बिजनेस स्टैंडर्ड - आईआईटी रुड़की और जेम्स थॉमसन
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, December 10, 2019 03:45 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

आईआईटी रुड़की और जेम्स थॉमसन

विवेक देवराय /  May 10, 2019

आईआईटी रुड़की की यात्रा से औपनिवेशिक युग के एक ऐसे इंजीनियर के बारे में पता चला जिनके नाम पर एक शैक्षणिक संस्थान और एक रेल इंजन दोनों हैं। जानकारी प्रदान कर रहे हैं विवेक देवराय 

 
हाल ही में मैं कुछ परिचर्चाओं में हिस्सा लेने के लिए आईआईटी रुड़की गया था। रुड़की कॉलेज को आईआईटी रुड़की का पूर्ववर्ती माना जा सकता है। वहां मुझे एक विशेष लेख देखने को मिला, जो सन 1851 में प्रकाशित हुआ था। उस लेख का शीर्षक था, 'रुड़की कॉलेज का लेखा, जिसकी स्थापना सिविल इंजीनियरों के निर्देशन हेतु की गई, इसकी विस्तार योजना भी साथ ही बनी।' देश में सिविल इंजीनियरों के व्यवस्थित प्रशिक्षण की आवश्यकता बहुत लंबे समय से महसूस की जा रही थी। पश्चिमी यमुना नहर की शुरुआत सन 1817 में हुई। पूर्वी यमुना नहर की शुरुआत सन 1822 में हुई।  देहरादून में, रुहेलखंड में और दिल्ली के निकट नजफगढ़ में सरकार ही लंबे समय सें नालियों और सिंचाई आदि का काम संभाल रही थी। 
 
पिछले 20 या 30 वर्ष में सरकार ने अपने खर्च पर कई बेहतरीन सड़कों का निर्माण किया है। आपात परिस्थितियों से निपटने के लिए तात्कालिक उपाय करने आवश्यक थे। बेहतर प्रशिक्षण वाले अनुभवी सिविल इंजीनियरों की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए भी यह आवश्यक था। इन इंजीनियरों की ऐसी तैयारी आवश्यक थी जिसकी बदौलत वे उन कठिनाइयों से जूझ सकें जो बेहतर प्रबंधन की राह में सामने आतीं। कहने का तात्पर्य यह है कि रुड़की कॉलेज की स्थापना ऐसी ही आपातकालीन परिस्थितियों में हुई। यह कॉलेज 25 नवंबर 1847 को औपचारिक रूप से अस्तित्व में आया। गजेटियर से हमें यह भी पता चला कि अनौपचारिक तौर एक कक्षा 1845 में ही शुरू हो गई थी, जहां स्थानीय युवाओं को इंजीनियरिंग का प्रशिक्षण दिया जाने लगा था। यह शुरुआत थी। जेम्स थॉमसन पश्चिमोत्तर प्रांत के तत्कालीन लेफ्टिनेंट गवर्नर थे। यही कारण है कि उनके निधन के बाद रुड़की कॉलेज को थॉमसन कॉलेज ऑफ सिविल इंजीनियरिंग का नाम दिया गया। बाद में यह आईआईटी रुड़की बन गया और इसके प्रमुख प्रशासनिक भवन को थॉमसन भवन का नाम दिया गया। 
 
आश्चर्य नहीं कि वहां मेरी मुलाकात जिन छात्रों से हुई, उनको इस इतिहास के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। यही कारण है कि उनको उस प्रस्तावित विस्तार के बारे में भी कोई जानकारी नहीं थी, जिसका उल्लेख सन 1851 के आलेख में था। उसमें रुड़की से 40-50 मील के दायरे में आने वाले गांवों के विद्यालयों की स्थिति में सुधार करने की बात शामिल थी। योजना यह थी कि कुछ आदर्श ग्रामीण विद्यालय स्थापित किए जाएं और आगंतुकों के लिए एक प्रतिष्ठान बनाया जाए जिनका काम होगा उनको आवंटित गांवों में जाना तथा वहां के विद्यालयों का स्तर आंकना तथा उनमें कार्यरत शिक्षकों को सलाह देना और उनकी सहायता करना। इस काम में निर्देशन, पुस्तकों और पुरस्कार आदि का इस्तेमाल किया जाना तय हुआ था।
 
