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प्रवर्तकों के पास इनकार का पहला हक

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली May 17, 2019

इंडिगो के प्रवर्तक राहुल भाटिया और राकेश गंगवाल में से अगर कोई एक कंपनी में अपने शेयरों को किसी तीसरे पक्ष को स्टॉक एक्सचेंजों के अलावा किसी और जरिये से बेचने का फैसला करता है तो उनके पास केवल 9 नवंबर, 2019 तक इनकार करने का पहला अधिकार है। शेयरधारिता करार और आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन के मुताबिक इस समयसीमा के खत्म होने के बाद दोनों प्रवर्तक बिना किसी पाबंदी के अपने शेयर किसी भी तीसरे पक्ष को बेचने के लिए स्वतंत्र हैं, जब तक समझौते पर फिर से काम नहीं होता। सूत्रों के मुताबिक दोनों पक्ष अपने कानूनी सलाहकारों के लिए जरिये शेयरधारिता समझौते में संभावित बदलावों पर चर्चा कर रहे हैं। भाटिया ने जेएसए लॉ और गंगवाल ने खेतान ऐंड कंपनी को अपना कानूनी सलाहकार बनाया है। 
 
ताजा आंकड़ों के मुताबिक 31 मार्च, 2019 को आईजीई समूह (राहुल भाटिया एवं परिवार) की 38.26 फीसदी और आरजी समूह (गंगवाल परिवार और उनके ट्रस्ट तथा जेपी मॉर्गन ट्रस्ट कंपनी) की 36.68 फीसदी हिस्सेदारी थी। कंपनी की बाकी हिस्सेदारी सावर्जनिक, म्युचुअल फंडों, विदेशी संस्थानों, वित्तीय संस्थानों और अन्य पास है।  आर्टिकल्स ऑफ एसोसिएशन, 23 अप्रैल 2015 में शेयरधारिता करार और 17 सितंबर, 2015 में संशोधित करार के मुताबिक आईजीई और आरजी समूह को इनकार का पहला हक दिया गया है। दस्तावेज के कहा गया है कि आईजीई और आरजी समूह इस अधिकार का इस्तेमाल आईपीओ के चार साल बाद यानी 8 नवंबर, 2019 तक कर सकते हैं। 
 
शेयरधारक करार के मुताबिक आईजीई समूह इंडिगो में तीन गैर स्वतंत्र निदेशक नामांकित कर सकता है जबकि आरजी समूह को एक गैर स्वतंत्र निदेशक नियुक्त करने का अधिकार है। हालांकि दोनों समूहों का एक निदेशक नॉन रिटायरिंग निदेशक बन सकता है। आईजीई समूह के पास कंपनी के शीर्ष अधिकारी बोर्ड चेयरमैन, मुख्य कार्याधिकारी, प्रबंध निदेशक और प्रेजिडेंट नियुक्त करने का अधिकार है। हालांकि प्रबंध निदेशक की नियुक्ति के लिए शेयरधारकों से मंजूरी लेनी होगी और मुख्य कार्याधिकारी या प्रेजिडेंट की नियुक्ति के लिए बोर्ड से मंजूरी लेनी होगी। माना जा रहा है कि संभावित बदलावों को लेकर कानूनी सलाहकारों के बीच चल रही चर्चा में इस व्यवस्था पर भी विचार हो सकता है। इंडिगो के एक प्रवक्ता ने इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी। अलबत्ता, विश्लेषकों का कहना है कि आईपीओ के बाद दोनों प्रवर्तकों ने अपना हिस्सा बेचने की कोई कोशिश नहीं की।
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