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स्टार्टअप के प्रयासों पर नए सिरे से जोर

अजित बालाकृष्णन /  May 09, 2019

देश में बहुत बड़ी संख्या में एंजेल निवेशक तैयार करने की अवश्यकता है। ऐसा करके ही देश में स्टार्टअप को नए सिरे से गति प्रदान की जा सकती है। विस्तार से जानकारी दे रहे हैं अजित बालाकृष्णन

 
देश के राजनेता और नौकरशाह इन दिनों 'स्टार्टअप' शब्द को उतने ही उत्साह से बुदबुदाते हैं, जिस उत्साह से एक जमाने में लोग एक दूसरे को 'राम-राम' किया करते थे। उनको उम्मीद है कि वे जिस स्टार्टअप भगवान की पूजा अर्चना कर रहे हैं, वह किसी न किसी तरह तमाम युवाओं को अपना अनुयायी बना लेंगे और उनका ध्यान रोजगार जैसी चीजों से हटा देंगे ताकि वे उन पर पर्याप्त रोजगार नहीं तैयार करने का आरोप न लगाएं।  शायद अब वक्त आ गया है कि हम इस उत्साही प्रार्थना से विराम लें और यह समझने का प्रयास करें कि स्टार्टअप का पूरा खेल दरअसल है क्या? क्या इसे इस तरह भी समझ सकते हैं कि किसी भी नए शुरू किए गए छोटे कारोबार के लिए इस शब्द का इस्तेमाल किया जाता है? क्या स्टार्टअप शब्द का इस्तेमाल केवल कंप्यूटर से संबंधित नए कारोबारों के लिए ही किया जाता है? यानी किसी रेस्तरां या नई किराना दुकान या रियल एस्टेट एजेंट का कारोबार स्टार्टअप नहीं कहा जा सकता? जब कोई कारोबारी परिवार अपने बेटे या बेटी को आर्थिक मदद कर उसे नया कारोबार स्थापित करने में सहायता करता है तो क्या उसे स्टार्टअप कहा जा सकता है? क्या कोई मशीन की दुकान जो अनुबंध के आधार पर मशीन का काम करती हो, उसे स्टार्टअप माना जा सकता है? दूसरे शब्दों में कहें तो क्या केवल चुनिंदा प्रकार के नए कारोबारों को ही स्टार्टअप कहा जा सकता है और क्या सभी नए कारोबार उस श्रेणी में नहीं आते?
 
इन सवालों का जवाब देने की शुरुआत करने के लिए हमें कुछ और मूलभूत सवाल करने होंगे: उद्यमी (जो स्टार्टअप चलाते हैं) पैदा होते हैं या बनते हैं? क्या सफल उद्यमी ज्यादातर 20 से 30 की उम्र के होते हैं? क्या ऊंची शैक्षणिक डिग्री स्टार्टअप उद्यमियों की सहायता करती है या उनकी राह में बाधा खड़ी करती है? एक अनिवासी भारतीय उद्यमी विवेक वाधवा, जिन्होंने कई वर्षों तक इन मुद्दों पर अध्ययन किया है, वह अमेरिकी उद्यमियों के विषय में कहते हैं, 'सिलिकन वैली के उद्यमियों में से 52 फीसदी अपने परिवार में कारोबार करने वाले शुरुआती लोग थे।' वह आगे मार्क जुकरबर्ग, स्टीव जॉब्स, बिल गेट्स, जेफ बेजोस, लैरी पेज, सर्गेई ब्रिन और जॉन कुम का उदाहरण देते हुए कहते हैं इनमें से कोई भी कारोबारी पृष्ठभूमि से नहीं आया। उनके माता-पिता दंत चिकित्सक, शिक्षाविद, अधिवक्ता, फैक्टरी कामगार अथवा पादरी थे। वह यह भी कहते हैं कि आम धारणा के तहत जहां माना जाता है कि 20 से 30 की अवस्था के लोग सफलतापूर्वक स्टार्टअप चलाते हैं, वहीं मार्क बेनिऑफ ने जब सेल्सफोर्सडॉटकॉम की स्थापना की तो वह 35 वर्ष के थे। रीड हॉफमैन ने जब लिंक्डइन की स्थापना की तब वह 36 वर्ष के थे। ऐपल कंपनी में स्टीव जॉब्स के सबसे अहम अविष्कार आईमैक, आईट्यून, आईपॉड, आईफोन और आईपैड तब सामने आए जब वह 45 की उम्र के हो चुके थे। 
 
