बिजनेस स्टैंडर्ड - बेंचमार्क से मिलान से दर निर्धारण होगा आसान
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बेंचमार्क से मिलान से दर निर्धारण होगा आसान

संजय कुमार सिंह /  May 13, 2019

देश के सबसे बड़े कर्जदाता भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) ने बचत जमा दर, कैश-क्रेडिट और ओवरड्राफ्ट (ओडी) दरें एक बाहरी मानक दर (बेंचमार्क) रीपो रेट से जोड़ दी हैं। इस समय रीपो रेट 6 प्रतिशत है। एसबीआई के जो ग्राहक अपने बचत खाते में 1 लाख रुपये से अधिक रकम (बैलेंस) रखते हैं, बैंक उन्हें अब 3.25 प्रतिशत ब्याज की दर से ब्याज देगा। इसी तरह बैंक 1 लाख रुपये से अधिक स्वीकृत सीमा के साथ अपने सीसी/ओडी पर 8.25 प्रतिशत ब्याज की पेशकश करने के लिए रीपो रेट के साथ स्प्रेड (अतिरिक्त दर) भी जोड़ेगा। इसके अलावा रिस्क प्रीमियम (निश्चित प्रतिफल के अलावा जोखिम लेने के एवज में मिलने वाला प्रतिफल) भी जोड़ा जाएगा। 

बाहरी बेंचमार्क से इन दरों को जोडऩे से दर निर्धारण प्रणाली में काफी पारदर्शिता आएगी। वित्तीय योजनाकार अर्णव पंड्या कहते हैं,'इससे आरबीआई जैसे ही रीपो दर में बदलाव करेगा वैसे ही तत्काल इन दरों में भी बदलाव दिखना शुरू हो जाएगा।' जब दरें बाहरी बेंचमार्क से नहीं जुड़ी होती हैं तो बैंक अपनी मर्जी से यह तय करते हैं कि आरबीआई द्वारा दरों में बदलाव का कितना लाभ ग्राहकों को दिया जाएगा। 1 लाख रुपये तक की लघु जमा इस बदलाव से मुक्त रखे गए हैं और इस पर पहले की तरह ही 3.50 प्रतिशत ब्याज मिलता रहेगा। लोनटैप फाइनैंशियल टेक्नोलॉजीज के मुख्य परिचालन अधिकारी अमित तिवारी कहते हैं,'शायद धारणा यह है कि ब्याज दरों में अचानक बड़े बदलाव हितकर नहीं हो सकते हैं।' जमा और साख दोनों दरें बेंचमार्क से जुडऩे का अर्थ यह होगा कि बेंचमार्क दरें बढऩे की स्थिति में जब मासिक किस्तें (ईएमआई) बढेंगी तब तब ग्राहकों को बचत जमा दर में वृद्धि से कुछ राहत मिल जाएगी। 

हालांकि बेंचमार्क के साथ दरें जुडऩे से अनिश्तितता भी बढ़ सकती है। पहले इन दरों में लंबे समय तक इनमें कोई बदलाव नहीं होता था। पंड्या कहते हैं, 'इन दरों में तेज बदलाव ग्राहकों को शुरू में झेलने में दिक्कतें आ सकती हैं। मौद्रिक नीति की समीक्षा हरेक दो महीने में होती है, इसलिए ये दरें एक साल में कई बार बदल सकती हैं।'

अपने बचत खातों में अधिक रकम रखने वाले एसबीआई ग्राहकों के लिए ब्याज दरों में शुरू में कमी आएगी। पैसाबाजार डॉट कॉम में पेमेंट प्रॉडक्ट्स प्रमुख साहिल अरोड़ा कहते हैं, 'इस बदलाव से पहले बचत खाताधारक 1 करोड़ रुपये तक जमा पर 3.5 प्रतिशत और इससे अधिक रकम पर 4 प्रतिशत सालाना ब्याज अर्जित करते थे।'

इस समय कुछ बैंक 1 लाख रुपये से अधिक बैलेंस पर 6 प्रतिशत ब्याज देते हैं। आईडीबीआई फस्र्ट और डीबीएस 7 प्रतिशत तक ब्याज की पेशकश कर रहे हैं। पंड्या कहते हैं, 'अगर आप बचत खाते में अधिक रकम रखते हैं तो उस बैंक में रकम डालना अधिक फायदेमंद है, जो अधिक ब्याज की पेशकश करते हैं।' अपने बचत खाते में एक या दो महीने से अधिक खर्च के बराबर रखने से परहेज करें। इसके अलावा बैंक का चयन करते वक्त इसकी सेवा गुणवत्ता और अपने घर से दूरी (बैंक शाखा) का जरूर ख्याल रखें। बचत खाते में पड़ी अधिक रकम सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) में डाली जा सकती है। 

पंड्या कहते हैं, 'अगर आप कुछ तय नहीं कर पा रहे हैं तो एक निश्चित अवधि के लिए स्वीप एफडी में रकम लगाएं। सामान्य एफडी में परिपक्वता से पहले निकासी पर ब्याज, मिसाल के तौर पर, 100 आधार अंक तक काटा जा सकता है।'

आप डेट फंडों में निवेश कर सकते हैं, बशर्ते जोखिम पचाने की क्षमता रखते हैं। अरोड़ा कहते हैं, 'डेट फंड अच्छे तरीके से भुनाए जा सकते हैं। छोटी अवधि के फंड एग्जिट लोड से जुड़ा शुल्क नहीं लेते हैं।' अरोड़ा ने कहा कि लिक्विड फंड तीन महीने की अवधि के लिए अच्छे होते हैं, अति लघु अवधि एवं कम अवधि के ऋण 3 से 12 महीने और लघु अवधि के फंड एक से तीन वर्षों के लिए आदर्श माने जाते हैं। मुद्रा बाजार में निवेश करने वाले मनी मार्केट फंड लिक्विड फंडों के मुकाबले सुरक्षित होते हैं। 

जहां तक सीसी और ओडी की बात है तो एसबीआई की दर 8.25 प्रतिशत होती और इसके साथ व्यक्तिगत रिस्क प्रीमियम भी जुड़ा होगा। तिवारी कहते हैं,' यह पारदर्शी दर निर्धारण प्रणाली कारोबारियों के लिए सकारात्मक हैं, जो काफी कम मार्जिन पर कारोबार करते हैं। उनके लिए एक आधार अंक बदलाव भी मायने रखता है, क्योंकि वे काफी कम मार्जिन पर कारोबार करते हैं।' तिवारी को लगता है कि कई कारोबार एसबीआई की इस सुविधा का लाभ उठाएंगे। भविष्य में ग्राहकों को इस बात को लेकर सतर्क रहना होगा कि वे क्या अर्जित कर रहे हैं और अपनी जमा एवं ऋण पर कितना भुगतान कर रहे हैं।

Keyword: sbi, OD, Cash Credit, Benchmark, Data, Bank,
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