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आईएलऐंडएफस के पूर्व निदेशकों के ठिकानों पर ईडी की छापेमारी

श्रीमी चौधरी / नई दिल्ली May 22, 2019

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज (आईएलऐंडएफएस) में कथित वित्तीय घोटाले से जुड़े धन शोधन के मामले में अपनी जांच का दायरा बढ़ा दिया है। एजेंसी ने नकदी संकट से जूझ रही आईएलऐंडएफएस फाइनैंशियल सर्विसेज (आईएफआईएन) के चार पूर्व निदेशकों के कारोबारी प्रतिष्ठानों और आवासों पर छापेमारी की। इस घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए ईडी के अधिकारियों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि छापेमारी जारी है और यह कुछ दिन और जारी रहेगी। उनके मुताबिक ईडी गंभीर अनियमितताओं, कई विनियमित लेनदेनों और प्रत्येक सौदे से जुड़ी करोड़ों रुपये की राशि से संबंधित सबूत जुटा रहा है।  
 
ईडी के मुताबिक आईएलऐंडएफएस के पूर्व कार्यकारी निदेशक राजेश कोटियन के कारोबारी एवं आवास पर छापेमारी की गई। उनके अलावा शहजाद सिराज दलाल के यहां भी छापेमारी की गई। दलाल आईएलऐंडएफएस को विदेश ले गए और आईएलऐंडएफएस इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स द्वारा शुरू किए गए फंडों की अगुआई की और उन्होंने भारत में बहुत से रियल एस्टेट डेवलपरों को ऋण मुहैया कराया। ईडी ने सिद्धार्थ मेहता के ठिकानों पर भी छापेमारी की। मेहता बे कैपिटल के एक प्रवर्तक और आईएलऐंडएफएस एनर्जी डेवलपमेंट के निदेशक थे। इनके अलावा एजेंसी ने आज आईएफआईएन के निदेशक मनु कोछड़ और आईएलऐंडएफएस इंजीनियरिंग ऐंड कंस्ट्रक्शन कंपनी के पूर्व प्रबंध निदेशक मुकुंद सप्रे के ठिकानों पर छापेमारी की। 
 
ईडी ने ऐसी छापेमारी फरवरी में भी की थी। सूत्रों का कहना है कि ईडी को विभिन्न विदेशी सौदों में 13,000 करोड़ रुपये से अधिक रकम के शोधन का संदेह है। सूत्रों का कहना है कि ईडी ऋण की राशि के अंतिम उपयोग का पता लगाने की कोशिश कर रहा है। इसमें आईएफआईएन के कर्जदारों को दी गई रकम भी शामिल है। एजेंसी के अधिकारियों ने कहा कि उनके पास ऐसे सबूत हैं, जो यह दर्शाते हैं कि ऋण आईएलऐंडएफएस और आईएफआईएन के वरिष्ठ कार्याधिकारियों से जुड़ी कंपनियों को दिए गए। उदाहरण के लिए एक प्राइवेट इक्विटी कंपनी इंडस इक्विकैप कंसल्टेंसी ने करीब 30 करोड़ रुपये का ऋण लिया। इस राशि में से 3 करोड़ रुपये आईएलऐंडएफएस एनर्जी डेवलपमेंट के बोर्ड निदेशक सिद्धार्थ मेहता के पास गए। इस समय ब्रिटेन में रह रहे मेहता को एजेंसी ने जांच में सहयोग देने के लिए बुलाया है। दलाल को मुंबई में अपनी संपत्ति बेचने से रोका गया है। दलाल के खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया है। 
 
वहीं हाल में एक उच्च स्तरीय समिति की बैठक में आईएलऐंडएफएस समूह की 'ऐंबर' कंपनियों के लिए आनुपातिक आधार पर ऋण अदायगी के बारे में विचार किया गया। इस समय आईएलऐंडएफएस की 'ग्रीन' श्रेणी में आने वाली कंपनियां अपना कर्ज चुका रही हैं। ऐंबर कंपनियां वे हैं, जो केवल कुछ बड़े सुरक्षित ऋणदाताओं का कर्ज चुकाने की स्थिति में हैं। 
Keyword: IL&FS, fund, share, LIC, sidbi, इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंस सर्विसेज,
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