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एनबीएफसी संकट से बढ़ेगी डेवलपरों की चिंता

राघवेंद्र कामत / मुंबई May 05, 2019

ताजा एनबीएफसी संकट से प्रॉपर्टी डेवलपरों के लिए उधारी दरें बढ़ सकती हैं और बड़े रियल एस्टेट डेवलपरों के लिए भी चुनौती पैदा हो सकती है। आवास वित्त कंपनियों के साथ साथ एनबीएफसी का प्रॉपर्टी डेवलपरों के ऋणों में लगभग 60 प्रतिशत का योगदान है।एक एनबीएफसी का भी संचालन करने वाली मुंबई स्थित फंड प्रबंधक निसुस फाइनैंस के प्रबंध निदेशक एवं मख्ुय कार्याधिकारी अमित गोयनका का कहना है, 'उधारी दरों में 60-70 आधार अंक तक का और इजाफा देखा जा सकता है। अब तक सिर्फ छोटे और मझोले स्तर के डेवलपर ही प्रभावित हुए हैं। मेरा मानना है कि अब बड़े डेवलपरों को भी नकदी समस्याओं से जूझना पड़ेगा।'
 
आईएलऐंडएफएस संकट के बाद, डेवलपरों के लिए उधारी दरें 200-300 आधार अंक तक बढ़ गईं, क्योंकि एनबीएफसी को नकदी दबाव का सामना करना पड़ा है। जहां एनबीएफसी ने दरों में 18-19 फीसदी तक का भारी भरकम इजाफा किया है, वहीं पीई फंडों ने 23 प्रतिशत तक की ब्याज दर वसूलनी शुरू कर दी है। डीएलएफ के मुख्य कार्याधिकारी राजीव तलवार ने कहा, 'संकट की स्थिति देखने को मिलेगी, क्योंकि एनबीएफसी स्वयं दबाव में हैं।' हालांकि तलवार ने कहा कि डीएलएफ को रेंटल इकाई में प्रवर्तक हिस्सेदारी जीआईसी को बेचे जाने और ताजा क्यूआईपी के बाद अपने कम कर्ज की वजह से किसी तरह की समस्या नहीं दिख रही है। उन्होंने कहा कि बड़े ऋण बोझ वाले डेवलपरों को समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
 
डेवलपरों को नकदी संकट से जूझना पड़ रहा है, क्योंकि कई एनबीएफसी और एचएफसी ने डेवलपरों और घर खरीदारों, दोनों को उधारी बंद कर दी है। उदाहरण के लिए, डीएचएफएल और एडलवाइस ने घर खरीदारों और प्रॉपर्टी डेवलपरों को उधारी रोक दी है। पीरामल एंटरप्राइजेज ने भी सुस्ती बरती है और वह कुछ ही डेवलपरों को ऋण दे रही है। हाल में कन्फेडरेशन ऑफ रियल एस्टेट डेवलपर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने वित्त मंत्रालय को भेजे पत्र में आरोप लगाया कि एनबीएफसी, खासकर इंडियाबुल्स ने रियल एस्टेट डेवलपरों के लिए उधारी दरें बढ़ा दी हैं और एस्क्रो प्रतिशत 30 से बढ़ाकर 100 प्रतिशत तक कर दिया गया है। इस संबंध में डीएचएफएल और एडलवाइस को भेजे गए ईमेल संदेश का कोई जवाब नहीं मिला है। 
 
इंडियाबुल्स के एक अधिकारी ने हाल में बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया था कि रियल एस्टेट कंपनियों को ऋण बंद नहीं किया गया है। उन्होंने कहा, 'हम अपने ग्राहक कंपनियों को उनकी निर्माण प्रगति के आधार पर रकम वितरण बरकरार रखे हुए हैं। हमारी सभी रियल एस्टेट डेवलपर परिसंपत्तियां उच्च गुणवत्ता वाली हैं, लेकिन हम देश के प्रमुख शहरों में शीर्ष-15 डेवलपरों को ही रकम मुहैया कराते हैं।' लेकिन रियल एस्टेट क्षेत्र में नकदी स्थिति चुनौतीपूर्ण दिख रही है। एनारॉक कैपिटल के प्रबंध निदेशक शोभित अग्रवाल ने कहा, 'इस्तेमाल के लिए रकम नहीं है। एनबीएफसी में चाहे ताजा संकट हो या नहीं, स्थिति समान बनी रहेगी।'
 
मौजूदा नकदी संकट उन डेवलपरों के लिए दोहरी समस्या के तौर पर सामने आया है जो पहले से ही विभिन्न नियामकीय चुनौतियों से भी जूझ रहे हैं। हीरानंदानी कंस्ट्रक्शसंस के चेयरमैन निरंजन हीरानंदानी का कहना है कि रियल एस्टेट कंपनियों को नियामकीय बदलावों की चुनौती से जूझना पड़ा है। इन नियामकीय बदलावों से बिक्री में मंदी और ऋण दबाव जैसी चुनौतियां पैदा हुई हैं। उन्होंने कहा, 'इस दोहरी समस्या' को देखते हुए नकदी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि बैंक बड़े पैमाने पर रियल एस्टेट कंपनियों को ऋण मंजूर नहीं कर रहे हैं और घर खरीदारों के लिए ऋण वितरण की रफ्तार भी धीमी है।'
 
(साथ में करन चौधरी और सुब्रत पांडा)
Keyword: NBFC, bank, micro finance, real estate,,
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