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रिजर्व बैंक के नए नियम से एनबीएफसी का घटेगा लाभ

श्रीपाद ऑटे और अभिजित लेले / मुंबई May 26, 2019

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए तरलता जोखिम प्रबंधन पर पिछले हफ्ते शुक्रवार को घोषित भारतीय रिजर्व बैंक के मसौदा दिशानिर्देश से निकट भविष्य में एनबीएफसी के लाभ में कमी आ सकती है, हालांकि यह मामूली हो सकती है।  मसौदे में दिए गए दिशानिर्देश पर बहुत अधिक बाजार/उद्योग के विशेषज्ञों का प्रभाव है और यह सही दिशा में कहा जा सकता है क्योंकि इस क्षेत्र में पिछले वर्ष सितंबर के आईएलऐंडएफएस संकट के बाद से तरलता पर संशय के बादल बन हुए हैं। दिशानिर्देश के शुरुआती बिंदु दो कारकों की तरफ इशारा करते हैं। पहला उधारी लागत में मजबूत वृद्घि और निवेश खातों पर मिलने वाले कम लाभ से एनबीएफसी के स्प्रेड को धक्का लग सकता है। स्प्रेड कर्जदाताओं का लाभकारी उपाय है। 
 
शेयरखान के सहायक उपाध्यक्ष ललिताभ श्रीवास्तव ने कहा, 'एनबीएफसी लघु अवधि की उधारी देकर लाभ कमा रहे थे, इसमें कर्ज देने की लागत अपेक्षाकृत कम आती है। दीर्घावधि की परिसंपत्तियों के लाभ पर लघु अवधि में दबाव देखा जा सकता है। एक बार इन दिशानिर्देशों को अंतिम रूप दिए जाने के बाद यह व्यवस्था आगे जारी रहेगी।' मसौदा दिशानिर्देशों के मुताबिक एनबीएफसी को परिसंपत्ति-देयता प्रबंधन (एएमएल) डेटा को और अधिक छोटी अवधि (साप्ताहिक, 8-14 दिन, 15-30 दिन आदि) पर जारी करना होगा और संचयी एएलएम का अंतर साप्ताहिक और 8-14 दिनों के डेटा के लिए 10 फीसदी और 15-30 दिन के डेटा के लिए 20 फीसदी स्वीकार्य है। किसी विशेष अवधि में जब नकद प्रवाह, नकद आमद से अधिक हो जाता है तब एएलएम का अंतर उत्पन्न होता है। 
 
श्रीराम ट्रांसपोर्ट फाइनैंस कंपनी के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी उमेश रावेनकर कहते हैं, 'घोषित किए गए बहुत से तरलता उपायों को ठीक तरह से प्रबंधित एनबीएफसी ने अपनाया है केवल उनमें एएलएम समिति द्वारा निगरानी किए जाने जैसा कोई नियम नहीं था। यदि इन दिशानिर्देशों को अंतिम रूप दिया जाता है तो यह एनबीएफसी की देनदारियों की सख्त निगरानी होगी और हर किसी को विधिवत प्रक्रिया का पालन करना होगा।'
Keyword: NBFC, bank, micro finance, RBI,
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