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ल्यूपिन : देसी बाजार में कमजोर बिक्री

उज्ज्वल जौहरी /  May 19, 2019

वित्त वर्ष 2019 की चौथी तिमाही में ल्यूपिन का उम्मीद से कमजोर प्रदर्शन बाजार के उत्साह पर पानी फेर गया। नतीजे के बाद बुधवार को कंपनी का शेयर 3.2 प्रतिशत फिसल गया। बाजार की चिंताएं केवल यहीं तक सीमित नहीं हैं। दुनिया के सबसे बड़े दवा बाजार अमेरिका में भारतीय दवा कंपनियां कथित तौर पर आपसी मिली-भगत से कीमतें बढ़ाने के आरोपों से जूझ रही हैं। 

 
भारत में कमजोर कारोबार 
 
उत्तरी अमेरिका में ल्यूपिन की बिक्री (राजस्व का 40 प्रतिशत) सालाना आधार पर 16.1 प्रतिशत और क्रमागत आधार पर 22.8 प्रतिशत की दर से बढ़ी, जो उत्साहजनक  है। अमेरिकी बाजार में विशेष रूप से उतारी गईं दवाओं का इसमें अहम योगदान रहा है। हालांकि घरेलू बाजार में बिक्री उम्मीद से कम रहने से राजस्व के मोर्चे पर निराशा हाथ लगी है। घरेलू बिक्री कंपनी के कुल राजस्व में 29 प्रतिशत योगदान देती है। सालाना आधार पर इसमें 9.1 प्रतिशत वृद्धि जरूर हुई, लेकिन क्रमागत आधार पर इसमें 11.6 प्रतिशत की गिरावट आई। वैसे घरेलू बिक्री के लिहाज से चौथी तिमाही कमजोर रहती है, लेकिन मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के विश्लेषकों को सालाना आधार पर इसमें 16 प्रतिशत तेजी आने की उम्मीद थी। कंपनी का कुल राजस्व सालाना आधार पर 8.7 प्रतिशत वृद्धि के साथ 4,326 करोड़ रुपये रहा, लेकिन क्रमागत आधार पर यह 1.2 प्रतिशत कमजोर रहा। यह आंकड़ा विश्लेषकों के अनुमान 4,437 करोड़ रुपये से कम रहा। अमेरिका में चौथी तिमाही में हृदय रोग के इलाज में इस्तेमाल होने वाली दवा रेनेक्सा और कुछ अन्य दवाओं से सालाना आधार पर ल्यूपिन का मुनाफा मार्जिन 70 आधार अंक बढ़ गया। सालाना आधार पर 12.3 प्रतिशत वृद्धि के साथ कंपनी का परिचालन मुनाफा 949 करोड़ रुपये रहा। ब्याज पर खर्च और कराधान के मद में अधिक भुगतान से शुद्ध मुनाफे पर असर पड़ा। कंपनी का शुद्ध मुनाफा 287 करोड़ रुपये के साथ ब्लूमबर्ग के 428 करोड़ रुपये के अनुमान से कम रहा। 
 
चिंताएं बरकरार
 
दिसंबर तिमाही के प्रदर्शन से लग रहा है कि अमेरिकी बाजार में कीमतों को लेकर दबाव कुछ कम हो सकता है। अमेरिकी बाजार में कारोबार सतत रूप में बरकरार रखने के लिए कंपनी को बड़े उत्पादों के लिए मंजूरी हासिल करनी होगी। छह महीने में रेनेक्सा बेचने का कंपनी का विशेष अधिकार जल्द ही समाप्त हो जाएगा और इससे प्रतिस्पद्र्धा बढ़ जाएगी। कंपनी ने श्वास रोग संबंधी दवा अलब्यूटेरॉल इन्हेलर और कुछ अन्य दवाएं उतारने की योजना बनाई है। हालांकि  विश्लेषकों का कहना है कि वित्त वर्ष 2020 की दूसरी छमाही से पहले इनके बाजार में आने की उम्मीद कम ही है। आईडीबीआई कैपिटल के रणवीर सिंह का कहना है कि वह शेयर को लेकर फिलहाल तटस्थ है। 
 
नियामकीय चिंताएं भी बरकरार हैं, क्योंकि कंपनी को गोवा एवं पीथमपुर यूनिट-2 पर अमेरिकी खाद्य एवं दवा प्रशासन (यूएसएफडीए) के चेतावनी पत्र का सामना करना पड़ रहा है। इसी तरह, समरसेट (अमेरिका ) और मंडीदीप संयंत्र-1 से जुड़े विवाद भी सुलझाने हैं। इन संयंत्रों से जुड़े विवाद सुलझने के बाद अमेरिका में कंपनी को नए उत्पादों की मंजूरी मिल सकती है। विश्लेषकों को आशा है कि अब ये विवाद और नहीं गहराएंगे। शेयरखान की पूर्वी शाह कहती हैं, 'ल्यूपिन को चार विनिर्माण संयंत्रों में यूएसएफडीए से मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। इस वजह से दवाओं को मंजूरी में देरी हो रही है।' शाह का मानना है कि कंपनी को इन चुनौतियों से निपटने में थोड़ा समय लग सकता है। उन्होंने शेयर पर 'रिड्यूस' रेटिंग दी है।  अमेरिका में कथित तौर पर आपसी समन्वय से दवाएं की कीमतें तय करने के आरोप में ल्यूपिन सहित अन्य 6 भारतीय दवा कंपनियां मुकदमें का सामान कर रही हैं। कंपनी ने कहा है कि उसने सभी कानूनों और कारोबारी मानकों का अनुपालन किया है। हालांकि इस मुकदमे के परिणाम को लेकर फिलहाल कुछ नहीं कहा जा सकता है। जेएम फाइनैंशियल के विश्लेषकों का कहना है कि देनदारी तय होने तक जांच आदि कर्ई वर्षों तक जारी रह सकती है, लेकिन कोई निष्कर्ष पहले आता है तो इससे संबंधित दवा कंपनियों को खासा झटका लगेगा। पिछले कुछ वर्षों से कीमतों के मोर्चे पर भारतीय दवा कंपनियों ने कुई चुनौतियों का सामना किया है और अब मूल्यों पर कड़े रुख से अमेरिका में उनकी मुश्किलें और गहरा सकती हैं। 
Keyword: lupin, pharma,,
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