सन 1935 में लेफ्टिनेंट कर्नल ई.डब्ल्यू.सी. सैंड्स की एक पुस्तक प्रकाशित हुई जिसका शीर्षक था- द मिलिट्री इंजीनियर इन इंडिया। अपनी इस पुस्तक में उन्होंने रुड़की कॉलेज को देश का सबसे पुराना इंजीनियरिंग कॉलेज बताया। उन्होंने लिखा कि रुड़की का थॉमसन सिविल इंजीनियरिंग कॉलेज दरअसल सबसे पुराना है और यह भारत में अपनी तरह का अनूठा कॉलेज है।  उन्होंने लिखा कि थॉमसन कॉलेज अपने अस्तित्व के लिए गंगा नदी का ऋणी है क्योंकि इस पवित्र नदी के बगैर न तो गंग नहर होती और न ही बिना नहर के यह कॉलेज अस्तित्व में आता। 
 
हालांकि यह अपने आप में बहस का विषय है क्योंकि चेन्नई स्थित कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग सन 1859 में औपचारिक रूप से कॉलेज बना जबकि उसके पहले सन 1794 में ही स्कूल ऑफ सर्वे की स्थापना की जा चुकी थी। परंतु जेम्स थॉमसन की विशिष्टता के बारे में कहीं किसी बहस की गुंजाइश नहीं है। मुझे ऐसे किसी अन्य व्यक्ति के बारे में जानकारी नहीं है, जिसके नाम पर शैक्षणिक संस्थान भी हो और रेल इंजन भी। कर्नल प्रॉबी टी कॉटली वह इंजीनियर थे, जिन्होंने गंग नहर के निर्माण की निगरानी की। उन्होंने इस नहर के निर्माण कार्य पर एक रिपोर्ट भी लिखी। अपनी इस रिपोर्ट में वह कहते हैं, 'रेलमार्ग और वैगन के निर्माण से हमें व्हील बैरो और बास्केट से राहत मिली, लेकिन काफी लंबे समय तक हमारा मानव संसाधन खुदाई और वैगनों को धकेलने के काम में भी लगा।'
 
'समय बीतने के साथ कुछ स्थानों पर मनुष्य का स्थान घोड़े ने लिया। 22 दिसंबर 1851 को रेल इंजन की शुरुआत हुई। मेरा मानना है कि भारत में इस्तेमाल किया गया वह अपनी तरह का अनूठा इंजन था।' उनकी यह बात सही है क्योंकि आयातित भाप इंजन भारत में इस्तेमाल किया गया पहला रेल इंजन था। रुड़की रेलवे स्टेशन पर इसका एक मॉडल मौजूद है जो परिचालन योग्य है। उस वक्त जेनी लिंड किसी ओपरा गायक की तरह मशहूर थीं। वह अपनी ख्याति के शिखर पर थीं।  ऐसे में इस इंजन को शुरुआत में जेनी लिंड के नाम से जाना जाता था और यह रुड़की और पीर कलियर के बीच निर्माण सामग्री ढोने का काम करता था। जेनी लिंड को लंदन में प्रसिद्घि हासिल थी, थॉमसन पूर्वोत्तर प्रांत में ख्यात थे। यही कारण था कि इस इंजन का नाम बदलकर थॉमसन कर दिया गया। दुर्भाग्यवश 1852 में बॉयलर में विस्फोट हो गया और थॉमसन इंजन नहीं बच सका। 
 
रिचर्ड बेयर्ड नामक एक इंजीनियर रुड़की में गंग नहर के कामकाज के प्रभारी हुआ करते थे। सन 1857 में उनसे कहा गया कि वह मुख्य इंजीनियर के रूप में दिल्ली जाएं। कर्नल वाइबर्ट ने अपनी पुस्तक में रिचर्ड बेयर्ड स्मिथ को सन 1857 में दिल्ली के नायकों के नेता के रूप में याद किया है। उन्होंने लिखा है कि दिल्ली जाने से पहले रुड़की में खंदक खोदने वाले सिपाहियों की दो कंपनियां मजबूती के बजाय कमजोरी का सबब बनीं। उनमें शामिल तमाम सिपाही स्थानीय थे। उनमें काफी हद तक असहजता का भाव था जिसने प्रदर्शन को प्रभावित किया। बेयर्ड ने उनको दो ऐसे अधिकारियों के अधीन रखा जो एक दूसरे से परिचित भी थे और उपलब्ध अधिकारियों में सबसे उत्कृष्ट भी थे। उन्होंने थॉमसन कॉलेज की इमारतों की देखरेख का काम भी उनको ही सौंपा। 
 
(लेखक प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद के अध्यक्ष हैं)
Keyword: IIT roorkee, education,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या ई-कॉमर्स दिग्गजों की एमएसएमई रणनीति होगी कारगर?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.