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अक्षय ऊर्जा क्षेत्र पर नजर रखने के लिए पोर्टल

श्रेया जय / नई दिल्ली May 19, 2019

विद्युत क्षेत्र के लिए सर्वोच्च तकनीकी संस्था केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) ने अक्षय ऊर्जा से जुड़ी दैनिक गतिविधियों, क्षमता वृद्घि और ग्रिड समेकन पर नजर रखने के लिए एक या डिवीजन बनाया है। विद्युत मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा कि देश के ऊर्जा निर्माण में अक्षय ऊर्जा की बढ़ती भागीदारी को ध्यान में रखते हुए सीईए ने अक्षय ऊर्जा के बारे में दैनिक आंकड़ा पेश करने की योजना बनाई है, जैसा कि वह ताप, पनबिजली और कोयला-आधारित बिजली के लिए करती है।  सौर और पवन ऊर्जा के बारे में खाका तैयार करने के प्रयास में सीईए रिन्यूएबल एनर्जी मैनेजमेंट सेंटर्स (आरईएमसी) से डेटा जुटाएगा। ये आरईएमसी पूरे देश में स्थापित किए जा रहे हैं। ये प्रबंधन केंद्र आंकड़ा एकत्रित करेंगे, जिससे अक्षय ऊर्जा को ग्रिड से जोडऩे और क्षेत्र में ग्रिड बैलेंस बनाए रखने में मदद मिलेगी। सभी अक्षय ऊर्जा उत्पाद नियंत्रण परिचालन को एक मानकीकृत ढांचे के तहत लाने की इस तरह की यह पहली कोशिश है। 
 
हाई-टेंशन विद्युत लाइनों के जरिये बिजली सभी क्षेत्रों में मुहैया कराई जाती है। इन लाइनों का प्रबंधन बैक-ऐंड द्वारा किया जाता है। इस पूरे इन्फ्रास्ट्रक्चर में ग्रिड शामिल हैं जिनमें विद्युत स्रोत में कमी होने और इसका प्रवाह नियोजित तरीके से नहीं होने पर गड़बड़ी पैदा हो सकती है। सीईए ने वर्ष 2017 में संसाधन संपन्न राज्यों के साथ साथ दक्षिण, पश्चिम और उत्तरी क्षेत्रों में एक एक आरईएमसी स्थापित करने की योजना बनाई थी। पूरे देश में फिलहाल 11 आरईएमसी हैं। अधिकारियों का कहना है कि पश्चिम और दक्षिण आरईएमसी अच्छी तरह से काम कर रहे हैं और वे इनसे नियमित रूप से आंकड़े जुटाएंगे। आरईएमसी को अनुमान तथा शिड्यूलिंग प्रणालियां मुहैया कराने वालीबेंगलूरु स्थित आरईकनेक्ट एनर्जी ने कहा है कि ये केंद्र पवन और सौर ऊर्जा की बड़े पैमाने पर निकासी को आसान बनाएंगे।
 
विद्युत मंत्रालय के एक अधिकारी ने कहा, 'अक्षय ऊर्जा के सफल समेकन में एक प्रमुख बाधा वास्तविक और अनुमानित ऊर्जा उत्पादन में अंतर है। इससे पूरी प्रणाली का नियोजन प्रभावित होता है, जिसमें अक्षय ऊर्जा को संतुलित बनाए रखने के लिए ग्रिड में पारंपरिक ऊर्जा घटाना या बढ़ाना मुख्य रूप से शामिल है। आरईएमसी इन समस्याओं के समाधान में मददगार होंगे।' बड़े पैमाने पर अक्षय ऊर्जा की निकासी के लिए आरईएमसी सभी अक्षय ऊर्जा उत्पादकों के लिए नोडल पॉइंट के तौर पर काम करेंगे। 
 
भारत की मौजूदा अक्षय ऊर्जा क्षमता 78,316.39 मेगावॉट है जिसमें 35,625.97 मेगावॉट विद्युत और 26,384.30 मेगावॉट सौर क्षमता शामिल है। अधिकारियों का कहना है कि 1 मई को देश में कुल विद्युत उत्पादन में अक्षय ऊर्जा का योगदान 12 प्रतिशत पर था, जो एक रिकॉर्ड है।  नया डिवीजन अक्षय ऊर्जा के अनुमान एवं योजना निर्धारण का आंकड़ा भी उपलब्ध कराएगा, जो ग्रिड में इसके समेकन और मजबूत ऊर्जा मिश्रण के लिए जरूरी है। एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'सीईए के पास एक सब-पोर्टल पहले से ही है जो क्षेत्र, राज्य-वार और ईंधन के आधार पर क्षमता पर नजर रखता है। हमने इस पर अब पनबिजली, ताप और परमाणु ऊर्जा के साथ साथ अक्षय ऊर्जा को भी शामिल किया है।' 
Keyword: power, electric, solar,,
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