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डिजिलॉकर के दस्तावेज मूल जितने वैध

तिनेश भसीन /  May 19, 2019

अगली बार जब कोई पुलिसकर्मी सड़क पर आपको रोककर लाइसेंस या कार के दूसरे कागजात दिखाने के लिए कहे तो आप कागजों का पुलिंदा निकालने के बजाय केवल अपना फोन निकालिए। फोन में वह ऐप खोलकर उसे दिखा दें, जिसमें लाइसेंस, वाहन के पंजीकरण का कागज (आरसी), बीमा और दूसरे दस्तावेज आदि रखे हों। अगर ऐसा हो तो कैसा रहेगा? जाहिर है कि आपके लिए बड़ी सहूलियत हो जाएगी। हिचकिए नहीं। अब इन्हें असली दस्तावेजों की स्कैन की गई प्रतियां भर नहीं माना जा रहा है बल्कि इन्हें भी कानूनन असली दस्तावेज ही माना जाता है और यह सहूलियत मिली है डिजिलॉकर की वजह से। 

 
सरकार ने कुछ अरसा पहले एक अधिसूचना जारी की थी। इसमें कहा गया था कि अगर वाहन से संबंधित कागजात की डिजिटल प्रतियां डिजिलॉकर में स्टोर कर दी गई हैं तो कानून के हिसाब से उन्हें असली कागजात ही माना जाएगा और स्वीकार किया जाएगा। डिजिलॉकर डीमैट खाते के समान है। डीमैट खाते में शेयर कागजों के रूप में नहीं होते बल्कि डिजिटल स्वरूप में होते हैं। डिजिलॉकर का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति विभिन्न विभागों से डिजिटल रूप में दस्तावेज ले सकता है और उन्हें लॉकर में इक_ïा कर सकता है। इस समय 17 सरकारी विभाग डिजिटल रूप में दस्तावेज जारी कर रहे हैं। आप स्थायी खाता संख्या (पैन) कार्ड, आधार कार्ड कार्ड, वाहन फिटनेस प्रमाणपत्र, वाहन कर की रसीद, 10वीं और 12वीं की अंकतालिका, ड्राइविंग लाइसेंस, जाति प्रमाण-पत्र, राशन कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, कॉलेज डिग्री एवं डिप्लोमा, विवाह प्रमाणपत्र आदि को डिजिटल रूप में प्राप्त कर सकते हैं। डिजिलॉकर आपके दस्तावेजों के लिए आभासी यानी वर्चुअल संदूक का काम तो करता ही है, ऑनलाइन केवाईसी (अपने ग्राहक को जानिए) के लिए भी उसका जमकर इस्तेमाल हो रहा है। उदाहरण के लिए ऐंजल ब्रोकिंग, एडलवाइस ब्रोकिंग और जीरोधा ने डिजिलॉकर में 'रिक्वेस्टर' के रूप में अपना पंजीकरण करा रखा है। जब कोई ग्राहक इन स्टॉक ब्रोकरों के पास खाता खुलवाने जाते हैं तो वे डिजिलॉकर का इस्तेमाल कर अपना ऑनलाइन केवाईसी पूरा कर सकते हैं। इसी तरह बैंकबाजार और फंड्सटाइगर किसी भी ग्राहक को कर्ज देते समय केवाईसी के लिए डिजिलॉकर का इस्तेमाल करती हैं। डिजिलॉकर के परियोजना निदेशक देवव्रत नायक बताते हैं, 'हम डिजिलॉकर के इस्तेमाल का दायरा बढ़ाने की जुगत में लगे हुए हैं। इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य क्षेत्र में किया जा सकता है, जहां इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति स्वास्थ्य और चिकित्सा से जुड़े अपने सभी दस्तावेज लॉकर में अपलोड कर देंगे और इलाज करने वाला अस्पताल चिकित्सा का पूरा ब्योरा वहीं से ले लेगा।'
 
