बिजनेस स्टैंडर्ड - एयर इंडिया में अब बिकेगा 100 फीसदी हिस्सा
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एयर इंडिया में अब बिकेगा 100 फीसदी हिस्सा

अरिंदम मजूमदार और अरूप रायचौधरी / नई दिल्ली 05 26, 2019

प्रस्तावित रणनीतिक बिक्री आगे बढ़ाने में जुटी सरकार

बिजनेस स्टैंडर्ड एयर इंडिया में अब बिकेगा 100 फीसदी हिस्सासत्ता में वापसी करने के बाद मोदी सरकार एक बार फिर एयर इंडिया में प्रस्तावित रणनीतिक बिक्री को आगे बढ़ाने में जुट गई है। बिज़नेस स्टैंडर्ड को मिली जानकारी के मुताबिक इस बार सरकार कंपनी में शत प्रतिशत हिस्सेदारी बेच सकती है। नागरिक उड्डयन मंत्रालय और वित्त मंत्रालय के निवेश एवं लोक परिसंपत्ति प्रबंधन विभाग (दीपम) ने एयर इंडिया के विनिवेश पर काम करना शुरू कर दिया है। इस बारे में नागरिक उड्डयन सचिव प्रदीप सिंह खरोला ने एयर इंडिया को एक पत्र लिखा है। इससे पहले उनकी प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव नृपेंद्र मिश्रा के साथ एक बैठक हुई जिसमें एयर इंडिया और उसकी सहयोगी कंपनियों के वित्त वर्ष 2018-19 के वित्तीय लेखाजोखे को अंतिम रूप दिया गया।

बिज़नेस स्टैंडर्ड ने इस पत्र को देखा है। इसमें कहा गया है कि एयर इंडिया और उसकी सहयोगी कंपनियों की विनिवेश प्रक्रिया को तेज करने का फैसला किया गया है। अधिकारियों का कहना है कि सरकार अब भी एयर इंडिया से पहले उसकी सहयोगी कंपनियों को बेचने के विकल्प को आगे बढ़ा रही है। एयर इंडिया पर करीब 27,000 करोड़ रुपये का कर्ज है।

इस बीच दीपम के सचिव अतनु चक्रवर्ती एयर इंडिया के विनिवेश के बारे में उनके विभाग की तैयारियों और लेनदेन सलाहकार के बारे में जल्दी ही प्रधानमंत्री कार्यालय के अधिकारियों को जानकारी दे सकते हैं। एक अधिकारी ने बताया कि सलाहकार कंपनी ईवाई को लेनदेन सलाहकार बरकरार रखा गया है और बोलियां आमंत्रित करने के लिए एक महीने के भीतर निविदा जारी की जा सकती है। पिछले साल के अनुभव से सबक लेते हुए इस बार सरकार एयर इंडिया में छिटपुट हिस्सेदारी भी रखने नहीं रखना चाहेगी। कंपनी में 95 फीसदी हिस्सेदारी बेचने और पांच फीसदी कर्मचारियों के लिए ईसॉप के रूप में रखने पर विचार चल रहा है।

एक अधिकारी ने कहा, 'विनिवेश के समय स्थायी कर्मचारियों को कंपनी में स्टॉक ऑप्शन और एक साल नौकरी का आश्वासन देने की योजना है।' पिछली बार सरकार ने कंपनी में 24 फीसदी हिस्सेदारी अपने पास रखने की योजना बनाई थी जिसके कारण किसी भी खरीदार ने इसमें दिलचस्पी नहीं दिखाई। तब कोई भी खरीदार आगे नहीं आया था जिससे सरकार को बिक्री बंद करनी पड़ी थी। सरकार एयर इंडिया के भारी कर्ज की समस्या से भी निपटना चाहती है। सरकार ने एक अलग कंपनी बनाकर एयर इंडिया का करीब 27,500 करोड़ रुपये का कर्ज कम कर दिया है लेकिन बाजार सूत्रों का कहना `है कि  कंपनी के कर्ज में और कमी करने की जरूरत है ताकि दूसरी कंपनियां इसमें दिलचस्पी दिखाएं। 

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