बिजनेस स्टैंडर्ड - जीएसटी राजस्व में साझेदारी का अनुचित फॉर्मूला
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, July 16, 2019 06:23 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

जीएसटी राजस्व में साझेदारी का अनुचित फॉर्मूला

दिल्ली डायरी
ए के भट्टाचार्य /  May 09, 2019

अप्रैल 2019 में वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) संग्रह के आंकड़ों को देखते हुए तमाम टीकाकार यह मानने लगे हैं कि जुलाई 2017 में इस कर के आगमन के बाद के महीनों से जिस राजस्व कमी की बात कही जा रही है, वह शीघ्र ही समाप्त हो सकती है। कुछ अधिकारियों ने तो आशा जताई है कि चालू वित्त वर्ष के पहले महीने में एकत्रित 1.14 लाख करोड़ रुपये का जीएसटी 2019-20 के अंतरिम लक्ष्य को हासिल करने में सहायता करेगा।  यह धारणा हकीकत के कितनी करीब है? सरकार का लक्ष्य हासिल करने का अनुमान मूल रूप से एकीकृत जीएसटी (आईजीएसटी) के तहत जुटाए गए राजस्व के आवंटन पर आधारित है। यह आवंटन सीजीएसटी के तहत केंद्र और एसजीएसटी के तहत राज्यों को किया गया है। आईजीएसटी वह कर है जो वस्तुओं और सेवाओं तथा हर प्रकार के आयात की अंतरराज्यीय आपूर्ति पर लगता है।

 
अब अप्रैल 2019 में 54,733 करोड़ रुपये आईजीएसटी से आए जबकि 21,163 करोड़ रुपये सीजीएसटी से आए। करीब 28,801 करोड़ रुपये एसजीएसटी और 9,168 करोड़ रुपये जीएसटी क्षतिपूर्ति उपकर से आए। इस तरह कुल संग्रह 1.14 लाख करोड़ रुपये हुआ। आईजीएसटी के अधीन एकत्रित 54,733 करोड़ रुपये में से सरकार ने 20,370 करोड़ रुपये यानी करीब 37 प्रतिशत राशि सीजीएसटी और 15,975 करोड़ रुपये अथवा 29 फीसदी राशि एसजीएसटी को आवंटित की। इसके अलावा आईजीएसटी के अधीन संग्रहित 12,000 करोड़ रुपये की राशि केंद्र और राज्यों के मध्य साझा की गई। इस निस्तारण के बाद आईजीएसटी के पास 6,388 करोड़ रुपये बचे। इसे केंद्र के पास रहना चाहिए। ऐसे में सीजीएसटी के लिए आईजीएसटी आवंटन बढ़कर 32,758 करोड़ रुपये और एसजीएसटी के लिए 21,975 करोड़ रुपये हो गया। 
 
केंद्र ने अप्रैल में अपने लिए आईजीएसटी संग्रह का 60 फीसदी रखा जबकि राज्यों को 40 फीसदी मिला। यह जुलाई 2017 में जीएसटी की शुरुआत के बाद के कुछ महीनों की तुलना में साझेदारी फॉर्मूले में अहम बदलाव दर्शाता है। 2017-18 के आठ महीनों में और अप्रैल 2018 में राज्यों को आईजीएसटी में अहम हिस्सेदारी मिली। मई 2018 में एसजीएसटी का हिस्सा बढऩे लगा। अक्टूबर में आईजीएसटी में सीजीएसटी का हिस्सा केवल 52 फीसदी था तो एसजीएसटी का हिस्सा 48 फीसदी था। आईजीएसटी में सीजीएसटी की हिस्सेदारी एसजीएसटी से थोड़ी अधिक होना तार्किक है। इसलिए कि अधिकांश करदाता पहले अपनी आईजीएसटी क्रेडिट का समायोजन सीजीएसटी के समक्ष करते हैं और उसके बाद एसजीएसटी के समक्ष। ऐसे में अनावंटित आईजीएसटी स्वाभाविक रूप से सीजीएसटी से अधिक और एसजीएसटी से कम होगा लेकिन अप्रैल 2019 में आईजीएसटी आवंटन सीजीएसटी के पक्ष में झुका हुआ नजर आया। संभव है केंद्र ने समझदारी दिखाते हुए अब ऐसी आवंटन व्यवस्था का अनुकरण शुरू किया हो जहां आवंटन बढ़ाकर राजस्व में इजाफा होता हो। जाहिर है, राज्य इससे नाखुश होंगे और चुनाव के बाद वे शिकायत कर सकते हैं। 
 