नायक बताते हैं कि डिजिलॉकर का इस्तेमाल कई अन्य तरीकों से भी किया जा सकता है। अगर कोई छात्र प्रवेश के लिए आवेदन करता है तो विश्वविद्यालय डिजिलॉकर से उस छात्र की अंकतालिकाएं मांग सकते हैं। कई ऐसे नियोक्ता हैं, जो किसी भी कर्मचारी की नियुक्ति के बाद यही पता लगाने में करीब 5,000 रुपये खर्च कर देते हैं कि उसके सभी दस्तावेज असली हैं या नहीं। अब इतनी रकम खर्च करने के बजाय वे डिजिलॉकर से मूल दस्तावेज मांग सकते हैं, जिससे उनकी मोटी रकम बच जाएगी। अगर कोई शख्स नया कारोबार शुरू करने जा रहा है तो कंपनी मामलों का मंत्रालय डिजिलॉकर से ही उसके दस्तावेज मंगा सकता है और उनकी जांच कर सकता है। इसका मकसद कागजी कार्रवाई में कमी लाना और प्रक्रिया को तेज बनाना है। डिजिलॉकर का इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति खुद भी अपने दस्तावेजों को स्कैन और अपलोड कर सकता है। डिजिलॉकर यूजर्स को अपने दस्तावेज स्कैन करने और अपलोड करने की भी सहूलियत देता है। यह सेवा मुफ्त है और इसमें 1 गीगाबाइट (जीबी) तक जगह मिलती है। लेकिन इस्तेमाल करने वाला 10 मेगाबाइट (एमबी) से कम आकार का दस्तावेज ही अपलोड कर सकता है।
 
पहले डिजिलॉकर में एक खास सुविधा भी मिलती थी, जिसमें तक का स्पेस मिलता है। यूजर द्वारा अपलोड किए जाने वाले दस्तावेज 10 एमबी से कम के होने चाहिए। इससे पहले डिजिलॉकर एक अन्य सुविधा मुहैया कराता था, जिसमें इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति दस्तावेज को अपलोड कर सकता था और आधार पर आधारित इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर उन्हें खुद ही सत्यापित भी कर सकता था। नायक समझाते हैं, 'किसी भी दस्तावेज को कानूनी रूप से वैध बनाने के लिए व्यक्ति की पहचान उसके साथ जोडऩा उसी तरह जरूरी है, जैसे कागजों पर दस्तखत किए जाते हैं। डिजिटल हस्ताक्षर हासिल करने में कुछ रकम खर्च करनी पड़ती है, लेकिन डिजिलॉकर इस्तेमाल करने वाले को आधार के जरिये बेहद कम खर्च में अपनी पहचान जोडऩे का मौका मिल जाता है।' लेकिन जब से आधार के इस्तेमाल पर सर्वोच्च न्यायालय का फैसला आया है तब से डिजिलॉकर पर यह सेवा मुहैया नहीं कराई जा रही है। बहरहाल किसी भी दस्तावेज पर ई-हस्ताक्षर करना अब भी मुमकिन है। लेकिन यह काम अब पहले जितना आसान नहीं रह गया है और इसके लिए खासे पापड़ बेलने पड़ते हैं।कुछ विभाग अभी तक डिजिलॉकर के साथ नहीं जुड़े हैं। इनमें विदेश मंत्रालय और निर्वाचन आयोग शामिल हैं। यह दिक्कत की बात है क्योंकि विदेश मंत्रालय पासपोर्ट जारी करता है और निर्वाचन आयोग मतदाता पहचान पत्र जारी करता है। इनके डिजिलॉकर के साथ नहीं जुडऩे की वजह यह है कि हरेक मंत्रालय के सूचना साझा करने के अपने-अपने पैमाने होते हैं। 
 
बहरहाल डिजिलॉकर में अपना खाता खोलना यानी साइन अप करना बेहद आसान है। आप मोबाइल नंबर के जरिये साइन अप कर सकते हैं, लेकिन किसी भी विभाग से दस्तावेज मांगने के लिए आपके पास आधार जरूर होना चाहिए। उसके बाद आप सरकारी विभागों से दस्तावेज जारी करने के लिए कह सकते हैं और खुद भी दस्तावेज अपलोड कर सकते हैं। मिसाल के तौर पर आप चाहें तो अपनी वसीयत भी डिजिलॉकर में रख सकते हैं। मगर वकील और अंतरराष्ट्रीय साइबर कानून एवं साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ प्रशांत माली सतर्कता बरतने की ताकीद करते हुए कहते हैं, 'याद रखें कि इलेक्ट्रॉनिक हस्ताक्षर वाली वसीयत को प्रामाणिक दस्तावेज नहीं माना जाएगा क्योंकि वह कानूनी रूप से मान्य नहीं होती।' अगर डिजिलॉकर इस्तेमाल करने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है और उसका परिवार उसके डिजिलॉकर को देखना चाहता है तो उसके वारिसों को उत्तराधिकार प्रमाणपत्र हासिल करना पड़ेगा। इसके बाद वे डिजिलॉकर के पास खाते के इस्तेमाल की दरख्वास्त डाल सकते हैं।
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