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टाटा स्टील: यूरोप में विफल सौदे का दर्द दूर करेगा भारतीय करोबार

उज्ज्वल जौहरी /  May 19, 2019

यूरोप में टाटा स्टील यूरोप (टीएसई) और टिसेनक्रुप के बीच संयुक्त उद्यम स्थापित करने की टाटा स्टील की योजना सफल नहीं हो पाई। जाहिर है, इससे चिंताएं भी उठनी स्वाभाविक हैं। अगर दोनों इकाइयों के बीच संयुक्त उद्यम की योजना परवान चढ़ती तो टाटा स्टील को कर्ज कम करने में आसानी होती, साथ ही यूरोपीय क्षेत्र में कारोबारों को मिल रही चुनौतियों के मद्देनजर टीएसई के लिए संभावनाएं भी बेहतर होतीं। यह पहल असफल रहने से टाटा स्टील का शेयर लुढ़क गया और गत सोमवार को भी गिरावट जारी रही शेयर में 3.2 प्रतिशत कमी देखी गई।  टाटा स्टील ने 2007 में यूरोप में कोरस (अब टीएसई) का अधिग्रहण किया था, लेकिन इसके बाद कंपनी के सामने चुनौतियों की कतार लग गई। लीमन संकट, यूरोप में मंदी से मांग और प्राप्तियों में कमी और इस क्षेत्र में सस्ता आयात बढऩे से कंपनी के मुनाफे पर असर हुआ है। वैसे टाटा स्टील ने यूरोप में अपने परिचालन की पुनर्संरचना जारी रखी, लेकिन यूरोप की अग्रणी इस्पात कंपनी टिसेनक्रुप के साथ संयुक्त उद्मम की पहल के बाद टीएसई के लिए संभावनाएं बेहतर जरूर लगने लगी थीं। पहली फायदा तो यह होता कि विलय से टीएसई पर 20,000 करोड़ रुपये कर्ज संयुक्त उद्यम में स्थानांतरित हो जाता, साथ ही और भी कई फायदे मिलते। अब विलय के लिए यूरोपीय आयोग की शर्तें पूरी नहीं कर पाने के कारण संयुक्त उद्यम की उम्मीदों पर पानी फिर गया है।

 
टीएसई के लिए यह एक झटका माना जा सकता है, हालांकि कंपनी ने कुछ बदलाव की ओर भी कदम बढ़ाए हैं। कई मुनाफा नहीं देने वाले परिचालनों से बाहर आने से यूरोप में कंपनी की क्षमता 1.8 करोड़ टन से कम होकर 1 करोड़ टन रह गई है। यूनाइटेड किंगडम में 30 लाख टन क्षमताओं से संबंधित पेंशन फंड मुद्दों का समाधान निकल चुका है, लेकिन ईंधन पर लागत बढऩे और कुछ कारणों से इसके प्रदर्शन पर असर पड़ा है।  हालांकि टीएसई को नकदी के लिहाज से परिचालन जल्द पटरी पर आने की उम्मीद है, लेकिन वैश्विक स्तर पर व्यापार पर चल रही उठापटक और यूरोप में मांग सुस्त होने से मुनाफा एवं नकदी प्रवाह के मोर्चों पर चुनौतियां बरकरार हैं। मोतीलाल ओसवाल सिक्योरिटीज के विश्लेषकों का कहना है कि मांग में कमी और कच्चे माल की कीमतें बढऩे से यूरोपीय संघ में इस्पात कारोबार घटकर आधा रह गया है। विश्लेषकों का मानना है कि वित्त वर्ष 2020 में टीएसई का मुनाफा 60 डॉलर प्रति टन (वित्त वर्ष 2019 में 85 डॉलर) रह सकता है। संतोषजनक मुनाफा बरकरार रखने के साथ ही टीएसई को पूंजीगत व्यय और कर्ज का ध्यान भी रहना होगा।  एडलवाइस ने अपने अनुमान में कहा, 'टीएसई को परिचालन के लिए 30 करोड़ डॉलर की जरूरत है, जबकि कर्ज पर ब्याज करीब 12.5 करोड़ डॉलर ब्याज बनता है। इस लिहाज से कंपनी को 45 करोड़ डॉलर परिचालन मुनाफा अर्जित करना होगा।'
 
भारतीय कारोबार से बल
 
टीएसई के प्रदर्शन पर लोगों की नजर लगातार बनी रहेगी, लेकिन भारत में टाटा स्टील का कारोबार शानदार रहा है और इससे खासी मदद मिल रही है। कंपनी का लगभग दो तिहाई कारोबार भारत में है और शानदार मुनाफा अर्जित कर रहा है, साथ ही नकदी प्रवाह भी ठीक रहा है। वित्त वर्ष 2019 के अंत में टाटा स्टील ने 29,770 करोड़ रुपये का कर, ब्याज आदि पूर्व (ईबीआईटीडीए) संचयी आय दर्ज की है, जबकि इस पर शुद्र्ध कर्ज 94,879 करोड़ रुपये रहा। टीएसई का परिचालन लाभ वित्त वर्ष 2019 में 5,414 करोड़ रुपये (सालाना आधार  पर 45.8 प्रतिशत) रहा, जबकि 2014 के 3 अरब डॉलर के मुकाबले कर्ज 2.2 अरब डॉलर रहा। इन सभी बातों को ध्यान में रखते हुए विश्लेषकों का रवैया सतर्क लेकिन सकारात्मक है। एडलवाइस के विश्लेषकों का कहना है कि टाटा स्टील के घरेलू कारोबार को लेकर वे उत्साहित हैं और उनके अनुसार वित्त वर्ष 2021 में परिचालन लाभ 11,500 से 12,000 करोड़ रुपये रह सकता है। हालांकि संयुक्त उद्यम आगे नहीं बढऩे से उन्होंने शेयर की रेटिंग कम कर इसे 'न्यूट्रल' और लक्ष्य मूल्य 600 रुपये से घटाकर 520 रुपये कर दिया है।
 
आईडीएफसी सिक्योरिटीज का कहना है कि तेजी से बढ़ते और मुनाफा देने वाले भारतीय परिचालन के लिए योजनाओं पर कोई असर नहीं पड़ा है। विश्लेषकों ने कहा कि उनके लिए वित्त वर्ष 2020 के लिए 3.2 गुना कर्ज/परिचालन लाभ अनुपात चिंता का विषय नहीं है, क्योंकि घरेलू परिचालन से वित्त वर्ष 2020 के परिचालन लाभ में 85 प्रतिशत हिस्सा प्राप्त होने की उम्मीद है। उन्होंने लक्ष्य मूल्य 635 रुपये रखा है। जेएम फाइनैंशियल ने भूषण स्टील में आई तेजी, भारतीय कारोबार के अधिक महत्त्व रखने और कच्चे माले में तेजी के बाद कीमतें बढऩे से शेयर का मूल्यांकन 615 रुपये तय किया है। कुल मिलाकर बाजार टीएसई के प्रदर्शन और कर्ज कम करने एवं अधिक नकदी सृजित करने पर बाजार की नजरें बनी रहेंगी। टाटा स्टील ने कहा है कि टीएसई के लिए दूसरी साझेदारी तलाशने का विकल्प खुला है। इस मोर्चे पर प्रगति हुई तो कंपनी के लिए यह सकारात्मक होगी।
Keyword: tata steel, thyssenkrupp,
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