बिजनेस स्टैंडर्ड - आरबीआई की बैठक में उठेंगे अहम मुद्दे
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आरबीआई की बैठक में उठेंगे अहम मुद्दे

सोमेश झा / नई दिल्ली May 19, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) का केंद्रीय बोर्ड सोमवार से चेन्नई में दो दिवसीय बैठक के लिए तैयार है। पिछले साल दिसंबर में शक्तिकांत दास के गवर्नर बनने के बाद यह बोर्ड कई प्रमुख मुद्दों पर चर्चा करने जा रहा है। आरबीआई के सूत्रों के अनुसार इन चर्चाओं में फंसे कर्ज के समाधान के लिए संशोधित मानकों से लेकर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) के लिए नियामकीय मानकों को सख्त बनाना आदि मुख्य रूप से शामिल हैं।  दास के नेतृत्व में आरबीआई का केंद्रीय बोर्ड पिछले साल 12 फरवरी को जारी केंद्रीय बैंक के सर्कुलर को सर्वोच्च न्यायालय द्वारा ठुकराए जाने के संदर्भ में संशोधित नियमों की रूपरेखा पर बातचीत करेगा। यह सर्कुलर फंसे कर्ज की पहचान और समाधान से संबंधित था। 
 
आरबीआई का यह सर्कुलर 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के बड़े कर्जदारों से संबंधित था और इसमें बैंकों को ऋण अदायगी में एक दिन के विलंब को भी चूक के तौर पर शामिल करना और एनपीए खाता 180 दिन के अंदर दिवालिया प्रक्रिया के लिए भेजना अनिवार्य किया गया था।  आरबीआई के नए सर्कुलर की जानकारियों से अवगत एक अधिकारी ने कहा, 'शुरुआती पहचान बैंकों के लिए महत्वपूर्ण है। जेट एयरवेज मामले से सबसे बड़ा सबक यह मिला है कि ऋणदाताओं को चुस्ती दिखाने की जरूरत होगी, अन्यथा समाधान प्रक्रिया अनिश्चित हो जाएगी। बोर्ड बैठक में इन सभी मुद्दों पर चर्चा होगी।' 
 
आरबीआई ने अपने केंद्रीय बोर्ड के साथ चर्चा किए बगैर पिछले साल 12 फरवरी को सर्कुलर जारी किया था। इससे केंद्र सरकार ने नाराजगी जताई थी और इससे आरबीआई एवं वित्त मंत्रालय के बीच कुछ हद तक टकराव की स्थिति को बढ़ावा मिला था। आरबीआई का केंद्रीय बोर्ड एनबीएफसी सेक्टर के लिए सख्त नियमों पर भी चर्चा करेगा। इस क्षेत्र को नकदी संकट, परिसंपत्तियों और देनदारियों के बीच भारी असंतुलन जैसी समस्याओं से जूझना पड़ रहा है।  आरबीआई मौजूदा समय में नरम नियमों के साथ एनबीएफसी को नियंत्रित करता है। अधिकारी ने कहा, 'लेकिन एनबीएफसी के बीच पैदा हुए ताजा संकट से आरबीआई ने यह महसूस किया है कि इस क्षेत्र के लिए नरम नियम कारगर नहीं होंगे।' 
 
आरबीआई का केंद्रीय बोर्ड जनवरी 2018 में पंजाब नैशनल बैंक (पीएनबी) में हुई धोखाधड़ी जैसे मामलों की आशंका को टालने के प्रयास में बैंकों के लिए सख्त निगरानी के बारे में भी चर्चा करेगा।  नीरव मोदी और मेहुल चोकसी से जुड़ी कई कंपनियों द्वारा पीएनबी में हुई 14,000 करोड़ रुपये से अधिक की कथित धोखाधड़ी के बाद आरबीआई ने वाई एच मालेगाम के नेतृत्व में एक विशेषज्ञ समिति गठित की थी। इस समिति का मकसद आरबीआई की निगरानी व्यवस्था की तुलना में बैंकों द्वारा परिसंपत्ति वर्गीकरण और प्रावधानों में दर्ज किए गए भारी अंतर पर विचार करना है।  अधिकारी ने कहा कि समिति की रिपोर्ट पर आरबीआई बोर्ड द्वारा चर्चा की जाएगी।
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