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दो दिन ठहरिए फिर जमकर दांव खेलिए

जयदीप घोष और संजय कुमार सिंह /  May 20, 2019

बंबई स्टॉक एक्सचेंज के संवेदी सूचकांक (सेंसेक्स) में सोमवार को 1,421 अंकों की जबरदस्त उछाल ने बाजार के खिलाडिय़ों और शेयर बाजार के निवेशकों के लिए मुश्किल खड़ी कर दी है। हालांकि एक दिन पहले आए एग्जिट पोल में केंद्र में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) की सरकार बरकरार रहने के अनुमान जताए गए थे, जिन्हें देखते हुए उछाल की उम्मीद तकरीबन हर किसी को थी।  मगर घाघ यानी चतुर निवेशकों के साथ छोटे निवेशक भी पिछले दो सत्रों में करीब 2,000 अंकों की तेजी से चक्कर में पड़ गए हैं। कई निवेशकों को यह सवाल परेशान कर रहा है कि मुनाफावसूली के लिए यह सही वक्त है या अभी कुछ देर और इंतजार करना चाहिए। निवेश सलाहकार अरुण केजरीवाल कहते हैं, 'पिछले दो सत्रों में अचानक जो तेजी आई है, उसका फायदा ज्यादातर छोटे निवेशक नहीं उठा पाए होंगे। लेकिन अफसोस न करें। यदि गुरुवार को नतीजे एग्जिट पोल जैसे ही रहते हैं तो बाजार और भी फर्राटा भरेगा। इसीलिए तब तक कोई दांव न खेलें।' केजरीवाल के मुताबिक उस समय मुनाफावसलूी के अच्छे खासे मौके मिलेंगे।

 
मगर मुनाफावसूली में जरूरत से ज्यादा उत्साह दिखाना भी ठीक नहीं रहेगा। एडलवाइस ऐसेट मैनेजमेंट की मुख्य कार्य अधिकारी राधिका गुप्ता का मशविरा है, 'लंबे समय के लिए निवेश करने वालों को छोटी अवधि के लिए दांव खेलने और मुनाफावसूली के फेर में सभी शेयर बेचने की जरूरत नहीं है। अगर आपने लंबी अवधि के लक्ष्य रखकर निवेश किया है तो शेयरों में पैसा डाले रहने में ही समझदारी है।' हालांकि संपत्ति आवंटन के हिसाब से थोड़ी-बहुत मुनाफावसूली करने में कोई बुराई नहीं है। राधिका को बड़ा खतरा इस बात का लग रहा है कि बाजार में ऐसा माहौल होने पर लोग असली तस्वीर की ओर से आंखें मूंद सकते हैं। निवेशकों के ज्यादा जोश में आने और जमकर बिकवाली करने का भी खतरा है। म्युचुअल फंड के निवेशक भी ऐसे मौकों पर संपत्ति आवंटन को बिसार सकते हैं। वह कहती हैं कि निवेशकों को जरूरत से ज्यादा शेयर नहीं खरीदने-बेचने चाहिए।
 
सिट्रस एडवाइजर्स के संस्थापक संजय सिन्हा कहते हैं, 'आज की लंबी छलांग की वजह यह भी हो सकती है कि इससे पहले लगातार आठ कारोबारी दिनों में बाजार रपट ही रहा था और पिछले हफ्ते के आखिर में ही उसमें तेजी आई थी। चूंकि गिरावट बहुत अधिक रही, इसलिए उछाल भी नाटकीय आई है।' ऐक्सिस म्युचुअल फंड के इक्विटी प्रमुख जिनेश गोपानी को लगता है, 'सिलसिला बना रहे तो बाजार खुश रहता है और एग्जिट पोल यही कह रहे हैं कि केंद्र सरकार फिर बहुमत से जीतेगी। इसकी वजह से शॉर्ट कवरेज भी हुई होगी। जो लोग किनारे बैठे मौके ताकते हैं, वे भी बाजार में रकम लगाने पहुंच गए होंगे।'
 
स्थिर सरकार की उम्मीद ने बाजार को भी खुश कर दिया है। लेकिन कुछ विशेषज्ञों को लगता है कि यह खुशी कुछ वक्त के लिए ही है। एक फंड प्रबंधक ने कहा, 'कई बार ऐसा दौर आता है, जब छोटे निवेशकों को फूंक-फूंककर कदम रखने चाहिए। अगर उनके पास मौजूद शेयर अच्छे मुनाफे में चल रहे हैं तो थोड़ी-बहुत मुनाफावसूली कर लेनी चाहिए।' उनकी नजर में मौजूदा उछाल की एक ही वजह है और वह है राजग की अच्छे खासे बहुमत के साथ सत्ता में लौटने की संभावना। लेकिन अर्थव्यवस्था की बुनियादी दिक्कतें जैसे खपत मांग में सुस्ती, एनबीएफसी संकट और दूसरे मसले खत्म नहीं हुए हैं।
 
फंड प्रबंधक ने निफ्टी का उदाहरण दिया। अगस्त 2013 में निफ्टी 5,400 अंकों पर था और 28 मई 2014 तक वह बढ़कर 7,330 अंक पर पहुंच गया। 12 फरवरी 2016 तक यानी करीब दो साल में निफ्टी लुढ़ककर 7,100 अंक पर था। उन्होंने कहा, 'अर्थव्यवस्था की दिक्कतें दूर करने के लिए सरकार को तुरंत कदम उठाने होंगे। अगर वह देर तक ठहरी रही तो हालात बद से बदतर हो जाएंगे।' बाजार चढ़ रहा हो तो छोटे निवेशकों के लिए बढिय़ा मौका होता है। लेकिन दो दिन रुकिए फिर दांव खेलिए।
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