बिजनेस स्टैंडर्ड - शिक्षा ऋण और बचत में कौन बेहतर?
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शिक्षा ऋण और बचत में कौन बेहतर?

सरबजीत सेन /  May 19, 2019

कॉलेजों खासकर ज्यादा महंगे प्रबंधन कोर्स में दाखिले की प्रक्रिया शुरू होने वाली है। कई अभिभावकों के सामने यह दुविधा है कि फीस और दूसरे खर्चों को भरने के लिए उन्हें शिक्षा ऋण लेना चाहिए या अपनी बचत का इस्तेमाल करना चाहिए। इसका जवाब मुश्किल है। खासकर अगर बच्चा पढऩे के लिए विदेश जा रहा हो तो कोर्स और संस्थान की फीस इतनी अधिक होती है कि नौकरी करने वाले अभिभावकों के पास ऋण लेने के अलावा कोई चारा नहीं होता। लेकिन कई माता-पिता चाहते हैं कि उनके बच्चे की करियर की शुरुआत ऋण से न हो। 

 
इनक्रेड के संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी भूपिंदर सिंह कहते हैं, 'इसमें सबसे अहम बात यह है कि उस कोर्स की भविष्य में मांग पर विचार किया जाए जिसके लिए ऋण लिया जा रहा है। ऐसा इसलिए है क्योंकि हर ऋण देनदारी है और अपने क्रेडिट इतिहास को दुरुस्त रखने के लिए आपको इसका भुगतान करना जरूरी है। अगर आप योजना के साथ चलें तो आप यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि आप पर और आपके बच्चे पर भविष्य में कोई वित्तीय बोझ न पड़े।' आईआईटी/आईआईएम या किसी जाने माने विदेशी विश्वविद्यालय में दाखिले के लिए शिक्षा ऋण पाना आसान है और बैंक बेहतर शर्तों पर ऋण देते हैं।
 
हालांकि ऋण बहुत सस्ते नहीं होते हैं। शिक्षा ऋण केवल ट्यूशन फीस तक ही सीमित नहीं होता है बल्कि इसमें रहने की लागत, पुस्तकालय की फीस, किताबें, परीक्षा फीस और यात्रा लागत भी शामिल हो सकती है। इसमें कोर्स के लिए जरूरी दूसरी अहम लागत भी शामिल होंगी जैसे लैपटॉप या उपकरण खरीदने का खर्च या शिक्षा टूर आदि। फ्लोटिंग रेट लोन में ब्याज की दर 9 से 15 फीसदी तक हो सकती है। यह बैंक, कोर्स, संस्थान और ऋण की राशि पर निर्भर करता है। नौकरी मिलने के बाद इस ऋण के पुनर्भुगतान की जिम्मेदारी छात्र की है।
 
बैंकबाजार.कॉम के मुख्य कार्याधिकारी आदिल शेट्टïी ने कहा, 'अमूमन शिक्षा ऋण का पुनर्भुगतान नौकरी मिलने के छह महीने या कोर्स पूरा होने के एक साल बाद शुरू होता है। ऋण स्थगन की अवधि के दौरान बकाया ब्याज को मूलधन में जोड़ा जाता है और इस तरह मासिक किस्त तय की जाती है। ऋण स्थगन के दौरान आप केवल उपार्जित ब्याज का ही भुगतान कर सकते हैं। बाद में मासिक किस्त को कम रखने के लिए ऐसा किया जा सकता है।' आपको शिक्षा ऋण लेना चाहिए या बचत का इस्तेमाल करना चाहिए? इस बारे में हर व्यक्ति का फैसला अलग-अलग हो सकता है। यह व्यक्ति की वित्तीय क्षमता पर निर्भर करता है। लेकिन अगर संस्थान का प्लेसमेंट का रिकॉर्ड बहुत अच्छा है या आपका बच्चा ऐसा कोर्स कर रहा है जिसकी भारी मांग है तो ऋण लेने में कोई बुराई नहीं है। इस बात का भी ध्यान रखा जाना चाहिए कि कहीं इससे आपकी बचत पर प्रतिकूल असर तो नहीं पड़ रहा है। या कहीं आपको भविष्य में पैसे की कमी हो नहीं हो जाएगी। ऐसी स्थिति में शिक्षा ऋण लेने में ही भलाई है।
 
हालांकि शिक्षा ऋण लेने के कुछ फायदे भी हैं। माईलोनकेयर के सह संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी गौरव गुप्ता ने कहा, 'इससे आपके परिवार पर अचानक पडऩे वाला वित्तीय बोझ कम होता है और आपको अपने माता-पिता पर निर्भर होने के बजाय अपनी वित्तीय स्थिति संभालने का मौका मिलता है। इससे आपको अपनी शिक्षा के साथ किसी तरह का संभावित समझौता भी नहीं करना पड़ता है क्योंकि यह न केवल आपकी कोर्स फीस को कवर करता है बल्कि इसमें परीक्षा फीस, छात्रावास फीस, लैब फीस, किताबों आदि पर खर्च भी शामिल होता है।'
 
शिक्षा ऋण लेने का एक फायदा यह भी होता है कि इससे आपको कर लाभ मिलता है। भूपिंदर सिंह ने कहा, 'उच्च शिक्षा के लिए शिक्षा ऋण लेने के कई फायदे हैं। अगर कोई परिवार खुद ही अपने बच्चे की पढ़ाई का खर्च वहन करने में सक्षम है तब भी उसे शिक्षा ऋण लेना चाहिए। इससे छात्र को जिम्मेदारी उठाने में मदद मिलती है और साथ ही शिक्षा ऋण पर चुकाई गई ब्याज आय कर कानून की धारा 80ई के तहत छूट मिलती है। इसके अलावा इससे आपका क्रेडिट इतिहास बनता है। इससे छात्र पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी शुरू करता है तो वित्तीय उत्पादों तक उसकी पहुंच आसान हो जाती है।' अगर आप अपनी जेब से बच्चे की उच्च शिक्षा का खर्च वहन करते हैं तो इससे आपकी जेब पर प्रतिकूल असर पड़ेगा लेकिन बच्चा किसी कर्ज के बिना अपना करियर शुरू करेगा।
 
Keyword: education, school, college, loan, bank,,
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