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आधारभूत ढांचे में सरकारी निवेश को बढ़ावा

ज्योति मुकुल /  May 26, 2019

नई सरकार ढांचागत क्षेत्र के विकास पर बड़ा निवेश कर सकती है। भाजपा ने चुनाव से पहले अपने घोषणापत्र में कहा था कि 2024 तक सरकार ढांचागत क्षेत्र में 100 लाख करोड़ रुपये का निवेश करेगी। ऐसे में नई सरकार अपने कार्यकाल के शुरुआती महीनों में निवेश बढ़ाने के लिए मेट्रो परियोजनाओं, अंतर्देशीय जलमार्गों, प्राकृतिक गैस ग्रिडों और हवाईअड्डïों के निजीकरण पर जोर दे सकती है। ढांचागत परियोजनाओं में भारी निवेश के लिए निजी क्षेत्र को फिर से राजी करना इस सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता होगी क्योंकि उसके पास राजकोषीय गुंजाइश कम ही बची हुई है। असल में, रेटिंग एजेंसी फिच ने चुनावी नतीजों की घोषणा के बाद गत शुक्रवार को जारी एक रिपोर्ट में कहा है कि आम सरकारी कर्ज को वर्ष 2025 तक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 60 फीसदी तक सीमित करने के लिए राजकोषीय घाटे को सालाना 0.5 फीसदी कम करना होगा। फिच के मुताबिक वर्ष 2018-19 में आम सरकारी कर्ज जीडीपी का 68.8 फीसदी रहा था। इस तरह सरकार का अपना बजट समर्थन काफी हद तक कृषि के लिए ढांचा तैयार करने, अपने सामाजिक संपर्क कार्यक्रम के लिए डिजिटल नेटवर्क और शिक्षा में आईटी तक ही सीमित रहेगा। हालांकि रेलवे की ही तरह सड़क क्षेत्र भी उधारी और बजट संसाधन पर ही निर्भर बना रहेगा।

 
राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे जरूरी सुविधाएं मुहैया कराने की योजना बनाई जाएगी वहीं क्षेत्र में निजी निवेश अगले कुछ हफ्तों में मौजूदा परिसंपत्तियों के लिए रकम के रूप में आएगा। भाजपा का घोषणापत्र 2022 तक राष्ट्रीय राजमार्गों की लंबाई दोगुनी करने और अगले पांच वर्षों में 60,000 किलोमीटर लंबी सड़कों के निर्माण की बात करता है। भारतमाला 2.0 की शुरुआत भी होनी है। लेकिन इसके लिए बड़ी निर्माण कंपनियों को दोबारा जोडऩा एक बड़ी चुनौती होगी और इसके लिए महज 100 दिनों से कहीं अधिक समय लग सकता है।
 
भाजपा का कहना है कि वर्ष 2014 में जहां देश भर में केवल 65 एयरपोर्ट से ही विमानों का परिचालन हो रहा था वहीं अब यह संख्या बढ़कर 101 हो चुकी है। सरकार की योजना यह होगी कि सक्रिय एयरपोर्ट की संख्या को दोगुना कर दिया जाए। लेकिन एयरपोर्ट की संख्या इतनी बढऩे के बाद उड़ानों के संचालन के लिए उनमें आपस में ही प्रतिस्पद्र्धा होने लगेगी। घरेलू हवाई परिवहन में वृद्धि दर लगातार दूसरे साल गिरते हुए 2018-19 में 13.8 फीसदी ही रही। करीब 56,000 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले चार एयरपोर्ट का काम भूमि अधिग्रहण समस्या के चलते लटक गया है। एयरपोर्ट का परिचालन करने वाली कंपनियों को वित्तीय तनाव से बचाना महत्त्वपूर्ण होगा। खासकर देश की दो बड़ी एयरलाइंस- एयर इंडिया और जेट एयरवेज के भारी कर्ज से जूझने की वजह से विमानन कारोबार का सर्विस पहलू प्रभावित हो रहा है।
 
इक्रा के समूह प्रमुख एवं उपाध्यक्ष (कॉर्पोरेट रेटिंग्स) शुभम जैन ढांचागत परियोजनाओं के क्रियान्वयन पर खास ध्यान देने को जरूरी मानते हैं। वह कहते हैं, 'राजग के सत्ता में लौटते ही भारतमाला, सागरमाला, अंतर्देशीय जलमार्ग, सबको आवास, अमृत, स्मार्ट सिटी, मेट्रो परियोजनाओं और रेलवे विकास जैसे बड़े कार्यक्रमों पर ध्यान जारी रहेगा। उम्मीद है कि नई सरकार महत्त्वाकांक्षी लक्ष्यों को पूरा करने के लिए इनके कारगर क्रियान्वयन पर खास ध्यान देगी।' रेलवे के मामले में निजी निवेश वैगन स्वामित्व, माल ढलाई, स्टेशन पुनर्विकास और वेयरहाउसिंग जैसी संबद्ध गतिविधियों में बना रहेगा। अहमदाबाद और मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन चलाने और वंदेभारत एक्सप्रेस चलाने जैसी खास परियोजनाओं को भी तवज्जो मिलने के आसार हैं। हालांकि इन खर्चीली परियोजनाओं की बड़ी लागत हाई स्पीड ट्रेनों की व्यवहार्यता को सवालों के घेरे में ला देती है।
 
राष्ट्रीय शहरी परिवहन अभियान के जरिये शहरी आवागमन के साधनों का विकास भी सरकारी मिशन में शामिल रहने की संभावना है। सार्वजनिक परिवहन का इस्तेमाल बढ़ाने और स्थानीय निकायों को तकनीक आधारित परिवहन विकल्प देने पर ध्यान दिया जाएगा। सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक बसों का इस्तेमाल बढ़ सकता है। शहरों में सड़कों पर साइकिल एवं पैदल चलने का ट्रैक बनाने पर भी जोर दिया जा सकता है। 
Keyword: narendra modi, BJP, infrastructure, agenda, road, transport,,
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