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जीएसटी: इनपुट भुगतान के लिए पैसा ही नहीं एकमात्र संपत्ति

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली May 24, 2019

एक अग्रिम निर्णय प्राधिकरण (एएआर) ने अपने फैसले में कहा है कि कंपनियां वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली के तहत इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा तब भी कर सकती हैं, जब वे अपने बीच कर समेत इनपुट की भुगतान देनदारी को खातों के जरिये ही समायोजित कर लेती हैं। पश्चिम बंगाल के एएआर ने गहनों की आपूर्तिकर्ता सैंकों गोल्ड लिमिटेड के मामले की सुनवाई के दौरान यह फैसला दिया है। कंपनी फ्रैंचाइजी द्वारा संचालित स्टोरों के एक नेटवर्क का भी परिचालन करती है। इस मामले के बारे में केपीएमजी में पार्टनर हरप्रीत सिंह ने कहा कि आवेदक ने आभूषण और फ्रैंचाइजी सहयोग सेवा देने के लिए फ्रैंचाइजी को कर बिल दिया था। वहीं फ्रैंचाइजी ने ग्राहकों से प्राप्त पुराने गहने की आपूर्ति के लिए आवेदक को कर बिल थमाया था। आवेदक कंपनी खातों के जरिये ही पारस्परिक देनदारी का निपटान करना चाहता थी। हालांकि इनपुट टैक्स हासिल करने के लिए सीजीएसटी की धारा 16 में कहा गया है कि माल के प्राप्तकर्ता को 180 दिनों के भीतर कर सहित माल की रकम का भुगतान आपूर्तिकर्ता को करना अनिवार्य है। 
 
ऐसी स्थिति में आवेदक ने इस बारे में अग्रिम निर्णय मांगा कि क्या फ्रैंचाइजी से प्राप्त माल से उस पर बनी देनदारी का समायोजन खातों के जरिये करने पर भी इनपुट टैक्स क्रेडिट मिल सकता है। एएआर ने कहा कि आवेदक ऐसा कर सकती है। एएआर ने कहा कि आवेदक प्राप्त आपूर्ति की रकम का भुगतान बहीखातों के समायोजन के जरिये भी कर सकती है। इसने कहा कि भुगतान प्राप्तकर्ता को संपत्ति का हस्तांतरण है, जो किसी वस्तु या सेवा के लेनदेन से पैदा होने वाली देनदारी से मुक्त होने के लिए किया जाता है। ऐसे भुगतान के लिए सबसे आम संपत्ति पैसा है। अन्य संपत्तियों का भी भुगतान हो सकता है, बशर्ते कि इन पर कानून के तहत रोक नहीं लगाई गई हो और प्राप्तकर्ता उनमें भुगतान स्वीकार करने के लिए तैयार हो। सिंह ने कहा, 'इससे करदाताओं को बड़ी राहत मिलेगी। लेकिन देखना होगा कि क्या यह उन फैसलों में भी लागू होगा, जिनमें आपूर्तिकर्ता कर देनदारी कम किए बिना ग्राहकों को छूट देकर कर्ज देनदारी में कमी करता है।'
Keyword: GST, वस्तु एवं सेवा कर, जीएसटी,,
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