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राजनीतिक दलों से खफा सेब किसान

श्रीमी चौधरी /  May 17, 2019

हिमाचल प्रदेश की प्रमुख नकदी फसल सेब को लेकर राजनीति तेज हो गई है। रविवार को लोकसभा के 7वें चरण के लिए मतदान होना है। राज्य के सेब उत्पादक सेब के आयात पर शुल्क बढ़ाने की मांग कर रहे हैं, जिससे राज्य की अर्थव्यवस्था पर असर पड़ रहा है।  भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) इस मसले पर बचाव की मुद्रा में है। वहीं कांग्रेस ने सेब पर आयात शुल्क बढ़ाए जाने का वायदा किया है जो सेब के घरेलू उत्पादकों के हित में होगा। बहरहाल सेब उत्पादक इसे बेकार की प्रतिबद्धता बता रहे हैं और उनके मुताबिक हाल के वर्षों में किसी भी दल ने इसके समाधान के लिए कोई कदम नहीं उठाया है।

 
सेब किसानोंं की चिंता यह है कि आयातित सेब की आपूर्ति की वजह से घरेलू सेब का कारोबार घट रहा है। पिछले 5 साल में सेब कारोबारियों को आयातित सेब की वजह से करीब 5,000 करोड़ रुपये का नुकसान उठाना पड़ा है। इस समय सेब पर सीमा शुल्क 50 प्रतिशत है, जबकि सेब उत्पादक चाहते हैं कि इसे बढ़ाकर 75 प्रतिशत किया जाए।  किसान संघर्ष समिति के सचिव संजय चौहान ने कहा, 'किसानों में असंतोष है और यह इस क्षेत्र में अहम हो सकता है क्योंकि हिमाचल प्रदेश सेब उत्पादक राज्य है।' हिमाचल प्रदेश में 4,500 करोड़ रुपये की सेब की अर्थव्यवस्था में करीब 4 लाख लोग लगे हुए हैं। यह राज्य की अर्थव्यवस्था का अहम स्रोत है और राज्य के सेब उत्पादकों को सेब के  आयात की वजह से कड़ी प्रतिस्पर्धा से जूझना पड़ रहा है। 
 
शिमला में सेब के कारोबारी ठाकुर अतर सिंह ने कहा, 'सस्ते सेब के आयात खासकर चीन जैसे देशों से आने वाले फूजी सेब की वजह से मुनाफा प्रभावित हुआ है। शुल्क बढऩे से हमने एक सीमा तक स्थिति पर काबू पा लिया था। लेकिन अब हम वाशिंगटन से आने वाले सेब की वजह से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना कर रहे हैं। इसके अलावा इस साल सेब का उत्पादन बेहतर रहने की उम्मीद है और इस तरह से हम उम्मीद करते हैं कि सेब की कीमत 1,000-1,200 रुपये प्रति कार्टन रहेगा। उत्पादन बढऩे की वजह से समस्या और बढऩे जा रही है।' यह राज्य सेब पर बहुत ज्यादा निर्भर है। इसके अलावा पनबिजली और पर्यटन से रोजगार मिला है। 
 
राज्य के किसान वास्तव में दबाव में हैं। सरकार ने पूरी सब्सिडी खत्म कर दी है। उत्पादन लागत बढ़ी है। कुछ खादों के दाम 1,000 रुपये की 50 किलो की बोरी तक पहुंच गए हैंं। इसके अलावा वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) की वजह से पूरे परिचालन लागत में बढ़ोतरी हो गई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 2014 के लोकसभा चुनाव प्रचार के दौरान राज्य के विकास का वादा किया था और कहा था कि राज्य पर विशेष ध्यान दिया जाएगा क्योंकि वे राज्य के बारे में सब कुछ और उसकी जरूरतों को जानते हैं। इससे किसान और चिढ़े हुए हैं। 
 
भाजपा से हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर लोकसभा से चुनाव लड़ रहे बीसीसीआई के पूर्व प्रमुख अनुराग ठाकुर ने कहा, 'केंद्र सरकार ने पहले अमेरिका द्वारा शुल्क बढ़ाए जाने के विरोध में आयात शुल्क बढ़ाकर 75 प्रतिशत करने का प्रस्ताव रखा था। लेकिन इस समय शुल्क के फैसले में विदेश मंत्रालय की बड़ी भूमिका है क्योंकि शुल्क की वैश्विक जंग चल रही है। इस तरह से हमें भरोसा है कि सरकार उचित समय पर सेब पर आयात शुल्क लगाए जाने को लेकर फैसला करेगी।' सेब किसान कांग्रेस से भी नाराज हैं। चौहान ने कहा, 'सीमा शुल्क घटाकर 52 प्रतिशत करने के लिए कांग्रेस जिम्मेदार है। अब जो भी दल सत्ता में आता है, हम अपनी आजीविका को लेकर विरोध प्रदर्शन करेंगे।' आयातित शुल्क की आपूर्ति बहुत ज्यादा बढ़ी है, जिसकी वजह से सालाना 600-800 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। 
 
लेकिन कांग्रेस सेब किसानों को लुभाने के लिए कुछ भी छोडऩा नहीं चाहती। कांग्रेस के मंडी से प्रत्याशी आसरे शर्मा ने कहा, 'हिमाचल को सेब के लिए जाना जाता है। प्रधानमंत्री ने सेब पर आयात शुल्क बढ़ाने का वादा किया था, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं किया जा सका। इसके विपरीत सेब का आयात पहले से दोगुना हो गया। किसानों को उनका उत्पादन लागत भी नहीं मिल रहा है, जो बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है। अगर हम सरकार बनाते हैं तो इस मसले को प्राथमिकता पर रखा जाएगा।' 
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