बिजनेस स्टैंडर्ड - विधानसभा चुनावों से गायब रही मोदी लहर
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विधानसभा चुनावों से गायब रही मोदी लहर

जयजित दास, दशरथ रेड्डी और ईशिता अयान दत्त /  May 23, 2019

ओडिशा, आंध्र प्रदेश और सिक्किम में हुए राज्य विधानसभा चुनाव में देश भर में फैली मोदी लहर के विपरीत रुझान रहे हैं। ओडिशा में नवीन पटनायक ने अपना गढ़ बनाए रखा। आंध्र प्रदेश में वाई एस जगन मोहन रेड्डी ने बड़ी जीत के साथ चंद्रबाबू नायडू की तेलुगूदेशम पार्टी को चौंका दिया और सिक्किम में सिक्किम क्रांतिकारी मोर्चा (एसकेएम) राज्य में सिक्किम डेमोक्रेटिक फ्रंट (एसडीएफ) की लगातार जीत को रोक सकती है।  ओडिशा के मुख्यमंत्री नवीन पटनायक सत्ता विरोधी लहर और विभिन्न सामूहिक अपनी के बावजूद अपने पांचवे कार्यकाल के लिए आगे बढ़ रहे हैं। साल 2000 में ओडिशा विधानसभा चुनाव में पहली बार जीत हासिल करने वाले पटनायक ने प्रत्येक चुनाव में लगातार जीत दर्ज की है। ताजा आंकड़े बताते हैं कि बीजू जनता दल (बीजद) राज्य की कुल 146 विधानसभा सीटों पर हुए चुनाव में से 110 सीटों पर आगे चल रही है। तटीय जिले केंद्रपाड़ा के एक निर्वाचन क्षेत्र पटकुरा में पहले भाजपा के उम्मीदवार वेद प्रकाश अग्रवाल की मृत्यु और बाद में फनी चक्रवात के चलते राज्य सरकार द्वारा निर्वाचन आयोग से अनुरोध करने पर चुनाव टाल दिए गए थे। 

 
ओडिशा विधानसभा में पटनायक की सत्ता के बावजूद भाजपा को उम्मीद है कि वह 2019 के इस चुनाव में अपने आंकड़े बेहतर बनाएगी। फिलहाल भाजपा 25 सीटों पर आगे चल रही है और उसने राज्य की मुख्य विपक्षा  पार्टी कांग्रेस को तीसरे स्थान पर धकेल दिया।  आंध्र प्रदेश में वाई एस जगन मोहन रेड्डी के नेतृत्व वाली विपक्षी पार्टी वाई एस आर कांग्रेस पार्टी विधानसभा चुनावों में एकतरफा जीत दर्ज कर रही है। पार्टी राज्य की कुल 175 सीटों में से 144 में जीत दर्ज या आगे चल रही है, जिसने तेदेपा के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को लगभग तबाह कर दिया है। पिछले विधानसभा चुनावों में 103 सीटों पर जीत दर्ज करने वाली तेदेपा इस बार केवल 30 सीटों के आस-पास सिमटती दिखाई दे रही है। 
 
देशभर में चल रही मोदी लहर के बाद भी भाजपा आंध्र प्रदेश में जीत दर्ज करने में नाकाम रही है। हालांकि कांग्रेस भी कोई सीट नहीं जीत सकी। साल 2019 के इन चुनावों ने जगन रेड्डी की 8 साल की राजनीतिक लड़ाई को सफल बना दिया है। राज्य अब जगन मोहन रेड्डी के अगले मुखख्यमंत्री बनने की तैयारी कर रहा है।  सिक्किम में एसडीएफ साल 1994 से सत्ता में है लेकिन इस बार पार्टी को कड़ी टक्कर मिल रही है। हालांकि अभी तक देश में सबसे अधिक 5 बार मुख्यमंत्री बनने वालों में शामिल पवन चांमलिंग अपने छठे कार्यकाल के इंतजार में हैं। हालांकि चुनाव आयोग के आंकड़े बताते हैं कि फिलहाल सिक्किम क्रांति मोर्चा (एसकेएम) 32 सीटों वाली विधानसभा में से 10 सीटें जीत चुकी है और 2 सीटों पर आगे चल रही है। भाजपा ने सिक्किम में एसकेएम से गठबंधन किया है लेकिन चुनाव में अपना कोई उम्मीदवार नहीं उतारा। सिक्किम की जनता ने हमेशा स्थानीय दलों को वरीयता दी है। 
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