्षित स्थान पर ले जाने और उन्हें राहत सामग्री मुहैया कराने को लेकर चक्रवात से पहले, उसके दौरान और उसके बाद दिखाया गया व्यापक समन्वय अपने आप में एक उदाहरण है। जब हम एक समूह के रूप में साक्षा लक्ष्य को पाने के लिए निकल पड़ते हैं, जब हम न केवल काम को पूरा करने बल्कि उसको इस तरह से करने की ठान लेते हैं जो एक उदाहरण बन जाए।' 
 
एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स इंडिया के सीआरओ उमेश ढल इस बात का अध्ययन करने का सुझाव देते हैं कि किस प्रकार से ओडिशा सरकार ने लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और उनके लिए पहली बार समय पर चेतावनी जारी किया जाना एक प्रमुख सबक है। वह कहते हैं, 'सही पूर्वानुमान जारी करने के लिए हमें मौसम विभाग को सबसे अधिक श्रेय देना चाहिए। पूर्वानुमान अपने आप में एक कौशल है और उसी के कारण दूसरी एजेंसियों को एकसाथ आकर एक समय पर अपनी-अपनी जिम्मेदारियों को पूरा करने में मदद मिली।'  केएफसी इंडिया के मुख्य विपणन अधिकारी मोक्ष चोपड़ा कहते हैं, 'तटीय इलाकों में पर्यटकों को इसे खाली करने का सुझाव दिया गया था, आश्रय स्थल पर भोजन, बोतलबंद पानी और अन्य जरूरी चीजें उपलब्ध कराई गई थी। हालात से निपटने के लिए 300 पावर बोट, दो हेलीकॉप्टर और कई मशीन आरी की व्यवस्था की गई थी। किसी भी योजना को सफल करने के लिए प्रत्येक संभावित परिणाम की तैयारी जरूरी है।' 
 
घोष फनी संकट प्रबंधन में युवाओं की क्षमता के दोहन को भी एक मूल्यवान सबक के तौर पर देखते हैं। उन्होंने कहा, 'ओडिशा में स्वयंसेवको विशेष कर हजारों युवाओं को राष्ट्रीय आपदा प्रंबंधन प्राधिकरण तथा स्थानी प्रशासन के साथ कंधे से कंधा मिलाकर योगदान करते देखना प्रशंसा करने योग्य था। यह महत्त्वपूर्ण है कि हजारों की संख्या में जो युवा अपने साथ नवाचार की क्षमता और भावना लेकर आते हैं कंपनियां उसका अधिक से अधिक लाभ उठाएं।' वह इसका उल्लेख करते हैं कि ओयो में प्रत्येक कर्मचारी को ओयोप्रेन्यर्स कहा जाता है क्योंकि हम उनकी दृढ़ता और उद्यमी भावना को महत्त्व देते हैं।  घोष की इस बात में इस आलेख के ज्यादातर विचारों का निचोड़ है: 'केवल महान दल ही बड़े बदलावों का सामना कर सकते हैं, वे जोखिमों को कम कर सकते हैं और फिर से उठ कर खड़े हो सकते हैं।'
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