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एनएसई की जिंस डेरिवेटिव योजना 6 महीने और लटकी

राजेश भयानी / मुंबई May 10, 2019

सेबी के एक आदेश ने एनएसई के जिंस डेरिवेटिव अनुबंध 6 महीने लटका दिए हैं। सेबी ने को-लोकेशन मामले में नैशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (एनएसई) को छह महीने तक नया डेरिवेटिव अनुबंध शुरू करने से रोक दिया है। इससे जिंस खंड में जोरदार तरीके से उतरने की इसकी योजना में विलंब होगा। उसने इस खंड में छह महीने पहले अक्टूबर 2018 में ही प्रवेश किया था। हालांकि उद्योग के अधिकारी मानते हैं कि इससे बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) को फायदा होगा क्योंकि उसके पास अरंडी, हल्दी, चना और मक्का जैसी जिंसों में नए डेरिवेटिव अनुबंध शुरू करने की आक्रामक योजना है। धातु खंड में यह मूल धातुओं और चांदी में डिलिवरी के लिए 'किलो बार्स' अनुबंध की योजना बना रहा है।
 
फिलहाल, सेबी के आदेश के बारे में एनएसई सभी कानूनी विकल्प तलाश रहा है लेकिन अगर यह आदेश वैध रहता है तो नए डेरिवेटिव अनुबंध शुरू करने की उसकी योजना पर पानी फिर जाएगा। यह मुद्दा कमोडिटी डेरिवेटिव बाजार के विकास की दृष्टिï से महत्त्वपूर्ण है क्योंकि एनएसई के न होने से जिंस क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा घट जाएगी। इस खंड में बीएसई और एनएसई के प्रवेश से पिछले सात महीनों से प्रतिस्पर्धा बढ़ी तो है लेकिन अभी तक कोई बड़ा असर नहीं हुआ है। अब तक गैर-कृषि जिंस डेरिवेटिव में मुख्य रूप से एमसीएक्स का ही कब्जा है जबकि कृषि खंड में एनसीडीईएक्स प्रमुख भागीदार है। आईसीईएक्स तीसरा एक्सचेंज है जिसमें अहमदाबाद के एनएमसीई का विलय हुआ था।
 
अलबत्ता बीएसई को कृषि खंड में अच्छी खरीद नजर आई है। एनएसई के पास सोने, चांदी और ब्रेंट क्रूड तेल के अनुबंध हैं। उसके ग्वार और कपास अनुबंधों में तेजी देखने को मिली है। उद्योग के पर्यवेक्षकों का मानना ​​है कि एनएसई के मौजूदा जिंस अनुबंध बढऩे की काफी संभावना है लेकिन अभी तक कुछ भी खास नहीं दिखा है। इसकी योजनाओं में 25 टन धातु के बड़े अनुबंध, अंडे, दालों की कुछ किस्में वगैरह शामिल हैं लेकिन इसके लिए इंतजार करना होगा। हालांकि बीएसई के पास डेरिवेटिव शुरू करने के लिए कृषि जिंसों की लंबी फेहरिस्त है। बीएसई को कम से कम तब तक प्रतिस्पर्धा नहीं करनी पड़ेगी जब तक एनएसई नए अनुबंध शुरू नहीं करता। बीएसई के प्रवक्ता ने टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। एनएसई के प्रवक्ता ने कहा कि हमारे पास जिंसों वगैरह के नए अनुबंधों के लिए कुछ योजनाएं थीं क्योंकि यह हमारे लिए नया खंड है। हमारी जो मूल योजनाएं थीं, उनमें अब छह महीने की देरी होगी।
Keyword: NSE, sebi, jins,,
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