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हिमाचल में सेब किसानों में रोष

आदिति फडणीस /  May 15, 2019

कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व के लिए सारे रास्ते हिमाचल प्रदेश की तरफ जाते हैं जहां लोकसभा चुनावों के सातवें और अंतिम चरण में 19 मई को मतदान होना है। कार्यकर्ताओं में जोश फूकने और उन्हें सड़कों पर लाने के लिए पार्टी कड़ी मेहनत कर रही है। पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी पिछले सप्ताह ऊना में थे और 17 मई को उनकी सोलन में एक जनसभा है। इससे पहले गुलाम नबी आजाद वहां जाकर यह सुनिश्चित करेंगे कि पार्टी के  नेता की जनसभा में बड़ी संख्या में  लोग पहुंचें।  इसका क्या कारण है? हिमाचल प्रदेश की चार सीटों में से कांग्रेस को पिछली बार एक भी सीट नहीं मिली थी। इस बार पार्टी को कम से कम एक सीट पर जीत मिलने की उम्मीद है। भाजपा इस पहाड़ी राज्य में अपना दबदबा बरकरार रखना चाहती है जहां पार्टी के नेता जयराम ठाकुर मुख्यमंत्री हैं। लेकिन इस बार कांग्रेस का खाता खुल सकता है।

 
कांग्रेस के लिए ज्यादा संभावनाएं शिमला सीट पर है। यह सुरक्षित सीट है और पर्यवेक्षकों का कहना है कि कांग्रेस ने इस सीट पर तगड़ा उम्मीदवार उतारा है। पार्टी ने यहां पूर्व सैनिक और दो बार सांसद रहे धनी राम शांडिल को उम्मीदवार बनाया है जिनका मुकाबला भाजपा के सुरेश कश्यप से है। भाजपा ने इस सीट से अपने पिछले सांसद वीरेंद्र कश्यप को बर्खास्त कर दिया है। सुरेश कश्यप उसी जाति के हैं। शिमला कांग्रेस के दिग्गज नेता वीरभद्र सिंह का गढ़ रहा है। सिंह और राहुल गांधी के बीच तनावपूर्ण रिश्ते अब अतीत की बात हो चुकी है। राहुल ने ऊना में जनसभा में कहा, 'वीरभद्र सिंह राजनीति में मेरे गुरु हैं। मैं उनका सम्मान करता हूं। मैं नरेंद्र मोदी की तरह नहीं हूं जिन्होंने अपने राजनीतिक गुरु लालकृष्ण आडवाणी का तिरस्कार किया।' 
 
शिमला के ग्रामीण इलाके खासकर ऊपरी शिमला सेब के बागानों के लिए मशहूर हैं। सेब किसानों को भाजपा से कई शिकायतें हैं। भाजपा की राज्य सरकार में इस इलाके का प्रतिनिधित्व नहीं है। इसका मतलब यह है कि सेब किसानों की बात सरकार तक पहुंचाने के लिए कोई प्रतिनिधि नहीं है। कुछ महीने पहले किसान संघर्ष समिति (केएसएस) के तत्वावधान में एक व्यापक आंदोलन शुरू किया गया। इसके कार्यकर्ता गांव-गांव घूमकर ऐसे सेब किसानों की पहचान करने की कोशिश  में लगे हैं जिनके साथ अढ़तिया ने धोखाधड़ी की है। 
 
राज्य सरकार ने इस मामले की जांच के लिए एक विशेष दल का गठन किया है। करीब दो साल से भी अधिक समय से अढ़तियों ने सेब किसानों का भुगतान नहीं किया है। वे भुगतान में टालमटोल कर रहे हैं या फिर गायब हो गए हैं।  केएसएस के सचिव संजय चौहान किसानों को अपना बकाया वसूलने के लिए संगठित कर रहे हैं। एक स्थानीय अखबार ने उनके हवाले से लिखा, 'इस मुद्दे की जड़ में हिमाचल प्रदेश कृषि एवं उद्यान उपज विपणन (विकास एवं नियमन) कानून, 2005 के प्रावधानों को लागू नहीं करना है। इस कानून को मंडी कानून के नाम से जाना जाता है और इसे किसानों और उद्यान मालिकों के हितों के संरक्षण के लिए बनाया गया था पर इसे सही ढंग से लागू नहीं किया जा रहा।'
 
उन्होंने आरोप लगाया कि बिना सत्यापन के असामाजिक तत्वों को आढ़तियों का लाइसेंस दिया गया है। ये आढ़तिए किसानों की फसल खरीदते हैं और किसानों को बाद में भुगतान करने का वादा करते हैं। लेकिन इसके बाद वे लापता हो जाते हैं। माकपा के विधायक राकेश सिंघा ने जब विधानसभा में इस बारे में सवाल उठाया तो सरकार का जवाब था कि 15 जनवरी 2019 तक 99 शिकायतें दर्ज कराई गई थी जिनमें से 81 शिकायतें पुलिस के पास दर्ज कराई गई हैं। इनमें कुल 26,691,426 रुपये का दावा किया गया था जिसमें से 8,848,809 रुपये का मामला सुलझ गया है। 
 
सेब किसानों में भाजपा सरकार को लेकर रोष है। इसके अलावा ऊपरी शिमला इलाके में कोई बड़ी सड़क परियोजना नहीं है। यह इलाका कांग्रेस के दिग्गज नेताओं विद्या स्टोक्स और कुलदीप सिंह राठौड़ की कर्मभूमि रहा है। राठौड़ अभी कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष हैं। वीरभद्र सिंह के बेटे विक्रमादित्य ने यहां व्यापक राजनीतिक काम किया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि वे भाजपा को सबक सिखाना चाहते हैं। क्या  पार्टी यह सीट अपने कब्जे में रखने में सफल होगी?
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