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कॉरपोरेट आय फिर कमजोर रहने के आसार

कृष्ण कांत / मुंबई May 21, 2019

भारतीय कॉरपोरेट जगत लगातार दूसरी तिमाही में निवेशकों को निराश कर सकता है और वित्त वर्ष 2019 की चौथी तिमाही के दौरान मजबूत आय वृद्घि का बाजार का अनुमान सही साबित नहीं हो सकता है। जनवरी-मार्च 2019 की तिमाही के लिए अपने नतीजे घोषित कर चुकीं 564 कंपनियों (वित्त और ऊर्जा को छोड़कर) का संयुक्त शुद्घ लाभ सालाना आधार पर 10.3 प्रतिशत घटा है जो पिछली कम से कम 12 तिमाहियों में उनका सबसे खराब प्रदर्शन है। इन कंपनियों की संयुक्त शुद्घ बिक्री वित्त वर्ष 2019 की चौथी तिमाही में सालाना आधार पर 9 प्रतिशत तक बढ़ी, जो 6 तिमाहियों में सबसे धीमी गति है। इससे अर्थव्यवस्था में मांग सुस्त रहने का संकेत मिलता है।
 
नमूने के तौर पर शामिल सभी 670 कंपनियों ने बेहतर प्रदर्शन किया और उन्होंने 26.4 प्रतिशत का शुद्घ मुनाफा वृद्घि दर्ज की। 2017-18 में कमजोर चौथी तिमाही के बाद सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा आय में सुधार दर्ज किए जाने से इन कंपनियों को इस तरह की मुनाफा वृद्घि में मदद मिली। मार्च 2018 की तिमाही में सभी कंपनियों के लिए शुद्घ लाभ में 24.5 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई थी। हालांकि सुधार के बावजूद संपूर्ण आंकड़ों के संदर्भ में मुनाफा जनवरी-मार्च 2017 की तिमाही में कंपनियों द्वारा दर्ज स्तर से 5 प्रतिशत कम है।
 
कुल मिलाकर, बैंकिंग सेक्टर पर दबाव बना रहा और तिमाही के दौरान उसे 9,853 करोड़ रुपये के नुकसान का सामना करना पड़ा जबकि एक साल पहले यह आंकड़ा 31,576 करोड़ रुपये था। वहीं अक्टूबर-दिसंबर 2018 की तिमाही में बैंकिंग सेक्टर ने 6,600 करोड़ रुपये का मुनाफा दर्ज किया था।  सकारात्मक बदलाव यह है कि बैंकों ने लगातार दूसरी तिमाही में अपनी शुद्घ ब्याज आय में तेजी दर्ज की है और उन्हें गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में ऋण संकट से फायदा हुआ है। नमूने में शामिल सभी कंपनियों का कुल राजस्व तिमाही के दौरान 10.3 प्रतिशत तक बढ़ा, जो पिछली 6 तिमाहियों में सबसे धीमी रफ्तार है। इस राजस्व में उनकी शुद्घ ब्याज आय के अलावा शुल्क आय और निवेश आय भी शामिल है। 
 
विश्लेषकों ने वृद्घि की कमजोर रफ्तार के लिए वाहन, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, गैर-बैंकिंग वित्त और कंज्यूमर स्टैपल्स जैसे क्षेत्रों में मांग में कमी के प्रभाव को जिम्मेदार बताया है। ये क्षेत्र पिछली कुछ तिमाहियों में राजस्व वृद्घि के लिहाज से मजबूत बने हुए थे। हालांकि वित्तीय परिणाम का सीजन समाप्त हो रहा है और आय रुझान में और बदलाव देखा जा सकता है। लेकिन अभी इंटरग्लोब एविएशन, भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स, ओएनजीसी और सन फार्मास्युटिकल्स जैसे कई उद्योग दिग्गजों द्वारा वित्त वर्ष 2019 की चौथी तिमाही के लिए अपने नतीजे घोषित किए जाने बाकी हैं। घरेलू बाजार-केंद्रित कंपनियां (वित्त, ऊर्जा, प्रौद्योगिकी, फार्मा और धातु को छोड़कर) दबाव में बनी हुई हैं और चौथी तिमाही में उनके शुद्घ लाभ में सालाना आधार पर 8.9 प्रतिशत की कमी आई है जबकि एक साल पहले उनकी आय में 17.7 प्रतिशत की वृद्घि दर्ज की गई थी। 
Keyword: corporate, income, investors,,
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