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इन फाइनैंस कंपनियों पर दांव मुनाफे का सौदा!

हंसिनी कार्तिक /  May 26, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने कहा है कि गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए संकट न केवल धन की उपलब्धता बल्कि उनकी कर्ज चुकाने की क्षमता है। ऐसा लगता है कि इससे इस क्षेत्र को नया झटका लगा है, जिससे इंडियाबुल्स हाउसिंग फाइनैंस (आईएचएफएल), दीवान हाउसिंग फाइनैंस (डीएचएफएल) और तीसरे और चौथे पायदान की हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों के शेयरों पर दबाव बढ़ा है।  इन शेयरों और पीएनबी हाउसिंग फाइनैंस (शीर्ष पांच में पांचवीं) में पिछले सोमवार को काफी बढ़त दर्ज की गई। इसके बावजूद ये एक साल पहले की तुलना में 30 से 80 से नीचे हैं। डीएचएफएल में डिपॉजिट बुक से संबंधित प्रतिकूल घटनाक्रमों के कारण इस शेयर पर दबाव है। यह शेयर बुधवार को करीब 10 फीसदी गिरा। वहीं आईएचएफएल गुरुवार के घटनाक्रम के बाद 2 फीसदी से अधिक लुढ़का। रोचक बात यह है कि इस क्षेत्र की अगुआ कंपनियों- हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनैंस कॉरपोरेशन और एलआईसी हाउसिंग की ऋण वृद्धि में कमजोरी है। लेकिन अन्य तीन कंपनियां भी जोखिम से बाहर नहीं हैं। रेटिंग एजेंसियों ने डीएचएफएल की रेटिंग में कई बार कमी की है। हाल में रेटिंग में कमी की वजह यह हो सकती है कि कंपनी ने रणनीति साझेदार ढूंढने के लिए लंबा वक्त तय किया है। 

 
पीएनबी हाउसिंग की रेटिंग में भी कमी किए जाने की आशंका है। इस हाउसिंग फाइनैंस को पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) जैसे मजबूत प्रवर्तक और निजी इक्विटी निवेशक कार्लायल का समर्थन हासिल है। लेकिन इसे अन्य दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पीएनबी हाउसिंग में अपनी हिस्सेदारी को बेचने का पीएनबी का प्रयास सफल नहीं हो पाया। अगर कारोबार में सुधार भी आता है तो लंबे समय से लंंबित हिस्सेदारी में बिक्री पीएनबी हाउसिंग के शेयर को मुश्किल में बनाए रखेगी।  बुनियादी रूप से देनदारी में बदलाव की कोशिश की जा रही है। अच्छे समय में पीएनबी हाउसिंग सस्ते अल्पावधि गैर-परिवर्तनीय डिबेंचरों पर निर्भर थी, जो उसकी देनदारी का करीब 40 फीसदी है। अब यह स्रोत महंगा होता जा रहा है, इसलिए उसे ऊंची दरों पर पूंजी जुटाना पड़ रहा है और संपति देनदारी प्रबंधन की खाई को पाटना पड़ रहा है। 
 
आईएचएफएल के मामले में कई साल में पहली बार इस हाउसिंग ऋण प्रदाता की प्रबंधनाधीन संपत्तियां (एयूएम) मार्च, 2019 तिमाही (चौथी तिमाही) में तिमाही आधार पर 3 फीसदी घटी हैं। इसकी वजह अधिक कर्ज लौटाना और ऋणों को बेचना हो सकता है। हालांकि ऋण वितरण की रफ्तार कुछ सुधरी है, लेकिन शुद्ध मुनाफा विश्लेषकों के अनुमानों से कम रहा। आईएचएफएल के लक्ष्मी विलास बैंक में विलय के प्रस्ताव से इसे बैंक बनने में मदद मिल सकती है, लेकिन यह नियामक की मंजूरी पर निर्भर करेगा। निवेशकों के लिए दुविधा यह है कि क्या इन नामों से जुड़े रहें या सुरक्षित शेयरों की तरफ कूच कर जाएं। इन शेयरों में पिछले एक साल के दौरान आई गिरावट को देखते हुए जवाब सीधा नहीं है। आरबीआई के नकदी झोंकने की उम्मीदें भी मिथ्या साबित हुई है। इन्ही उम्मीदों से बीच-बीच में हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों के शेयरों की कीमतों में तेजी आ रही थी। 
 
एसएमसी मेडिकल के सिद्धार्थ पुरोहित ने कहा, 'अगर उन्हें साझेदार मिल भी जाते हैं तो तस्वीर साफ होने और उनमें फंड डाले जाने में लंबा समय लगेगा। निवेशकों को जोखिम से बचना चाहिए।' एनविजन कैपिटल के प्रबंध निदेशक नीलेश शाह ने कहा कि असल सवाल यह है कि संपत्ति देनदारी अंतर को संपत्ति की गुणवत्ता से अधिक महत्त्व दिया जाना चाहिए या संपत्ति की गुणवत्ता को संपत्ति देनदारी अंतर से ज्यादा अहमियत दी जानी चाहिए। वह कहते हैं, 'ऐसा लगता है कि संपत्ति देनदारी अंतर बड़ी समस्या नहीं है।' संपत्ति की गुणवत्ता ज्यादा प्रभावित नहीं हुई है। पीएनबी हाउसिंग फाइनैंस और आईएचएफएल की फंसी संपत्तियां एक फीसदी से भी कम हैं। दोनों हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों का प्रावधान अनुपात 25 फीसदी से घटकर चौथी तिमाही में क्रमश: 20.8 फीसदी और 22 फीसदी पर आ गया। 
 
इसके अलावा आईएचएफएल और डीएचएफएल फंड जुटाने के लिए अपने ऋणों के प्रतिभूतिकरण करने का रास्ता अपना रही हैं, इसलिए पूंजी ऋणदाता की लोन बुक की कीमत पर आ रही है। सबसे अहम यह है कि डीएचएफएल और आईएचएफएल के लिए वर्तमान रणनीतिक पहल स्थिर वृद्धि के लिए अहम साबित होंगी। वर्तमान चिंताओं को मद्देनजर रखते हुए विशेषज्ञों का कहना है कि अगर निवेशक क्षेत्र के मूल्यांकन के लिहाज से देखें तो पीएनबी हाउसिंग फाइनैंस तीनों में सबसे बेहतर स्थिति में है। इसने प्रबंधनाधीन संपत्तियों में 6 फीसदी क्रमिक वृद्धि दर्ज की है, जबकि अन्य हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों ने गिरावट दर्ज की है। 
 
डीएचएफएल ने अपने चौथी तिमाही के आंकड़े जारी नहीं किए हैं। विदेशी ब्रोकरेज के एक विश्लेषक ने कहा, 'पीएनबी हाउसिंग में उसके प्रतिस्पर्धियों की तुलना में गिरावट कम है। हालांकि 2019-20 कमजोर वृद्धि का वर्ष रहेगा, लेकिन उसे लंबी अवधि में रणनीतिक निवेशक या बैंकिंग चैनल की जरूरत नहीं होगी।' इसका मूल्यांकन निवेेशकों के लिए अनुकूल बन गया है। यह वित्त वर्ष 2020 की आमदनी के 1.1 गुना पर है, जो छह महीने पहले 2.1 गुना था। 
Keyword: NBFC, bank, micro finance, RBI,
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