आईजीएसटी में 60 फीसदी हिस्सेदारी के साथ जीएसटी में केंद्र का संग्रह अप्रैल 2019 में 53,921 करोड़ होने का अनुमान था। अगर 2019-20 में 6.6 लाख करोड़ रुपये के सीजीएसटी और आईजीएसटी लक्ष्य को हासिल करना है तो औसत मासिक संग्रह करीब 55,000 करोड़ रुपये होना चाहिए। यानी अप्रैल महीने में अनुमान से 1,079 करोड़ रुपये का कम राजस्व प्राप्त हुआ है। परंतु एक बार आईजीएसटी को राज्यों के साथ साझा करने का फॉर्मूला बदलने के बाद अप्रैल का जीएसटी संग्रह उतना आकर्षक नहीं दिख रहा। कर संग्रह सालाना लक्ष्य हासिल करने के मुताबिक है या नहीं, इसका आकलन इस बात पर निर्भर करता है कि जीएसटी तंत्र कैसे काम करता है। किसी भी माह जीएसटी के अधीन संग्रहित राजस्व का एक हिस्सा पिछले महीने के लेनदेन से संबंधित होता है जबकि कुछ संग्रह के महीने से। परंतु पिछले महीने के लेनदेन से संबंधित राजस्व का हिस्सा हमेशा वित्त वर्ष के पहले महीने के राजस्व में बड़ी हिस्सेदारी रखता है। ऐसा इसलिए कि लेनदेन आमतौर पर वित्त वर्ष के अंतिम महीने के अंतिम सप्ताह में होता है। अप्रैल में जीएसटी संग्रह में इजाफा दिखना सामान्य है। अप्रैल 2018 में जीएसटी राजस्व 1.03 लाख करोड़ रुपये रहा और पहली बार एक लाख करोड़ का आंकड़ा पार कर सका। मार्च 2018 में 12 फीसदी से अधिक उछाल के साथ यह 92,167 करोड़ रुपये रहा। परंतु मई 2018 में कुल जीएसटी संग्रह केवल 94,016 करोड़ रुपये रहा जो कि नौ फीसदी कम था। ऐसे में अप्रैल 2019 में माह दर माह आधार पर 7.5 फीसदी की वृद्घि के बाद अगर मई 2019 में गिरावट आती है तो चौंकने की कोई बात नहीं। अप्रैल 2019 के संग्रह से सरकार को एक अलग वजह से राहत मिलेगी। जीएसटी राजस्व अपेक्षाकृत उच्च मासिक संग्रह के साथ स्थिर हुआ है। अगस्त 2017 से मार्च 2018 के बीच मासिक संग्रह करीब 84,000 करोड़ रुपये से 96,000 करोड़ रुपये रहा। वर्ष 2018-19 में मासिक संग्रह चार अवसरों पर एक लाख करोड़ का स्तर पार कर गया। इस अवधि में जीएसटी परिषद ने दो बार कई वस्तुओं की दर में कटौती की। एक बार नवंबर 2017 में हुआ और दूसरी बार दिसंबर 2018 में। 
 
बावजूद एसजीएसटी के तहत मासिक संग्रह दिसंबर 2018 के 22,000 करोड़ से बढ़कर अप्रैल 2019 में 28,800 करोड़ रुपये हो गया। सीजीएसटी में भी काफी बढ़ोतरी हुई। दिसंबर 2018 के करीब 16,400 करोड़ रुपये से बढ़कर अप्रैल 2019 में यह 21,100 करोड़ रुपये हो गया। आईजीएसटी संग्रह का 60:40 का सीजीएसटी के पक्ष वाला फॉर्मूला केंद्र को जीएसटी का वार्षिक लक्ष्य पाने में मदद कर रहा है। राज्य इसे शायद उचित नहीं मानें। एक बार इसमें बदलाव के बाद केंद्र का अपना जीएसटी संग्रह भी शायद उतना उत्साहवर्धक न रहे जितना वह अभी प्रतीत हो रहा है।
Keyword: gst, input tax, credit, crisil, IGST, SGST,,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या डीएचएफएल समाधान में बढ़ेगी बैंकों की मुश्किल?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.