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अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सुधार की तैयारी

अरूप रायचौधरी, दिलाशा सेठ, शुभायन चक्रवर्ती और वीणा मणि /  May 26, 2019

नरेंद्र मोदी सरकार अपने दूसरे कार्यकाल में ऐसे समय में नए सुधार लाना चाहती है और पहले कार्यकाल के अधूरे कामकाज को पूरा करना चाहती है जब अर्थव्यवस्था मंदी की तरफ बढ़ती जा रही है और इसमें तेजी लाने के लिए संसाधन ढूंढना मुश्किल है। जिन अधिकारियों ने वित्त मंत्रालय के 100 दिन के एजेंडे का मसौदा तैयार किया है, उनका कहना है कि सरकार का जोर जमीन, श्रम और पूंजी की लागत कम करने पर होगा। एक अधिकारी ने कहा, 'पिछले पांच साल में एकीकरण और भाई-भतीजावाद से निपटने में लग गए, अगले पांच साल विकास के होंगे। इस संदर्भ में जमीन, श्रम और पूंजी की लागत में कमी लाना अहम होगा।'

 
इस बार के आम चुनावों में मोदी सरकार को पिछली बार से ज्यादा बहुमत मिला है लेकिन इसके बावजूद वह नए श्रम कानून और भूमि अधिग्रहण कानूनों पर ऐसा रास्ता खोजना चाहती है जो सभी राजनीतिक दलों को स्वीकार्य हो। लेकिन भूमि अधिग्रहण सुधार के रास्ते पर आगे बढऩे से पहले न्यायिक प्रणाली में आमूलचूल बदलाव की जरूरत है। इसके बिना भूमि और श्रम से संबंधित अनुबंध अटक जाएंगे। एक अधिकारी ने कहा, 'उच्चतम न्यायालय से निचली अदालतों तक कई मामले लंबित हैं। इससे निपटने का एक तरीका यह हो सकता है कि न्यायपालिका में कर्मचारियों की संख्या बढ़ाई जाए। नई सरकार के पहले 100 दिन में सरकार इस पर काम शुरू कर देगी। न्यायिक सुधारों के बाद ही भूमि और श्रम कानूनों में सुधार किया जा सकता है।'
 
वित्त मंत्रालय के अधिकारियों ने व्यय और राजकोषीय मोर्चे पर सब्सिडी व्यय को व्यावहारिक बनाने और केंद्र सरकार द्वारा समर्थित योजनाओं की संख्या में कमी करने का सुझाव दिया है। यह इसलिए अहम है क्योंकि सरकार इस वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.4 फीसदी रखना चाहती है। वित्त वर्ष 2019 में भी इसके इसी स्तर पर रहने का अनुमान जताया गया था लेकिन फरवरी तक यह लक्ष्य से 34 फीसदी निकल गया गया था।  नई योजनाओं और घोषणाओं से सरकार का खर्च बढ़ेगा लेकिन इसके बावजूद सरकार को राजकोषीय घाटे के लक्ष्य को हासिल करना होगा। सरकार मत्स्य पालन, बीमा कवर और व्यापारियों के लिए क्रेडिट कार्ड की योजना ला सकती है। साथ ही पीएम किसान योजना में भूमिहीन किसानों को भी शामिल किया जा सकता है।
 
निवेश के मोर्चे पर केंद्र सरकार रणनीतिक बिक्री पर बड़ा कदम उठाना चाहती है। इसकी शुरुआत सरकारी विमानन कंपनी एयर इंडिया और पवन हंस से हो सकती है। सरकार ने इस साल के अंतरिम बजट में विनिवेश से 90 हजार करोड़ रुपये हासिल करने का लक्ष्य रखा है जबकि 2018-19 के संशोधित अनुमानों में यह राशि 84 हजार करोड़ रुपये है। अब यह देखना होगा कि पूर्ण बजट में इस लक्ष्य को बरकरार रखा जाता है या इसमें बदलाव किया जाता है। पूर्ण बजट जुलाई में पेश किया जा सकता है।  इसमें बदलाव की संभावना ज्यादा है क्योंकि वर्ष 2018-19 में कर राजस्व संग्रह लक्ष्य से 1.60 लाख करोड़ रुपये कम रह गया था। इससे सरकार पूर्ण बजट में संग्रह के लक्ष्यों को संशोधित कर सकती है। साथ ही सरकार आय कर की दरों में कमी लाने पर गंभीरतापूर्वक विचार कर रही है। इससे लोगों के पास खर्च करने योग्य आय आएगी जिससे अर्थव्यवस्था में तेजी आएगी। इससे सरकार के संग्रह में और कमी आएगी और सरकार पर संग्रह के लक्ष्यों को कम करने दबाव बढ़ेगा। 
 
वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय
 
विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में निर्यात के सुस्त रहने का अनुमान जताया है। इसे ध्यान में रखते हुए भारत से निर्यात में तेजी आने की संभावना क्षीण है। अधिकारियों का कहना है कि क्रेडिट तक पहुंच आसान बनाना, लागत में कमी करना और नकदी की कमी को दूर करना नई सरकार की प्राथमिकता होगी। रोजगार सृजन नई सरकार के लिए सबसे बड़ा सिरदर्द होगा। ऐसे में इस मंत्रालय का सबसे ज्यादा जोर औद्योगिक नीति पर होगा जो पिछले दो साल से बन रही है। मार्च में सरकार को लगता कि अभी इसमें कई खामियां हैं और इसलिए इसे पुनर्विचार के लिए वापस भेज दिया गया।  सालाना 100 अरब डॉलर विदेशी प्रत्यक्ष निवेश (एफडीआई) आकर्षित करना, प्रौद्योगिकी हस्तांतरण और सूक्ष्म, लघु और मझोले उद्यमों का विकास सरकार की प्राथमिकता होगी।  नई अर्थव्यवस्था को नजरदांज नहीं किया जा सकता है। सरकार ने स्टार्ट अप कंपनियों में मान्यताप्राप्त निवेशकों के निवेश की सीमा 10 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 25 करोड़ रुपये कर दिया गया है ताकि उन्हें ऐंजल टैक्स के प्रावधान से छूट मिल सके। 
 
कंपनी मामलों का मंत्रालय
 
सरकार भारत को कारोबार के आसान माहौल की रैंकिंग में शीर्ष 50 में लाना चाहती है। जब वर्ष 2014 में मोदी सरकार ने सत्ता संभाली थी तो भारत की रैंकिंग 140वीं थी लेकिन आज वह 77वें स्थान पर है। इसमें ऋणशोधन समाधान की अहम भूमिका होती है। इस रैंकिंग में आगे बढऩे के लिए कंपनी मामलों का मंत्रालय ऋणशोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) में संशोधन पर काम कर रही है। 
Keyword: narendra modi, BJP, economy, agenda,,
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