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चेहरे की पहचान करने वाली एफआर तकनीक की सीमाएं

तकनीकी तंत्र
देवांग्शु दत्ता /  May 15, 2019

किसी इंसान का चेहरा आंखों से देखकर उसकी पहचान करने का काम अधिकतर लोग अपने-आप कर लेते हैं। लेकिन कंप्यूटर को यही काम करने में काफी समस्या होती है। हालांकि समय के साथ चेहरे की पहचान (फेशियल रिकॉग्निशन यानी एफआर) की तकनीक काफी सुधरी है और लोकप्रिय हो चली है। अब हवाईअड्डों, सार्वजनिक शौचालयों, स्मार्ट ऑफिस और रिहायशी ब्लॉक में भी इस तकनीक का इस्तेमाल होने लगा है। पुलिस और सुरक्षा एजेंसियां भी पहचान के लिए एफआर तकनीक का इस्तेमाल करती हैं। बैंक, शॉपिंग मॉल और सुपरमार्केट में सीसीटीवी कैमरे लगे होते हैं और सार्वजनिक स्थानों, मेट्रो स्टेशन में भी बड़े पैमाने पर सीसीटीवी कैमरे लगे हुए हैं। इन कैमरों की फुटेज को एफआर डेटाबेस से जोड़ा जा सकता है। चीन के सुरक्षाबल भी उइगर अल्पसंख्यकों पर निगरानी रखने के लिए एफआर का इस्तेमाल कर रहे हैं। लेकिन निजता एवं नैतिकता से जुड़े कुछ अहम सवाल भी हैं। एफआर प्रणाली के नियंत्रित परिवेश में अक्सर ठीक से काम न करने से बड़ी तकनीकी चुनौतियां भी हैं।

 
किसी पर्सनल कंप्यूटर या स्मार्टफोन की एफआर प्रणाली का सीमित उद्देश्य होता है। उपयोगकर्ता उस पर अपना चेहरा रिकॉर्ड करता है और फिर उपकरण का सुरक्षा घेरा उस छवि से चेहरों का मिलान कर मालिक की पहचान कर लेता है। यह एक तरह से इकलौते शख्स का एफआर डेटाबेस होता है लेकिन संकलित छवियों के चलते उपकरण विनिर्माता के पास बड़ा डेटा इक_ा हो जाता है। एक स्मार्ट बिल्डिंग में संभवत: कई हजार तस्वीरों की प्रोसेसिंग होती है। हवाईअड्डे की चेक-इन सुविधा में एफआर सिस्टम थोड़ा पेचीदा होता है। नाम, उड़ान संख्या और यात्रियों के विवरणों का मिलान करना होता है।
 
यहां पर निजता का मुद्दा भी जुड़ा हुआ है। यात्री या तो हवाईअड्डों का संचालन करने वाली निजी इकाइयों से बायोमेट्रिक्स जानकारियां साझा करते हैं या वे इकाइयां यात्रियों की पहचान के लिए सरकारी डेटाबेस तक संपर्क कायम करती हैं। आधार के दुरुपयोग और उससे जुड़ी निजी कंपनियों द्वारा आधार संबंधी निजी जानकारियों को लीक करने के मामलों को देखते हुए इस समस्या की वजह को आसानी से समझा जा सकता है। सार्वजनिक शौचालयों में लगी एफआर प्रणालियां व्यक्तियों की नहीं बल्कि वहां जाने वालों के लिंग की पहचान करती हैं। यह किसी व्यक्ति के चेहरे के साथ नाम का मिलान करने से काफी अलग काम है और कुछ मायनों में अधिक जटिल भी है। एफआर की लिंग-पहचान प्रणालियां लाखों लोगों के चेहरे के डेटाबेस के आधार पर तैयार की गई हैं। इसमें गलती की आशंका अधिक होती है क्योंकि कुछ पुरुषों के चेहरे महिलाओं की तरह लग सकते हैं और किशोरों को उभयलिंगी के रूप में भी वर्गीकृत किया जा सकता है।
 
