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नहीं गल रही आयात की दाल

दिलीप कुमार झा / मुंबई May 05, 2019

दलहन आयात दो साल पहले के शीर्ष स्तर 66 लाख टन से गिरकर वित्त वर्ष 2018-19 में 25 लाख टन के स्तर पर आ चुका है। वित्त वर्ष 2019-2020 के दौरान यह एक बार फिर गिरकर 10 लाख टन से नीचे रहने की उम्मीद है। कुछ साल पहले जब दलहन के दाम आसमान छू रहे थे तब 2016-17 (वित्त वर्ष 2016) में आयात उछलकर नए रिकॉर्ड स्तर 66 लाख टन पर पहुंच गया था। देश में एक बार फिर दलहन की ज्यादा खेती होने लगी क्योंकि आयात बढऩे से स्थानीय खेती को नुकसान हो रहा था और दाम भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे पहुंच गए थे। हालांकि विभिन्न तरह की रोक के बाद आयात में गिरावट शुरू हो गई थी।
 
कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) के आंकड़े बताते हैं कि अप्रैल 2018 और फरवरी 2019 के बीच भारत का कुल दलहन आयात 22.3 लाख टन रहा। वित्त वर्ष 19 के दौरान भारत में कुल दलहन आयात लगभग 25 लाख टन रहने का अनुमान लगाया गया था। इस मॉनसून सीजन में सामान्य बारिश के पूर्वानुमान के बाद घरेलू उत्पादन में वृद्धि का अनुमान है। इससे वित्त वर्ष 2020 के दौरान दलहन आयात में 68 प्रतिशत की गिरावट आने की संभावना है। विदेश व्यापार महानिदेशालय ने वित्त वर्ष 2020 में 6,50,000 टन दलहन आयात के लाइसेंस जारी करने के लिए अधिसूचना जारी की है। भारत द्विपक्षीय व्यापार के तहत मोजाम्बिक से 1,75,000 टन आयात करने वाला है। इससे वित्त वर्ष 20 का कुल आयात 8,25,000 टन बैठता है।
 
दलहन आयात में गिरावट से उन भारतीय किसानों को राहत मिलने वाली है जिन्हे पूरे वर्ष के दौरान दामों में नरम रुख का सामना करना पड़ा। आयात में गिरावट से घरेलू बाजार की कीमतों में सुधार की भी उम्मीद है। कीमतों को इस वर्ष मॉनसून के असमान वितरण और नतीजतन कम उत्पादन से मदद मिलेगी। केयर रेटिंग्स के मुख्य अर्थशास्त्री मदन सबनवीस ने कहा कि पिछले साल कम दाम मिलने से किसान इस साल दलहन की बुआई के लिए अनिच्छुक रह सकते हैं। लेकिन बहुत कुछ उनके लिए उपलब्ध विकल्पों पर निर्भर करेगा जो बारिश के बाद ही सामने आएंगे। 
Keyword: agri, farmer, crop, pulses, import,,
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