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एयरसेल मामले में बैंकों को 99 फीसदी की चपत

देव चटर्जी / मुंबई May 17, 2019

 मोबाइल ऑपरेटर एयरसेल के मामले में ऋणदाताओं को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। अप्रत्याशित कदम उठाते हुए ऋणदाता एयरसेल पर अपने 20,000 करोड़ रुपये बकाये को महज 150 करोड़ रुपये के अग्रिम भुगतान पर निपटान को सहमत हो गए हैं। यूवी ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी (एआरसी) ने एयरसेल के लिए 150 करोड़ रुपये की पेशकश की थी। इस तरह से ऋणदाताओं को अपने कर्ज पर 99 फीसदी की चपत लगेगी। भारतीय बैंकों के इस ऐतिहासिक निर्णय में कानूनी अड़चन भी आ सकती है क्योंकि इसके कुछ परिचालन कर्जदार ऋणदाताओं की समिति के खिलाफ स्थानीय और अमेरिकी अदालत में याचिका दायर करने की योजना बना रहे हैं। 

 
सूत्रों का कहना है कि समाधान योजना को 73.88 फीसदी ऋणदाताओं ने मंजूरी दी थी जबकि केनरा बैंक और चाइना डेवलपमेंट बैंक ने इसका विरोध किया था। भारतीय स्टेट बैंक, सिंडिकेट बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, एलऐंडटी फाइनैंस, जम्मू ऐंड कश्मीर बैंक, स्टैंडर्ड चाटर्ड आदि ने समाधान योजना के पक्ष में मतदान किया था। एयरसेल ने दिवालिया घोषित कराने के लिए फरवरी 2018 को खुद राष्ट्रीय कंपनी लॉ पंचाट गई है जबकि इसके सभी निदेशकों ने इससे पहले अपने पद से इस्तीफा दे दिया था।
 
योजना के अनुसार एआरसी कंपनी के फाइबर, स्पेक्ट्रम और दूरसंचार संपत्तियों को बेचकर बैंकों के बकाया वसूली की कोशिश करेगी। एयरसेल ने अपना वायरलेस कारोबार काफी पहले बंद कर दिया था। कंपनी फिलहाल केवल इंटरप्राइजेज कारोबार कर रही है और इसके कर्मचारियों की संख्या महज 200 रह गई है। 2012 में उच्चतम न्यायालय ने कई वायरलेस टेलीफोनी लाइसेंस रद्द कर दिए थे जिससे एयरसेल सहित कई दूरसंचार कंपनियों को अपने भारतीय कारोबार से हाथ धोना पड़ा था।  यूवी एआरसी के एक प्रवक्ता ने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। ऋणशोधन पेशेवर विजय अय्यर टिप्पणी के लिए उपलब्ध नहीं थे। 
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