ऐसी गलतियां होने की आशंका उस समय अधिक होती है जब प्रशिक्षण डेटाबेस में केश-विन्यास और रंग संबंधी पूर्वग्रह हावी होते हैं। अगर श्वेत कॉकेशियन चेहरों के साथ डेटाबेस बना है तो उसमें गहरी रंगत वाले लोगों की लिंग पहचान में गलतियों की आशंका अधिक होती है। ट्रांसजेंडर की भी शिनाख्त कर पाना आसान नहीं होता है। अधिकांश देश अभी तक यह नहीं तय कर पाए हैं कि ट्रांसजेंडर समुदाय के लोगों को किस सार्वजनिक शौचालय का इस्तेमाल करना चाहिए। इन मामलों में सक्षित लोग सहयोगी रवैया रखते हैं और ये परीक्षण नियंत्रित परिवेश में किए जाते हैं। अगर कोई व्यक्ति हवाईअड्डे या स्मार्ट ऑफिस के भीतर दाखिल होता है तो वह एक तटस्थ पृष्ठभूमि के सामने पोज देता है जिससे उसकी पहचान आसान हो जाती है।
 
पुलिस और सुरक्षा एजेंसियों का काम कई मायनों में अधिक मुश्किल होता है। उन्हें अस्पष्ट तस्वीरों के साथ काम करना पड़ता है जो सीसीटीवी कैमरों से जुटाई गई होती हैं, उनकी पृष्ठभूमि भी संदेहजनक होती है, उन्हें अक्सर ऐसे लोगों के बारे में जानकारी जुटानी होती है जो या तो घायल हुए हैं या उनकी मौत हो चुकी है और कुछ लोग तो जानबूझकर अपनी पहचान छिपाने की कोशिश करते हैं। पुलिस के पास काफी बड़ा डेटाबेस होता है जिसमें लाखों लोगों के बारे में करोड़ों तस्वीरें होती हैं। ऐसे में चेहरे का सही मिलान करने में अक्सर गलतियां हो जाती हैं।
 
चीन के सोशल क्रेडिट एवं निगरानी सिस्टम से हमें पता चलता है कि यह दुनिया की किसी भी पहचान व्यवस्था से अधिक बड़ी है। उइगर समुदाय के करीब 25 लाख लोगों पर एफआर प्रणाली के जरिये लगातार नजर रखी जाती है। एक स्मार्ट सिटी के बारे में अलीबाबा पर लीक हुए आंकड़ों से पेइचिंग के एम्बेसी क्षेत्र में सीसीटीवी नेटवर्क की जानकारी आ गई थी। उस एफआर सिस्टम में लोगों को नस्ल के आधार पर वर्गीकृत एवं चिह्नित किया गया था। चीनी स्मार्टफोन पर खींची गई तस्वीरें अक्सर फोन निर्माताओं के क्लाउड स्टोर पर सुरक्षित रखी जाती हैं। इसके आधार पर फोन कंपनियां करोड़ों लोगों के चेहरे से संबंधित विशाल डेटा तैयार कर  लेती हैं। चीन सरकार को इनमें से अधिकांश डेटा तक कानूनी पहुंच हासिल है। चीन के नगर निगम नियम तोडऩे वाले लोगों को छोटे अपराधों के लिए भी चिह्नित कर जुर्माना लगाते हैं। इसी तरह चीन का सोशल क्रेडिट सिस्टम सरकार की आलोचना करने वाले या कर्ज भुगतान नहीं करने वाले लोगों की पहचान करता है। अगर इस सिस्टम में किसी नागरिक को कम स्कोर मिला हुआ है तो उसे हवाईअड्डे या रेलवे स्टेशन के भीतर जाने से रोका जा सकता है। यहां पर भी एफआर प्रणाली का अहम योगदान होता है। कई देश इस तकनीक का इस्तेमाल जरूर करेंगे। उस समय ऐसी तकनीक से नागरिकों को सुरक्षा देने के लिए निजता संबंधी नए कानून की जरूरत होगी ताकि दुरुपयोग न हो।
Keyword: computer, face detacter,,
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