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ईपीएफओ निजी बॉन्डों में रोकेगा निवेश!

सोमेश झा /  May 22, 2019

कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) निजी क्षेत्र के बॉन्डों में अपने निवेश को लेकर चिंतित है और कुछ समय इनमें निवेश नहीं करने का फैसला ले सकता है। सूत्रों ने यह जानकारी देते हुए कहा कि इस कदम का मकसद ऐसी डेट योजनाओं में किसी नुकसान से बचना है क्योंकि बहुत सी निजी कंपनियों ने कई बार डिफॉल्ट किए हैं और उनकी क्रेडिट रेटिंग में गिरावट आई है। ईपीएफओ के शीर्ष अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि यह फैसला पिछले महीने ईपीएफओ की वित्त ऑडिट एवं निवेश समिति (एफआईएसी) की बैठक में लिया गया। 
 
ईपीएफओ में एफआईएसी के एक सदस्य ने कहा कि कन्करेंट ऑडिटर ने अप्रैल में हुई बैठक के दौरान ऐसी कंपनियों की एक सूची सौंपी है, जो डिफॉल्ट कर रही हैं या जिनकी क्रेडिट रेटिंग में गिरावट आ रही है। हालांकि निजी क्षेत्र के बॉन्डों में निवेश पर रोक लगाने के लिए श्रम एवं रोजगार मंत्री की अध्यक्षता वाले केंद्रीय न्यासी बोर्ड और केंद्र सरकार की मंजूरी लेनी होगी। अधिकारी ने कहा, 'एक महीने पहले एआईएसी की बैठक में हमारे बीच इस बात को लेकर सहमति थी कि ईपीएफओ को कुछ समय निजी क्षेत्र के बॉन्डों में निवेश नहीं करना चाहिए।' ईपीएफओ निवेश के निर्धारित ढांचे को अपनाता है। इस ढांचे की अधिसूचना श्रम एवं रोजगार मंत्रालय वित्त मंत्रालय के साथ विचार-विमर्श करने के बाद जारी करता है। ईपीएफओ कोष में होने वाली बढ़ोतरी को इक्विटी, डेट, सरकारी प्रतिभूति जैसी विभिन्न योजनाओं में निवेश करता है। ईपीएफओ का यह कोष निजी क्षेत्र के कार्मिकों की भविष्य निधि बचतों से बनता है। निवेश के वर्तमान ढांचे के मुताबिक ईपीएफओ के लिए अपने कोष में बढ़ोतरी का 20 से 45 फीसदी हिस्सा डेट योजनाओं में निवेश करना अनिवार्य है। 
 
इसमें निजी और सार्वजनिक क्षेत्र दोनों के बॉन्ड शामिल हैं। उदाहरण के लिए वाणिज्यिक बैंकों, म्युचुअल फंडों और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) की तरफ से जारी किए जाने वाले बॉन्ड। इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज और डीएचएफएल जैसी शीर्ष एनबीएफसी में संकट से इस क्षेत्र में निवेशकों के लिए जोखिम बढ़े हैं।  ईपीएफओ के अधिकारी ने कहा, 'हम कॉरपोरेट बॉन्डों में अपना निवेश कम नहीं करेंगे, लेकिन निजी बॉन्डों की तस्वीर उजली नजर नहीं आ रही है। बाजार में ऐसे पर्याप्त बॉन्ड नहीं है, जिनमें प्रतिफल एवं परिपक्वता तर्कसंगत हो। हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि हमारा निवेश नहीं फंसे क्योंकि यह करोड़ों लोगों सामाजिक सुरक्षा का मामला है।' यह कहा जा रहा है कि 2018-19 में रेटिंग एजेंसियों की करीब 10 फीसदी या 10 लाख करोड़ रुपये मूल्य के कॉरपोरेट बॉन्ड पर नजर थी। 
Keyword: EPFO, ETF, Bond,,
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