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ऐक्सिस बैंक के शेयर में थमेगी तेजी!

हंसिनी कार्तिक /  May 13, 2019

अमूमन जब नया प्रबंधन कमान संभालता है तो कुछ असहज बातें एक साथ बाहर आने की आशंका रहती है। भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) में भी ऐसा हुआ और हाल में येस बैंक भी इसी दौर से गुजरा है। हालांकि ऐक्सिस बैंक के साथ ऐसा कुछ नहीं हुआ। जनवरी में प्रबंध निदेशक एवं मुख्य कार्याधिकारी के तौर पर अमिताभ चौधरी ने जब से बैंक की कमान संभाली तब से शेयर 18 प्रतिशत उछल चुका है।

निजी क्षेत्र के किसी अन्य बैंकों के शेयरों के मुकाबले येस बैंक में सर्वाधिक तेजी आई है। इससे निवेशकों के मन में सवाल उठने लगा है कि क्या ऐक्सिस बैंक के शेयर ने जरूरत से अधिक प्रतिक्रिया दिखाई है। वैसे परिसंपत्ति गुणवत्ता, ऋण खातें में उच्च रेटिंग प्राप्त कंपनियों की खासी तादाद और खुदरा कारोबार सहज स्थिति की ओर इशारा करते हैं, लेकिन आगे यह मूल्यांकन कैसे बरकरार रहेगा, इसे लेकर चिंताएं जरूर हैं।

बैंक  की चौथी तिमाही के नतीजे कुछ ऐसे पहलुओं की ओर इशारा करते हैं। लागत संरचना मजबूत होने के बावजूद प्रावधान-पूर्व मुनाफा क्रमागत आधार पर 9 प्रतिशत कम हो गया। शुद्ध ब्याज आय में महज 2 प्रतिशत बढ़ोतरी इसकी एक एक बड़ी वजह रही। हालांकि सालाना आधार पर दोनों मोर्चों पर 37 प्रतिशत और 21 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई, जिससे संकेत मिलता है कि ऋण आवंटन वृद्धि और फीस इनकम की रफ्तार बरकरार रखना एक चुनौती होगी। इसके साथ ही जमा (डिपॉजिट) में बढ़ोतरी ऋण आवंटन के मुकाबले अधिक रही, जिससे मुनाफा 3.4 प्रतिशत के स्तर पर सपाट रहा।

सालाना आधार पर जमा में 21 प्रतिशत बढ़ोतरी हुई, जिनमें अधिक ब्याज प्रतिफल वाले डिपॉजिट की तादाद अधिक रही। चालू खाता बचत खाता (कासा) अनुपात 54 प्रतिशत से कम होकर चौथी तिमाही में 44 प्रतिशत रह गया। इससे कोष पर लागत भी 30 आधार अंक बढ़ गई। इससे मुनाफे पर चोट पड़ी। फिलिप कैपिटल के विश्लेषकों का कहना है कि कम लागत वाली देनदारी ऐक्सिस बैंक के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।

इसी तरह, बैंक के खुदरा खातों में 19 प्रतिशत तेजी के दम पर कुल ऋण में सालाना आधार पर 12.5 प्रतिशत वृद्धि हुई। कुल ऋण आवंटन में खुदरा ऋणों की हिस्सेदारी 50 प्रतिशत रही। हालांकि असुरक्षित ऋणों की बढ़ती हिस्सेदारी पर नजर रखने की जरूरत है। बैंक के खुदरा ऋणों में वित्त वर्ष 2018 में पर्सनल लोन और क्रेडिट कार्ड की हिस्सेदारी क्रमश: 4 प्रतिशत और 10 प्रतिशत रही, जो बढ़कर 5 प्रतिशत और 12 प्रतिशत हो गई।

खपत धीमी होने से गैर-ब्याज आय पर पडऩे वाले असर से बैंक को नुकसान हो सकता है। जायदाद के एवज में ऋण (लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी) भी वित्त वर्ष 2019 में 100 प्रतिशत बढ़कर 9 प्रतिशत हो गया। बैंक की परिसंपत्ति तीसरी ऐसी चीज है, जिस पर सबकी नजरें होंगी। इसमें कोई शक नहीं कि इस मोर्चे पर बैंक ने कड़ी मेहनत की हैै और सकल गैर-निष्पादित परिसंपत्तियां (एनपीए) एक साल पहले के 6.8 प्रतिशत से कम होकर चौथी तिमाही में 5.3 प्रतिशत रह गईं। इसके बावजूद इस मोर्चे पर काफी कुछ किए जाने की गुंजाइश है। इस बीच, यह देखने वाली बात होगी कि प्रावधान खर्च में कमी आएगी या नहीं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने ऐक्सिस बैंक को अगली चार तिमाहियों के लिए एक एनपीए खाते से मिली जमीन के एवज में 100 प्रतिशत प्रावधान करने का निर्देश दिया है। 

ब्रोकरेज कंपनियों की रिपोर्ट के अनुसार बैंक ने चौथी तिमाही में अपने प्रॉफिट ऐंड लॉस (पीऐंडएल) बहीखाते के जरिये 530 करोड़ रुपये दिए हैं और शेष 1,600 करोड़ रुपये अपने जमा स्रोतों से आवंटित किए हैं। यह रकम जमा स्रोत में दोबारा डालनी होगी और अगली तीन तिमाहियों के दौरान इसे चुकाना होगा। ऐसेट रीकंस्ट्रक्शन कंपनी को बिक्री से 2,900 करोड़ रुपये सिक्योरिटी रिसीट के तौर पर मिले हैं, जिसके एवज में बैंक ने चौथी तिमाही में 220 करोड़ रुपये दिए।  

मैक्वारी कैपिटल के सुरेश गणपति कहते हैं, 'यह देखना होगा कि इन सिक्योरिटी रिसीट का मूल्यांकन और कितना कम होगा।' इन चिंताओं का असर अगली तिमाहियों में देखा जा सकता है और ऐक्सिस बैंक के शेयर में आई तेज उछाल आगे और बढ़त की गुंजाइश सीमित रख सकती है। गणपति कहते हैं, 'नकदी से जुड़ी दिक्कतें और वित्त वर्ष 2020 के लिए मुनाफा सपाट रहने के अनुमान के मद्देनजर प्रबंधन को शेयर में प्रतिफल 18 प्रतिशत लक्ष्य पाने के लक्ष्य में और देरी हो सकता है।'

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