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एनबीएफसी को रिजर्व बैंक से अभी राहत का इंतजार

अनूप राय और जश कृपलानी / मुंबई May 20, 2019

गैर बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के नकदी का संकट कम होने का कोई संकेत नहीं मिल रहा है। इसकी वजह से कंपनियों को अपनी संपत्तियां बेचने को बाध्य होना पड़ रहा है। संपत्ति बिक्री से मिलने वाली नकदी का इस्तेमाल एनबीएफसी कर्ज चुकाने में कर रही हैं, विस्तार के लिए नए संसाधनों में उसका निवेश नहीं कर पा रही हैं। गुरुवार को केंद्रीय बैंक 5,000 करोड़ रुपये और उसके ऊपर की संपत्ति के आकार वाले एनबीएफसी को मुख्य जोखिम अधिकारी नियुक्त करने को कहा है। एनबीएफसी ने कहा है कि वे केंद्रीय बैंक को हर तिमाही में संपत्ति देनदारी रिपोर्ट दे रहे हैं और रिजर्व बैंक ने बमुश्किल ही मिलान की गड़बड़ी को लेकर कोई आपत्ति जताई है। इस क्षेत्र में ज्यादातर वित्तपोषण म्युचुअल फंड क्षेत्र से आता है, जिनकी हिस्सेदारी एनबीएफसी फंडिंग में आधे के करीब है। वहीं शेष धन बैंक ऋण से आता है। पिछले साल सितंबर में आईएलऐंडएफएस संकट के बाद इन दोनों स्रोतों से वित्तपोषण कम हुआ है।
 
एमएफ क्षेत्र से वित्तपोषण की कमी की भरपाई के लिए बैंक कुछ हद तक समर्थन दे रहे हैं और वे कार्यशील पूंजी ऋण मुहैया करा रहे हैं। रिजर्व बैंक के आंकड़ों से पता चलता है कि जनवरी के अंत में एनबीएफसी को बैंंक ऋण 5.58 लाख करोड़ रुपये था, जो एक साल पहले 3.76 लाख करोड़ रुपये था। हाल में रिलायंस होम फाइनैंस को डाउनग्रेड किए जाने से एनबीएफसी क्षेत्र पर नए सिरे से संदेह बढ़ा है। बहरहाल कुछ एनबीएपसी के अधिकारियों का कहना है कि मौजूदा स्थिति में बेहतर एनबीएफसी के लिए परेशानी नहीं है, लेकिन खराब तरीके से प्रबंधित एनबीएफसी संकट में हैं। 
 
सेंट्रम ग्रुप के कार्यकारी चेयरमैन जसपाल बिंद्रा ने कहा, 'एनबीएफसी की अर्थव्यवस्था में बहुत अहम भूमिका है, जो बैंक नहीं कर सकते हैं। दुखद पहलू यह है कि हर कोई सभी एनबीएफसी को एक ही नजरिये से देख रहा है। इसका परिणाम यह है कि ग्राहकों को झेलना पड़ रहा है और उन्हें जरूरी कर्ज नहीं मिल पा रहा है।'  मुख्य रूप से छोटे और मझोले उद्यमियों को कर्ज देने वाली अदाणी फिनसर्व के सीईओ गौरव गुप्ता ने कहा, 'हम उद्यमी बनाते हैं और उनकी मदद करते हैं, हम वित्तीय समावेशन करते हैं, हम उन जगहों पर पहुंचते हैं, जहां बैंक पहुंचने में सक्षम नहीं हैं। हम सही मायने में आर्थिक वृद्धि में योगदान देते हैं। इसके बावजूद हमारी गतिविधियों को शैडो बैंकिंग कहा जाता है। यह उचित नहीं है।' बैंकिंग व्यवस्था में नकदी की कमी बनी हुई है। बैंकों ने गुरुवार को केंद्रीय बैंक से 31,499 करोड़ रुपये उधारी ली। लेकिन एनबीएफसी में नकदी का संकट ज्यादा है।  
 
इनक्रेड के सीईओ भुपिंदर सिंह ने कहा, 'एनबीएफसी लगातार अपनी संपत्ति का आधार बढ़ा रहे हैं और बाजार हिस्सेदारी पा रहे हैं। बहरहाल देनदारी के मोर्चे पर म्युचुअल फंडों की ओर से मिलने वाला कर्त कम हुआ है, जो खासकर कुछ एनबीएफसी के एएलएम की वजह से है।'  सिंह ने कहा कि जहां कुछ बड़े एनबीएफसी को बैंकों का वित्तपोषण जारी रहै, वहीं छोटे कारोबारियों को जूझना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि माइक्रोफाइनैंस फर्मों के पास नकदी बनी होनी चाहिए, क्योंकि वे प्राथमिकता के क्षेत्र को वित्तपोषण करती हैं। सिंह ने कहा कि इनक्रेड ने हाल में पर्याप्त इक्विटी जुटाई है और वह इस संकट से प्रभावित नहीं हुई है। बैंक आफ इंडिया के एमडी और सीईओ दीनबंधु महापात्र ने कहा कि एनबीएफसी समाज में एनबीएफसी की अलग भूमिका है और रिजर्व बैंक व सरकार इस क्षेत्र को विफल नहीं होने देंगी। बहरहाल विशेषज्ञों का कहना है कि सरकार की ओर से  नई सरकार बनने और उसके जुलाई में पहला नया बजट पेश करने तक कोई खास राहत मिलने की संभावना नहीं है। 
Keyword: NBFC, bank, micro finance, RBI,
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