हमारे देश में स्टार्टअप उद्यमियों को जिस सबसे बड़ी बाधा का सामना करना पड़ता है, वह है शुरुआती स्तर पर पूंजी मुहैया कराने वालों यानी एंजल इन्वेस्टर्स की कमी। ये वे लोग होते हैं जो किसी भी स्टार्टअप को एकदम आरंभ में 50 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये तक की पूंजी देते हैं ताकि उद्यमी अपने उत्पाद का प्रादर्श बना सके और चुनिंदा शुरुआती ग्राहकों के बीच उसका परीक्षण कर सके।  ऐसी फंडिंग उस वक्त और बेहतर तरीके से काम करती है जब यह ऐसे व्यक्ति की ओर से आए जो युवा उद्यमियों को उनके शुरुआती ग्राहकों से जोड़ सके। हमारे कर कानून जिस प्रकार तैयार किए गए हैं, उन्हें देखते हुए यह बेहद मुश्किल है कि ऐंजल निवेशक स्टार्टअप के शुरुआती घाटे की भरपाई अपनी आय से करे। इसके लिए आयकर अधिनियम की धारा 10 (2ए) में मामूली बदलाव किया जा सकता है। यह धारा सीमित दायित्व साझेदारी वाली फर्म पर लागू होती है लेकिन दुर्भाग्य की बात है कि ऐसा कोई व्यापारिक संगठन नहीं है जो इसके लिए लॉबीइंग कर सके। ऐसा इसलिए कि अधिकांश व्यापारिक संस्थानों पर ऐसे पारिवारिक कारोबारों का दबदबा रहता है जिन्हें स्टार्टअप फंड की आवश्यकता नहीं होती। उनका परिवार ही उन्हें धन मुहैया करा देता है। 
 
यहां तक कि राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (एनएसडीसी) के फंडिंग संबंधी दस्तावेज बताते हैं कि एनएसडीसी ऋण के रूप में फंडिंग मुहैया कराने को प्राथमिकता देगा। वह यह भी कहता है कि प्रवर्तक का योगदान निवेश आवश्यकता के 25 फीसदी के बराबर होना चाहिए। इतना ही नहीं मूल शुल्क स्थगन तीन वर्ष का होना चाहिए। इसके अतिरिक्त किसी तरह का शुल्क स्थगन या ब्याज नहीं दिया जाना चाहिए। इसे इस तथ्य के साथ पढ़ें कि 90 फीसदी स्टार्टअप नाकाम हो जाते हैं। जाहिर है किसी उद्यम के लिए इन शर्तों पर ऋण लेना आत्मघाती है। स्टार्टअप के बारे में एक अन्य पहलू जिसकी हमारे नीतिकार अक्सर अनदेखी करते हैं, वह यह है कि परिभाषा के आधार पर तो यह उभरती तकनीक का क्षेत्र है। यानी स्टार्टअप ऐसी तकनीक से संबंधित नहीं होते जो लंबे समय से अस्तित्व में हो और जो जिंस की तरह आसानी से उपलब्ध हो। बावजूद अगर आप केंद्र सरकार और कई राज्य सरकारों द्वारा बढ़ावा दिए जा रहे कौशल को देखेंगे तो उनसे यह स्पष्ट है कि इनमें से कोई भी कौशल आज स्टार्टअप का आधार नहीं बन सकता है। आज किसी भी स्टार्टअप की अवधारणा काफी हद तक डेटा विज्ञान और मशीन लर्निंग से संबद्घ है। 
 
हमने शुरुआत में एक प्रश्न किया कि क्या स्टार्टअप चलाना रेस्तरां खोलने, किराना दुकान चलाने या अचल संपत्ति कारोबार से अलग है? इसका उत्तर यह है कि स्टार्टअप का अर्थ ही है कोई ऐसा उद्यम जिसके पीछे के मूल कारोबारी विचार को उन्नत तकनीक, कंप्यूटर, इंटरनेट, डेटा विज्ञान, मशीन शिक्षण, जैव प्रौद्योगिकी आदि का समर्थन मिल रहा हो और इनकी सहायता से वह आम भारतीयों की रोजमर्रा की  समस्याओं के निराकरण का एकदम नया तरीका तलाश कर लाया हो।  अनुमान लगाया जा सकता है कि ऐसे स्टार्टअप उद्यमी ज्यादातर 30 वर्ष के आसपास की उम्र के होंगे या फिर ज्यादा से ज्यादा 40 की उम्र के शुरुआती पड़ाव पर। बहुत संभव है इनके माता-पिता चिकित्सक, अधिवक्ता, शिक्षाविद आदि हों और उनके परिवार में पहले से कोई कारोबारी माहौल नहीं हो। ऐसे उद्यम शुरू करने के लिए जरूरी पूंजी एंजेल निवेशकों की जोखिम पूंजी से आती है। ऐसा केवल तभी हो सकता है जब हम कर किफायत वाले एंजेल निवेशक तैयार करें और उनके पास इस क्षेत्र में निवेश की विशेषज्ञता हो। जरा कल्पना कीजिए एक ऐसे भारत की जहां हजारों एंजेल निवेशक स्टार्टअप उद्यमी बनने की राह पर हों। 
Keyword: startup, company, jobs,,
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