बिजनेस स्टैंडर्ड - भारतीय शुल्क व्यापार में बाधक: रॉस
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भारतीय शुल्क व्यापार में बाधक: रॉस

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली 05 07, 2019

अमेरिकी वाणिज्य मंत्री का भारत दौरा

बिजनेस स्टैंडर्ड भारतीय शुल्क व्यापार में बाधक: रॉसअमेरिका के वाणिज्य मंत्री विल्बर रॉस ने आज भारत पर आरोप लगाया कि वह अमेरिकी उत्पादों पर ज्यादा शुल्क लगा रहा है, बाजार तक पहुंचने में रुकावट पैदा कर रहा है और उसने कड़ी नियामकीय व्यवस्था बना रखी है। भारत और अमेरिका के बीच पिछले कुछ महीनों में व्यापार से संबंधित कई मतभेद उभरे हैं और इसी सिलसिले में रॉस भारत आए हुए हैं। उन्होंने सुबह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की।

भारत में अमेरिका के राजदूत केनेथ जस्टर ने कहा, 'भारत सरकार व्यापार मुद्दों पर हमारे रुख को अच्छी तरह जानती है।' अलबत्ता सूत्रों के मुताबिक अमेरिका ने संकेत दिया है कि वह जनरलाइज्ड सिस्टम ऑफ प्रिफरेंसेज (जीएसपी) व्यापार योजना के तहत अमेरिकी बाजारों में भारत के शुल्क मुक्त प्रवेश पर 23 मई तक रोक नहीं लगाएगा। जीएसपी योजना से भारत को सबसे ज्यादा फायदा हुआ है। इसके तहत 2017-18 में भारत ने अमेरिका को 5.6 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया था। जीएसपी की सुविधा खत्म करना भारत की प्रमुख चिंता है लेकिन रॉस और वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री सुरेश प्रभु के बीच एक दिन पहले हुई मंत्रिस्तरीय वार्ता में इस मुद्दे पर कोई चर्चा नहीं हुई।

शुल्क पर टकराव

रॉस ने कहा कि अमेरिका में भारत के कई उत्पादों पर कोई शुल्क नहीं लगता है। इनमें मोटरसाइकल, प्रौद्योगिकी उत्पाद और कृषि उत्पाद शामिल हैं। लेकिन भारत ने अमेरिका से आयात होने वाले इस तरह के उत्पादों पर बहुत ज्यादा शुल्क लगा रखा है। वह यूएस ट्रेड विंड्स इंडो-पैसिफिक बिज़नेस फोरम ऐंड मिशन इनिशिएटिव 2019 में बोल रहे थे। भारत ने उनके इस दावे का खंडन करते हुए कहा कि मौजूदा शुल्क विश्व व्यापार संगठन के नियमों के मुताबिक हैं और दूसरे देश अपने घरेलू उद्योगों को बचाने के लिए कहीं ज्यादा शुल्क वसूल रहे हैं। रॉस ने कहा, 'भारत की औसत शुल्क दर 13.8 फीसदी है और यह किसी भी बड़ी विश्व अर्थव्यवस्था में सर्वाधिक है। उसने वाहनों पर 60 फीसदी और मोटरसाइकल पर 50 फीसदी शुल्क लगा रखा है। कृषि उत्पादों पर औसतन 113.5 फीसदी और कई मामलों में 300 फीसदी तक शुल्क लगा रखा है।'

अमेरिकी वाणिज्य मंत्री ने कहा कि ट्रंप सरकार भारत को अपना प्रमुख व्यापार साझेदार मानती है। भारत ने अपने बाजारों में अमेरिकी उत्पादों की पहुंच को मुश्किल बना रखा है जिसके कारण वह अमेरिका के लिए 13वां सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। दूसरी ओर अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। भारतीय निर्यात में अमेरिका की 20 फीसदी हिस्सेदारी है। अमेरिका भारत के साथ अपने व्यापार घाटे को कम करने के लिए पूरा जोर लगा रहा है जो 2018 में 21 अरब डॉलर था।

रॉस भारत की नियामकीय व्यवस्थाओं पर भी जमकर बरसे। उन्होंने कहा, 'हमारे यहां भ्रष्ट तरीकों से निपटने के लिए सख्त कानून है जो भारत सरकार को आश्वासन देता है कि हमारी कंपनियां यहां कोई गड़बड़ी नहीं कर सकती हैं। अमेरिकी कंपनियों को भी यहां पारदर्शी व्यवस्था में काम करने की जरूरत है जिसे कानून का समर्थन हो और उन्हें समान अवसर मिलें।' उन्होंने कहा कि चिकित्सा उपकरणों और दवाओं की कीमत पर नियंत्रण और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं दूरसंचार उत्पादों पर शुल्क भी आपसी व्यापार में बाधक हैं।

हालांकि रॉस ने अमेरिका में इस्पात और एल्युमीनियम पर लगने वाले शुल्क का मुद्दा भी उठाया। भारत ने इसमें छूट की मांग की है। इस शुल्क का मकसद घरेलू और विदेशी कंपनियों को देश में ही उत्पादन बढ़ाने और आयात कम करने के लिए विवश करना है। रॉस ने कहा कि जेएसडब्ल्यू स्टील ने ओहायो में एक इस्पात संयंत्र के अधिग्रहण और उन्नयन पर 25 करोड़ डॉलर का शुरुआती निवेश करने की घोषणा की है। साथ ही कंपनी टैक्सस में एक अन्य संयंत्र के विस्तार पर 50 करोड़ डॉलर का निवेश करेगी। उन्होंने कहा, 'अगर किसी को लगता है कि शुल्क लगाने से कुछ नहीं होता है तो 75 करोड़ डॉलर का यह एफडीआई इस बात का सबूत है कि यह तरकीब काम आती है।'

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