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आरआईएल पर भारी पड़ी कारोबारी चिंता

उज्ज्वल जौहरी /  May 13, 2019

मार्च तिमाही के नतीजे आने के बाद 2 मई से रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) का शेयर 10 प्रतिशत से अधिक लुढ़क गया है। शेयर में गुरुवार को भी गिरावट जारी रही और यह 3 प्रतिशत से अधिक फिसल गया। कई वर्षों तक शेयर को लेकर उत्साहित रहने के बाद ब्रोकरेज कंपनी मॉर्गन स्टैनली ने इसकी रेटिंग घटा दी। गुरुवार को आई गिरावट की यह एक वजह हो सकती है, लेकिन रेटिंग में कमी आरआईएल के प्रमुख रिफाइनिंग एवं पेट्रो-रसायन खंड को लेकर विश्लेषकों द्वारा जताई चिंताओं से मेल खाता है। 

मॉर्गन स्टैनली के विश्लेषकों का कहना है कि गैस और पॉलिमर में उठापटक से 2020 में विकास की रफ्तार धीमी रह सकती है। विश्लेषकों के अनुसार आरआईएल का दो वर्षों का मार्जिन लुढ़क सकता है, हालांकि निवेशक रिफाइनिंग कारोबार में बाधाओं को भले ही तवज्जो नहीं दे रहे हैं, लेकिन प्रमुख कारोबार फिसलने और क्षमता विस्तार नहीं होने से बढ़त सीमित रह सकती है। आरआईएल को मुख्य चुनौती ऊर्जा कारोबार से मिल रही है। आरआईएल के राजस्व में रिफाइनिंग एवं पेट्रो-रसायन खासा योगदान देते हैं। ये दोनों खंड सकल राजस्व में क्रमश: 51 और 22.3 प्रतिशत योगदान देते हैं।  इस तरह, यह आरआईएल की कमाई के लिए ये दोनों खंड महत्त्वपूर्ण हैं। 

इससे आरआईएल के शेयर में आई गिरावट की वजह भी दिख रही है। गैसोलिन में कमजोरी और हल्के एवं भारी तेल की कीमतों में अंतर में कम होने से रिफाइनिंग मार्जिन पर असर पड़ सकता है। चौथी तिमाही में रिफाइनिंग मार्जिन 18 महीने के निचले स्तर 8.2 डॉलर प्रति बैरल पर था। करीब 6 तिमाही पहले अपने उच्चतम स्तर के मुकाबले इस खंड का परिचालन मुनाफा 40 प्रतिशत नीचे लुढ़क गया था।

भारी एवं मझोली किस्म की कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों से रिफाइनिंग कारोबार पर दबाव बरकरार रह सकता है। विश्लेषकों का कहना है कि इसका नतीजा यह होगा कि वर्ष 2019-20 में आरआईएल की आय 6 प्रतिशत कम हो सकती है और नकदी प्रवाह में 0.5 अरब डॉलर की कमी आ सकती है।

पेट्रो-रसायन खंड का परिचालन मुनाफा कुछ समय पहले मजबूत था और कम कारोबार के बावजूद चौथी तिमाही में यह सर्वकालिक स्तर पर था। हालांकि अब मार्जिन में नरमी आनी शुरू हो गई है। इस बारे में ऐंजल ब्रोकिंग में डिप्टी वाइस-प्रेसिडेंट उपाध्यक्ष ज्योति राय कहती हैं, 'पेट्रो-रसायन मार्जिन उच्चतम स्तर पर थे और अब इसमें कमी आ सकती है।'

मॉर्गन स्टैनली के विश्लेषकों का कहना है कि वैश्विक स्तर पर पैराक्सिलिन और मिथाइलिन ग्लाइकॉल (एमईजी प्रॉडक्ट्स) की आपूर्ति बढऩे से आय में 3 से 4 प्रतिशत की कमी आ सकती है। इन सभी चिंताओं के मद्देनजर मॉर्गन स्टैनली ने आरआईएल के लिए आय का अनुमान 17 से 20 प्रतिशत कम कर दिया है। अमेरिकी वाणिज्य विभाग द्वारा भारत के पॉलिएस्टर यार्न पर नए शुल्क लगाने की खबरों के बाद आरआईएल शेयर और कमजोर हो सकता है।

आरआईएल दुनिया में पॉलिएस्टर फाइबर एवं यार्न की सबसे बड़ी उत्पादक है। इस बीच, विलश्ेषकों की नजर इंटरनैशनल मैरिटाइम ऑर्गेनाइजेशन (आईएमओ) के संशोधित दिशानिर्देशों पर होगी, जिससे ईंधन में सल्फर की मात्रा सीमित हो जाएगी। 

शेयरखान के अभिजित बोरा को लगता है कि जनवरी 2020 में संशोधित आईएमओ दिशानिर्देशों के क्रियान्वयन के बाद डीजल क्रैक में तेजी से सुधार हो सकता है। बोरा आरआईएल के समेकित परिचालन मुनाफे में उपभोक्ता कारोबार (खुदरा एवं दूरसंचार) के योगदान को लेकर भी सकारात्मक हैं। इसकी हिस्सेदारी 2014-15 के 2 प्रतिशत से बढ़कर 2018-19 में 25 प्रतिशत तक हो गई है।

उनका कहना है कि इससे तेल संबंधी कारोबारों में अनिश्चितता कम हो सकती है। खुदरा एवं दूरसंचार कारोबारों की तेज रफ्तार, साथ ही बहीखाते पर कर्ज घटाने की मुहिम अहम पहलू साबित हो सकते हैं। आरआईएल की दूरसंचार इकाई जियो का मजबूत प्रदर्शन बरकरार है। बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच के विश्लेषकों को लगता है कि अगले 12 से 18 महीने में जियो दूरसंचार खंड में सबसे बड़ी कंपनी बन सकती है। कुल मिलाकर आरआईएल के प्रमुख कारोबार में दिलचस्पी रखने वाले निवेशक शेयर फिसलने पर इनमें निवेश पर विचार कर सकते हैं।

Keyword: RIL, Reliance Industries Limited, morgan stanley, Petro Chemical, Rating, Broking,
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