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जून में हो सकती है जीएसटी परिषद की बैठक

दिलाशा सेठ / नई दिल्ली May 26, 2019

प्रचंड बहुमत के साथ केंद्र में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की वापसी के बाद नए वित्त मंत्री की मंजूरी के साथ वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की अगली बैठक जून के पहले सप्ताह में हो सकती है। इस बैठक में सौर परियोजनाओं के लिए कर ढांचे, सरकारी व राज्य से मान्यता प्राप्त लॉटरी पर एक समान कर दर, नॉन पोर्टेबल (पीने योग्य नहीं) अल्कोहल पर कर के अलावा राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण के विस्तार और दरों को तार्किक बनाने के लिए कानून में कुछ बदलाव किए जाने जैसे मसलों पर ध्यान केंद्रित किया जा सकता है, जिन पर तत्काल ध्यान दिए जाने की जरूरत है। 
 
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'जून की शुरुआत में अगली बैठक कभी भी होने की उम्मीद है। तत्काल ध्यान देने वाले मसलो को इस बैठक में शामिल किए जाने के साथ अन्य पेट्रोलियम उत्पादों के साथ प्राकृतिक गैस को इसमें शामिल किए जाने, 12 प्रतिशत और 18 प्रतिशत कर ढांचे का विलय करने पर भी चर्चा होगी, क्योंकि यह सरकार की प्राथमिकता में है।' जून की बैठक में परिषद पिछले महीने दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा दिए गए निर्देश के मुताबिक सौर बिजली परियोजनओं के लिए कर ढांचे की समीक्षा कर सकता है। सरकार ने मूल्यांकन का जो प्रावधान किया है, उसके मुताबिक कॉन्ट्रैक्ट मूल्य का 70 प्रतिशत वस्तु के रूप में है, जिस पर 5 प्रतिशत और शेष 30 प्रतिशत को सेवा मानकर 18 प्रतिशत कर लगाया गया है। बहरहाल उद्योगों का तर्क है कि अस्थायी मूल्यांकन से वस्तु एवं सेवाओं के विभाजन का सही अनुमान नहीं मिल पाता है। सौर क्षेत्र में यह कथित अनुमान करीब 90:10 का है। इसके अलावा एडवांस रूलिंग अथॉरिटी के डाइवर्जेंट रूलिंग की वजह से और भ्रम पैदा हुआ है, जिसे लेकर सोलर पॉवर डेवलपमेंट एसोसिएशन ने रिट दाखिल की है। 
 
एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'हम केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) और नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ बातचीत कर रहे हैं।'  राष्ट्रीय मुनाफाखोरी रोधी प्राधिकरण (एनएए) का काल दो साल के सनसेट क्लॉज के मुताबिक नवंबर के अंत तक समाप्त हो रहा है, ऐसे में इसके विस्तार पर परिषद की बैठक में चर्चा हो सकती है। एनएए के चेयरमैन बीएन शर्मा ने अनौपचारिक रूप से जीएसटी परिषद से विस्तार के बारे में कहा है क्योंकि कई मामले लंबित हैं। इसके  जवाब में परिषद ने एनएए से पारित किए गए आदेशों के और लंबित मामलों के आंकड़े मांगे हैं, जिससे विस्तार के बारे में फैसला किया जा सके। एक अधिकारी ने कहा, 'इसे लेकर दो विचार हैं। पहला यह कि लंबित मामलों को निपटाने के लिए एनएए को एक नियत समय दिया जाए। दूसरा विचार है कि पेट्रोलियम और अल्कोहल जैसी कुछ वस्तुएं अभी भी जीएसटी के दायरे में लाई जानी हैं, इसलिए एनएए को लंबा वक्त दिए जाने की जरूरत है।' 
 
एनएए के प्रमुख बीएन शर्मा हैं और संयुक्त सचिव स्तर के 4 वरिष्ठ अधिकारी उनका सहयोग करते हैं। जीएसटी के तहत मुनाफाखोरी रोधी नियम के मुताबिक इनपुट टैक्स क्रेडिट से मिला फायदा कीमतों में कमी कर प्राप्तकर्ता तक पहुंचाया जाना चाहिए।  पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर प्रतीक जैन ने कहा, 'जीएसटी परिषद की अगली बैठक महत्त्वपूर्ण होगी और इसमें अगले साल और उसके आगे का एजेंडा तैयार किया जा सकता है। ई-इनवाइसिंग और कर चोरी रोकने के लिए कदमों, अनुपालन व्यवस्था को लागू करने की समय सीमा, आगे दरों को और तार्किक बनाने और कुछ खास उद्योग से जुड़े मसलों जैसे सौर उद्योग के बारे में चर्चा हो सकती है। साथ ही कुछ कानूनी बदलाव पर भी बात हो सकती है।'
 
लॉटरी पर कर की दरों पर की भी समीक्षा होगी। महाराष्ट्र के वित्त मंत्री सुधीर मुनगंटीवार की अध्यक्षता में बनी मंत्रियों की परिषद की रिपोर्ट पर विचार हो सकता है, जिसने 18 प्रतिशत या 28 प्रतिशत की दर से एकसमान कर लगाए जाने का पक्ष लिया है। राज्यों की लॉटरी पर एसजीएसटी 18 प्रतिशत या 28 प्रतिशत रखी जा सकती है। राज्य प्रायोजित लॉटरियों पर जीएसटी दर 28 प्रतिशत बरकरार रखी जा सकती है या उसे घटाकर 18 प्रतिशत किया जा सकता है।  एक सरकारी अधिकारी ने कहा, 'राज्य सरकार से अधिकृत लॉटरी पर दरें कम करने के पक्ष में केरल नहीं है, जबकि महाराष्ट्र, पंजाब और असम दरें कम करने को इच्छुक हैं।' 
 
इसके साथ ही परिषद एक्सट्रा न्यूट्रल अल्कोहल (ईएनए) पर शुल्क लगाने पर भी विचार कर सकती है, जो गन्ने के शीरे का उत्पाद है और इसका इस्तेमाल अल्कोहलिक बेवरिज बनाने में होता है। इसका इस्तेमाल दवा, इत्र और प्रसाधन सामग्री बनाने में भी होता है। प्रस्ताव यह है कि इस पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाया जाए। 
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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